पुष्कर सिंह धामी सरकार के चार साल पूरे हुए हैं, जिस पर बीजेपी ने जश्न मनाते हुए उपलब्धियां गिनाईं. लेकिन कांग्रेस ने इस मौके को सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने के लिए चुना और एक के बाद एक ऐसे सवाल दागे जिनका जवाब सरकार के पास फिलहाल नहीं है. कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और विधायक प्रीतम सिंह ने कहा 'चार साल में क्या बदला? माफिया राज जारी है, नदियां चीरी जा रही हैं, बेरोजगार सड़कों पर हैं और सरकार बस राजस्व के आंकड़े थमाती रहती है.'
बीजेपी के अपने ही लोग अवैध खनन पर उठा रहे सवाल
प्रीतम सिंह का सबसे तीखा तंज यह था कि धामी सरकार की पोल उसके अपने ही खोल रहे हैं. हरिद्वार से बीजेपी सांसद और पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने संसद में अवैध खनन का मुद्दा उठाया. गदरपुर से बीजेपी विधायक अरविंद पांडेय ने भी इसी मुद्दे पर आवाज बुलंद की. अवैध शराब के मामले में तो खुद ऋषिकेश के बीजेपी विधायक और पूर्व मंत्री को सदन में बोलना पड़ा. प्रीतम सिंह ने कहा कि 'जब सरकार के अपने विधायक और सांसद सवाल उठा रहे हैं और संतोषजनक जवाब नहीं मिल रहा, तो यह सरकार की विफलता नहीं तो और क्या है?'
नशामुक्त देवभूमि का नारा सरकार के सामने आईना रह गया
उत्तराखंड में अवैध खनन कोई नई समस्या नहीं है. लेकिन चार साल बाद भी यह जस का तस बना हुआ है, जिस पर सवाल उठ रहा है. प्रीतम सिंह का आरोप है कि ओवरलोड ट्रक धड़ल्ले से चल रहे हैं, हादसे हो रहे हैं, नदियों को बेतहाशा खोदा जा रहा है और सरकार सिर्फ राजस्व बढ़ने के दावे करती रहती है. उन्होंने सदन में इस पर सवाल पूछा, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला.
'नशामुक्त देवभूमि' का यह नारा बीजेपी सरकार खूब लगाती है. लेकिन प्रीतम सिंह ने इसी नारे को सरकार के सामने आईना बनाकर रख दिया. उनका कहना है कि आबकारी विभाग में मिलीभगत इतनी गहरी है कि अवैध शराब का कारोबार रुकने का नाम नहीं ले रहा. जब खुद बीजेपी के विधायक सदन में इस पर आवाज उठाएं तो समझ लीजिए कि जमीनी हालात कितने बुरे हैं.
कांग्रेस ने चार साल के आंकड़ों को जुबानी ही किया पेश
कांग्रेस ने सरकार के चार साल का हिसाब आंकड़ों में भी पेश किया. पार्टी का दावा है कि 15वें वित्त आयोग के तहत उत्तराखंड को 28 हजार करोड़ रुपये मिले, लेकिन 16वें वित्त आयोग में अपेक्षित धनराशि नहीं मिल पाई.
प्रदेश में मातृशक्ति का पोषण स्तर 56 फीसदी गिरा है. 10 लाख से ज्यादा बेरोजगार पंजीकृत हैं. कृषि विकास दर में 4 फीसदी की गिरावट आई है और यूरिया की कीमतें भी बढ़ी हैं, जो सीधे किसान की जेब पर मार करती है. नमामि गंगे योजना में भ्रष्टाचार के आरोप भी कांग्रेस ने लगाए और पलायन जो उत्तराखंड का सबसे पुराना और सबसे दर्दनाक जख्म है, वह भी जस का तस है.
सदन में जो सवाल उठे बीजेपी उसका ईमानदारी से दे जवाब
प्रीतम सिंह ने सरकार से कोई बड़ी क्रांति नहीं मांगी. उनकी मांग सीधी है कि सदन में जो सवाल उठे हैं, उनका ईमानदारी से जवाब दो और जवाब सिर्फ कागजों में नहीं, जमीन पर दिखाओ. चार साल एक लंबा वक्त होता है, इसमें बहुत कुछ बदल सकता है और बहुत कुछ वैसा ही रह सकता है. उत्तराखंड की जनता अगले चुनाव में यही हिसाब मांगेगी. कांग्रेस ने अभी से वह हिसाब तैयार करना शुरू कर दिया है.
