Char Dham Yatra 2025: चारधाम यात्रा को शुरू हुए लगभग एक महीने से अधिक का समय हो चुका है. इस बीच लाखों की संख्या में चारधाम यात्रा करने पहुंच चुके हैं. चारधाम यात्रा के दौरान अब तक 80 तीर्थ यात्रियों की मौत हुई है, इनमें से 71यात्रियों की मौत स्वास्थ्य संबंधी कारणों के चलते हुई है. मरने वालों में कई बुजुर्ग और पूर्व से बीमार यात्री थे जिनकी पुरानी मेडिकल हिस्ट्री रही है.
आंकड़ों के अनुसार यात्रा के शुरू होने के 36 दिनों में लगभग 80 यात्रियों की मौत हुई है लेकिन इनमें अधिकतर पूर्व से बीमार यात्री शामिल है. इनमें से सबसे ज्यादा मौतें केदारनाथ धाम में हुई हैं, इन मौतों एक बड़ा कारण Altitude Sickness (ऊंचाई से बीमारी) माना जा रहा है इस बीमारी को ऊंचाई पर होने वाली बीमारी भी कह सकते है, जिसके बारे में बहुत कम लोगों को जानकारी होती है
क्या होता है Altitude Sickness?Altitude Sickness एक ऐसी शारीरिक स्थिति है जो अधिक ऊंचाई पर जाने से शरीर में ऑक्सीजन की कमी के कारण उत्पन्न होती है. जैसे-जैसे व्यक्ति ऊंचे स्थान पर चढ़ता है, हवा का दबाव और उसमें मौजूद ऑक्सीजन की मात्रा घटती जाती है. इससे शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती और सांस लेने में कठिनाई होने लगती है,यह बीमारी उन लोगों को अधिक प्रभावित करती है जो खास कर मैदानी इलाकों में रहते हैं और ऊंचाई पर रहना उनके शरीर के लिए नया अनुभव होता है.
आंकड़ों के मुताबिक, चारधाम यात्रा के दौरान सबसे ज्यादा मौतें केदारनाथ धाम में 34, बदरीनाथ धाम में 16, यमुनोत्री धाम में 12, गंगोत्री धाम में 9 मौते हुई हैं. वहीं इसके अलावा 9 यात्रियों की मौत अन्य कारणों से हुई है. हालांकि, राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि इस वर्ष चिकित्सा सुविधाएं पहले से बेहतर हैं, लेकिन इसके बावजूद 50 वर्ष से ऊपर के कई श्रद्धालु बिना जरूरी स्वास्थ्य जांच के यात्रा पर निकल पड़ते हैं, जिससे घटनाएं बढ़ती जा रही हैं.
क्या है इस बीमारी के लक्षणAltitude Sickness के लक्षण व्यक्ति विशेष की सहनशक्ति, आयु और चढ़ाई की गति पर निर्भर करते हैं. आमतौर पर इसके लक्षण ऊंचाई पर पहुंचने के पहले या दूसरे दिन दिखने लगते हैं. इस बीमारी के कुछ सामान्य कारण हैं जैसे सिरदर्द, मतली और उल्टी, भूख न लगना, नींद न आना, थकान और कमजोरी, चक्कर आना और सांस लेने में परेशानी शामिल है.
क्यों होता है Altitude Sicknessजब कोई व्यक्ति समुद्र तल से ऊपर 8 हजार फीट या उससे अधिक ऊंचाई पर तेजी से चढ़ाई करता है, तो वातावरण में ऑक्सीजन की मात्रा काफी कम हो जाती है. शरीर को ऊंचाई के साथ तालमेल बैठाने में समय चाहिए, लेकिन जब यह प्रक्रिया तेजी से होती है, तो शरीर ऑक्सीजन के लिए संघर्ष करता है और लक्षण प्रकट होने लगते हैं
इस बीमारी की चपेट में सब से अधिक 50 साल से ऊपर के लोग आते है जैसे पहले से हृदय या श्वास रोग से पीड़ित,उच्च रक्तचाप या मधुमेह के रोगी,जो पहली बार ऊंचाई वाले इलाके में जा रहे हैं,अत्यधिक मोटापे या शारीरिक कमजोरी वाले लोग शामिल है.
इस बीमारी के कुछ उपाय भी है जिनसे आप खुद को सुरक्षित रख सकते है-
1- धीरे-धीरे चढ़ाई करें हर दिन 300-500 मीटर से अधिक की चढ़ाई न करें.2- शरीर को अनुकूल बनाने दें ऊंचाई पर पहुंचने के बाद कुछ समय आराम करें, ताकि शरीर को वातावरण से तालमेल बिठाने का समय मिले.3- पर्याप्त पानी पिएं डिहाइड्रेशन से बचें, जिससे शरीर की क्षमता बेहतर बनी रहती है.4- भारी भोजन से परहेज करें हल्का और सुपाच्य भोजन लें.5- स्वास्थ्य जांच करवाएं यात्रा से पहले डॉक्टर से सलाह और स्वास्थ्य परीक्षण कराएं.6- लक्षण दिखने पर तुरंत नीचे उतरें यदि कोई भी गंभीर लक्षण दिखे, तो बिना देरी के नीचे की ओर लौटना ही सबसे बेहतर विकल्प है.
चारधाम यात्रा एक पवित्र और आध्यात्मिक अनुभव है, लेकिन इसे पूरी सतर्कता और जिम्मेदारी के साथ करना चाहिए. Altitude Sickness एक ऐसी सच्चाई है जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, सरकार और स्वास्थ्य विभाग अपनी ओर से कोशिश कर रहे हैं, लेकिन तीर्थयात्रियों को भी चाहिए कि वे अपनी सेहत को प्राथमिकता दें. धार्मिक आस्था ज़रूरी है, लेकिन उससे भी ज़रूरी है स्वस्थ शरीर इसलिए तैयारी के साथ यात्रा करें और सुरक्षित रहें.
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