उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) अभी से एक्शन मोड में है और हर सीट की बारीकी से मॉनिटरिंग कर रही है. इसी बीच पार्टी के एक आंतरिक सर्वे (Internal Survey) की रिपोर्ट ने राजनीतिक हलचल तेज कर दी है. इस हालिया सर्वे में पार्टी के 8 मौजूदा विधायकों का रिपोर्ट कार्ड उम्मीद से बेहद कमजोर पाया गया है, जिसके बाद से संबंधित विधायकों की नींद उड़ी हुई है.

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सूत्रों की मानें तो पार्टी आलाकमान आगामी चुनाव में 'सत्ता विरोधी लहर' (Anti-Incumbency) से बचने के लिए अभी से हर सीट पर फीडबैक जुटा रहा है. सर्वे में 8 विधायकों के खराब प्रदर्शन को देखते हुए संगठन ने उन्हें अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रियता बढ़ाने और जनता के बीच पैठ मजबूत करने के सख्त निर्देश दिए हैं. माना जा रहा है कि यदि समय रहते इन विधायकों ने अपनी स्थिति और छवि में सुधार नहीं किया, तो आगामी चुनाव में इनके टिकट पर कैंची चलना लगभग तय है.

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विधायक विनोद चमोली ने दी प्रतिक्रिया

सर्वे की इस रिपोर्ट और टिकट कटने की अटकलों पर बीजेपी विधायक विनोद चमोली ने अपनी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने इसे एक सामान्य प्रक्रिया बताते हुए कहा, "चुनाव अभी काफी दूर हैं और इस तरह के सर्वे समय-समय पर होते रहते हैं. हर एक-दो महीने में अलग-अलग एजेंसियां अपने-अपने मानकों और टारगेट क्षेत्रों के हिसाब से सर्वे करती हैं. इसलिए अभी से किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी."

चुनाव से 3 महीने पहले होगा 'फाइनल फैसला'

चमोली ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आएंगे, सर्वे की असली तस्वीर भी साफ होती जाएगी. उन्होंने बताया कि टिकटों को लेकर अंतिम निर्णय चुनाव से दो-तीन महीने पहले होने वाले 'फाइनल सर्वे' के आधार पर ही लिया जाएगा. उसी सर्वे के आधार पर यह तय होगा कि किन उम्मीदवारों को दोबारा मौका दिया जाए और किन सीटों पर नए चेहरों की जरूरत है.

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बीजेपी इस बार कोई जोखिम लेने के मूड में नहीं है, इसलिए जमीनी स्तर पर हर विधायक के कामकाज की कड़ी समीक्षा की जा रही है. अब यह देखना दिलचस्प होगा कि डेंजर जोन में आए ये विधायक अपनी साख कैसे बचाते हैं.

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