Uttarakhand News: उत्तराखंड की तमाम नगर निकायों में प्रशासकों की तैनाती होगी, सरकार इसकी तैयारी में जुट गई है. इसके पीछे की वजह ये बताई जा रही है कि अभी तक वोटर लिस्ट तैयार नहीं हो पाई है. इसके साथ ही सरकार के इस फैसले की पीछे ओबीसी आयोग को लेकर आई एक रिपोर्ट को भी बड़ी वजह बताया जा रहा है.
सरकार की ओर से प्रदेश के सभी 84 नगर निकायों में प्रशासकों की नियुक्ति की तैयारियां तेज हो गई हैं. इसके लिए शहरी विकास निदेशालय ने शासन को प्रस्ताव भेज दिया है, जिस पर शासन जल्दी निर्णय ले सकता है. 2 दिसंबर से या नए बोर्ड के गठन तक यह प्रशासक नियुक्त होंगे. शहरी विकास निदेशालय के मुताबिक वर्ष 2018 में निर्वाचित 84 नगर निकायों, नए निकाय के गठन के बाद जो संख्या बड़ी है. उनका कार्यकाल 1 दिसंबर 2023 को पूरा हो रहा है.
निकायों में तैनात होंगे प्रशासकनिदेशालय ने निकायों का परिसीमन राज्य निर्वाचन आयोग को भेजा था जिसके तहत मतदाता सूची बनाने की प्रक्रिया चल रही है. फरवरी में पहले सप्ताह में आयोग अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित करेगा. उधर अकाल सदस्य समर्पित आयोग की ओर से निकायों में ओबीसी सर्वेक्षण होना है. जिसकी रिपोर्ट अभी तक सरकार को प्राप्त नहीं हो पाई है.
इस आधार पर निदेशालय ने अप नगर पालिका व नगर निगम अधिनियम उत्तराखंड में यथा प्रवृत्त के निकायों में प्रशासक तैनात करने की सिफारिश की है. यह प्रशासक दम या उनके स्तर के नामित अधिकारी होंगे जो एसडीएम से नीचे का ना हो अपरिदेशक अशोक पांडे की ओर से इसका प्रस्ताव शासन को भेजा गया है.
प्रशासकों की नियुक्ति पर राजनीति तेजइसके बाद राजनीति भी शुरू हो गई है, कांग्रेस ने फिर से एक बार भारतीय जनता पार्टी की सरकार पर आरोप लगाया है कि हार के डर से भाजपा संगठन ने अपनी सरकार को ये सुझाव दिया है कि अभी चुनाव न कराए जाय ताकि हार का अनुपात कम हो सके. कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा ने सीधे सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा है कि अगर दम है आप में तो कराओ चुनाव और देखो जनता किसे चुनती है.
बीजेपी ने इसको लेकर कहा है कि इस सब से बीजेपी या सरकार का कोई लेना देना नही है. ये सब शासन की और चुनाव आयोग की बात है. वो अगर चुनाव कराना चाहेंगे तो हम तैयार हैं. हम हमेशा चुनाव के लिए तैयार रहने वाली पार्टी है हमें चुनाव से डर नहीं लगता चुनाव आयोग अगर कहेगा तो हम कल ही चुनाव के लिए तैयार होंगे.