UP News: उत्तर प्रदेश, जो कभी अपनी बिजली की भारी किल्लत के लिए जाना जाता था, आज देश के सबसे बड़े 'सोलर हब' के रूप में उभर रहा है. उत्तर प्रदेश सौर ऊर्जा नीति 2022 के तहत राज्य सरकार ने 2026-27 तक 22,000 मेगावाट (MW) सौर ऊर्जा उत्पादन का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है. इस लक्ष्य को हासिल करने में राज्य के विभिन्न जिलों में बन रहे सोलर पार्क रीढ़ की हड्डी साबित हो रहे हैं.
बुंदेलखंड: यूपी का नया 'पावर हाउस'
सोलर एनर्जी के मामले में बुंदेलखंड क्षेत्र सबसे आगे है. अपनी भौगोलिक स्थिति और प्रचुर धूप के कारण यहां बड़े पैमाने पर सोलर पार्क विकसित किए जा रहे हैं:
झांसी, ललितपुर और चित्रकूट: इन तीन जिलों में लगभग 2,000 मेगावाट की क्षमता वाले तीन बड़े सोलर पार्क निर्माणाधीन हैं, जिनका कार्य 2026 तक पूरा होने की उम्मीद है.
जालौन: यहां 1,200 मेगावाट क्षमता का विशाल सोलर पार्क विकसित किया जा रहा है, जो उत्तर भारत के सबसे बड़े पार्कों में से एक होगा.
कानपुर और प्रयागराज: बुंदेलखंड के अलावा कानपुर नगर, कानपुर देहात और प्रयागराज में भी सोलर पार्कों के लिए जमीन और निवेश की प्रक्रिया तेज कर दी गई है.
निवेश और रोजगार के नए अवसर
उत्तर प्रदेश में सौर ऊर्जा क्षेत्र में लगभग ₹7.5 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव मिले हैं. ये सोलर पार्क न केवल पर्यावरण को बचाने में मदद कर रहे हैं, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार भी पैदा कर रहे हैं. सरकार ने 30,000 युवाओं को 'सूर्य मित्र' के रूप में प्रशिक्षित किया जा रहा है, जो सोलर पैनलों के रखरखाव और संचालन में मदद करेंगे.
सोलर सिटी और एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट
अयोध्या को राज्य की पहली 'मॉडल सोलर सिटी' के रूप में विकसित किया जा रहा है. इसके अलावा, यूपी के 16 नगर निगमों को भी सोलर सिटी बनाने की योजना है. एक और अभिनव पहल के तहत, उत्तर प्रदेश के एक्सप्रेसवे (जैसे बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे) के किनारे सोलर पैनल लगाए जा रहे हैं, जिससे लगभग 500 मेगावाट बिजली पैदा होगी.
सोलर पार्कों का यह जाल न केवल यूपी को बिजली के मामले में आत्मनिर्भर बनाएगा, बल्कि कार्बन उत्सर्जन कम करके एक 'क्लीन और ग्रीन' उत्तर प्रदेश की नींव भी रखेगा. यह बदलाव आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित और सतत भविष्य की गारंटी है.