Azamgarh News: आजमगढ़-मऊ से कुक, सिक्योरिटी गार्ड बनने गए थे रूस, ताबूत में आया शव
Azamgarh News In Hindi: रूस-यूक्रेन युद्ध में फंसे आजमगढ़-मऊ के युवकों के शव गुरुवार को घर पहुंचे. एजेंटों के झांसे में फंसकर गए युवक जबरन युद्ध में भर्ती कर दिए गए थे.

रूस-यूक्रेन युद्ध में फंसे आजमगढ़ और मऊ जिले के युवकों की दर्दनाक कहानी एक बार फिर सामने आई है. गुरुवार को इनमें से दो युवकों अजहरुद्दीन खान और रामचंद्र का शव उनके घर पहुंचा. दोनों युवक नौकरी की तलाश में एजेंटों के जाल में फंसकर रूस गए थे, जहां उन्हें जबरन युद्ध में धकेल दिया गया.
जनवरी 2024 में आजमगढ़ और मऊ के कई युवक विनोद यादव, सुमित और दुष्यंत नामक एजेंटों के साथ रूस गए थे. उन्हें कुक और सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी का लालच दिया गया था. रूस पहुंचने के बाद उन्हें जबरन ट्रेनिंग दी गई और यूक्रेन युद्ध में भर्ती कर लिया गया.
लापता हो गए थे कई लोग
आजमगढ़ के कन्हैया यादव और मऊ के श्यामसुंदर और सुनील यादव की रूस- यूक्रेन जंग में मौत पहले हो चुकी थी. आजमगढ़ के राकेश यादव और मऊ के बृजेश यादव घायल होने के बाद घर लौट आए थे. वहीं विनोद यादव, जोगेंद्र यादव, अरविंद यादव, रामचंद्र, अजहरुद्दीन खान, हुमेश्वर प्रसाद, दीपक, धीरेंद्र कुमार लापता हो गए थे.
आजमगढ़ शहर के गुलामी का पूरा निवासी अजहरुद्दीन खान भी 27 जनवरी 2024 को एजेंट विनोद के साथ रूस गए थे. उनके भाई अजीमुद्दीन दो साल से भाई की तलाश में सऊदी से लेकर रूस तक भटकते रहे. एबीपी न्यूज द्वारा मामले को उठाए जाने के बाद भारत सरकार सक्रिय हुई और जांच के बाद अजहरुद्दीन का शव वाराणसी एयरपोर्ट पहुंचा. तहसीलदार सगड़ी ने शव को परिजनों को सौंपा. आराजी देवारा करखिया निवासी रामचंद्र का शव भी इसी दिन परिवार को सुपुर्द किया गया.
परिजनों में गहरा शोक
अजहरुद्दीन के जीजा अबू बकर ने कहा, “यह बहुत बड़ा स्कैम है. एजेंसी संचालक पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए. कई लोग अभी भी फंसे हुए हैं. सरकार से मांग है कि हमारे भाई की बकाया सैलरी दिलाई जाए.”
पुलिस और प्रशासन की भूमिका
प्रशासन ने दोनों शवों को वाराणसी एयरपोर्ट से लाकर परिजनों को सौंपा. पुलिस ने एजेंटों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है. अभी भी कई युवक लापता हैं, जिनकी तलाश जारी है.
























