योगी कैबिनेट विस्तार में दिखी BJP की जातीय संतुलन की रणनीति, PDA की काट के लिए इन वर्गों पर जोर
UP News: यूपी कैबिनेट में विस्तार के बाद जहां बीजेपी ने गैर यादव पिछड़ा वर्ग और गैर जाटव दलित वर्ग में सियासी पैंठ मजबूत करने को कोशिश की है. पार्टी इन वर्गों को साथ लेकर चलेगी.

उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार ने रविवार को कैबिनेट विस्तार करते हुए छह मंत्रियों को शामिल किया है, जिनमें 3 पिछड़े, दो अनुसूचित जाति और एक ब्राह्मण चेहरे को शामिल किया है. आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव से बीजेपी के इस कदम को समाजवादी पार्टी के पीडीए की काट से जोड़कर देखा जा रहा है. जिसके जरिए बीजेपी ने पिछड़ों और दलितों को साधने की कोशिश की है.
यूपी कैबिनेट में विस्तार के बाद जहां बीजेपी ने ग़ैर यादव पिछड़ा वर्ग और गैर जाटव दलित वर्ग में सियासी पैंठ मजबूत करने को कोशिश की है. इसके साथ ही ये संदेश देने की भी कोशिश की है कि आगामी चुनाव में पार्टी इन तमाम वर्गों को साथ लेकर चलेगी. वहीं सपा से आए एक ब्राह्मण चेहरे मनोज पांडे को भी मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है. जिसके जरिए नाराज ब्राह्मण वर्ग को मनाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है.
जातीय समीकरण साधने की कोशिश
भारतीय जनता पार्टी को साल 2014, 2017, 2019 और 2022 के चुनाव में पिछड़ों और दलितों को साथ मिला, जिसकी वजह से पार्टी के प्रचंड बहुमत के साथ जीत मिली लेकिन, 2024 में समाजवादी पार्टी ने पीडीए (पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक) का नारा देकर बीजेपी के इस वोट बैंक में बड़ी सेंध लगाई और बीजेपी को पटखनी देकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी. बीजेपी ने इस हार से सबक लेते हुए चुनाव से पहले ही राज्य में जातीय समीकरणों को साधना शुरू कर दिया है.
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बीजेपी ने तीन पिछड़े भूपेंद्र चौधरी, पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र से आने वाला हंसराज विश्वकर्मा और लोधी समाज के कैलाश सिंह राजपूत को मंत्री बनाया है. इनके अलावा दो ओबीसी नेताओं सोमेंद्र तोमर और अजीत सिंह पाल को पदोन्नति भी दी है. इनके ज़रिए भाजपा ने ओबीसी समाज में संकेत दिया है कि पार्टी अपने पुराने सूत्र पर जोर दे रही है. जिसमें सभी छोटी और अप्रमुख पिछड़ी जातियों के समूहों को जोड़ा गया है ताकि सपा के परंपरागत यादव वोटबैंक के खिलाफ इन्हें एकजुट कर मुकाबला किया जा सके.
पिछड़ो-दलितों को साथ लेकर चलेगी बीजेपी
योगी कैबिनेट में दलित समाज से आने वाले सुरेंद्र दिलेर और कृष्णा पासवान को मंत्रिमंडल में शामिल कर ये संदेस दिया है कि भाजपा दलितों के साथ और उनका भी पार्टी में प्रतिनिधित्व है. सुरेंद्र दिलेर अलीगढ़ की खैर से आते हैं पश्चिमी यूपी के प्रभावशाली सियासी परिवार से ताल्लुक़ रखते हैं. दिलेर के जरिए बीजेपी वाल्मीकि वोटरों को एकजुट करने पर जोर देगी वहीं कृष्णा पासवान के जरिए दलितों के साथ महिलाओं को भी साधा जाएगा.
ब्राह्मणों की नाराजगी भी दूर करने की कोशिश
योगी कैबिनेट में सपा से आए मनोज कुमार पांडे को भी शामिल किया गया. जिसे बड़े राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है. बीते कुछ समय से राज्य में ब्राह्मणों की नाराजगी की खबरें आ रही है ऐसे में जहां मनोज पांडे के ज़रिए उन्हें अपने साथ जोड़ रखने की क़वायद के तौर पर देखा जा रहा है. मनोज पांडे, सपा मुखिया अखिलेश यादव के करीब माने जाते थे.
यूपी कैबिनेट में रविवार को हुए विस्तार के बाद मंत्रिमंडल में 60 सदस्य हैं, जो पहले 54 थे. इनमें 18 मंत्री पूर्वांचल, 17 पश्चिमी यूपी, 9 अवध क्षेत्र, बुंदेलखंड से 4 और रुहेलखंड से 6 मंत्री आते हैं. जिनमें बीजेपी ने लगभग सभी वर्गों को साधा गया है. ताकि सपा के पीडीए को ध्वस्त किया जा सके.
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