UP: 80 साल के पति पर 75 साल की पत्नी ने कराया केस, फिर कोर्ट में मिले गले मिले
यूपी में 80 साल के बुजुर्ग पति के खिलाफ 75 साल की बुजुर्ग पत्नी ने मुकदमा किया और यह एक साल तक चला. फिर भरी अदालत में एक दूसरे को गले लगाकर माला पहनाई और समझौता कर लिया.

उत्तर प्रदेश की एक स्थानीय अदालत में एक ऐसा दिल छू लेने वाला मामला सामने आया है, जिसने कोर्ट रूम में मौजूद न्यायाधीश से लेकर वकीलों और आम जनता की आंखों में खुशी के आंसू ला दिए. करीब एक साल से कोर्ट-कचहरी के चक्कर काट रहे 80 वर्षीय बुजुर्ग पति और उनकी 75 वर्षीय पत्नी ने अपने सारे मतभेदों को भुलाकर एक बार फिर साथ रहने का फैसला किया है.
इस कहानी से साबित होता है कि शादियां स्वर्ग में तय होती हैं और सात जन्मों का बंधन केवल एक कहावत नहीं, बल्कि अटूट विश्वास की डोर है. बता दें कि पति-पत्नी को यह मामला पूरे एक साल से कोर्ट में चल रहा था.
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क्या था पूरा मामला?
दरअसल यह कहानी जीवन के उस पड़ाव की है जहां इंसान को सहारे की सबसे ज्यादा जरूरत होती है. पारिवारिक सूत्रों के अनुसार, करीब एक साल पहले छोटे-मोटे घरेलू विवाद, आपसी कहासुनी और गलतफहमियों के चलते 75 वर्षीय बुजुर्ग पत्नी ने अपने 80 वर्षीय पति के खिलाफ स्थानीय थाने और कोर्ट में भरण-पोषण व प्रताड़ना का मुकदमा दर्ज करा दिया था. दशकों तक एक साथ सुख-दुख साझा करने वाले इस बुजुर्ग जोड़े के बीच आई इस कड़वाहट से पूरा परिवार और रिश्तेदार बेहद दुखी थे.
एक साल तक चला अदालती विवाद
मुकदमा दर्ज होने के बाद दोनों के बीच दूरियां और बढ़ गईं. पत्नी अपने बच्चों के साथ अलग रहने लगी, वहीं बुजुर्ग पति अकेलेपन का दंश झेल रहे थे. पिछले एक साल से यह मामला अदालत में विचाराधीन था. हर तारीख पर दोनों व्हीलचेयर या लाठी के सहारे कोर्ट आते, लेकिन एक-दूसरे से नजरें चुराते थे. उम्र के इस आखिरी पड़ाव पर कोर्ट-कचहरी की इस भागदौड़ ने दोनों को शारीरिक और मानसिक रूप से तोड़ दिया था.
काउंसलिंग और कोर्ट की सूझबूझ से बनी बात
मामले की संवेदनशीलता और दोनों बुजुर्गों की उम्र को देखते हुए माननीय न्यायाधीश और अदालत के मध्यस्थता केंद्र (काउंसलिंग सेल) ने इसमें विशेष रुचि ली. न्यायाधीश महोदय ने दोनों पक्षों को समझाते हुए कहा कि जीवन के इस मोड़ पर जहां एक-दूसरे की लाठी बनने की जरूरत है, वहां कोर्ट के चक्कर काटना उचित नहीं है. काउंसलर्स ने दोनों को अकेले में बैठाकर उनके पुराने दिनों की यादें ताजा कराईं.
मुस्कुराहट के साथ थाम लिया हाथ
अदालत और परिवार के संयुक्त प्रयासों का असर यह हुआ कि दोनों बुजुर्गों का दिल पिघल गया. पत्नी ने रोते हुए अपनी शिकायतें वापस लेने की बात कही, तो पति ने भी अपनी गलतियों को स्वीकार करते हुए उन्हें गले लगा लिया. दोनों ने अदालत के समक्ष लिखित समझौता किया कि वे अब अपने पिछले सारे विवादों को हमेशा के लिए दफन कर रहे हैं.
बुजुर्ग पति ने जेब से मिठाई निकालकर अपनी जीवनसंगिनी को खिलाई और फिर से एक साथ रहने की कसम खाई. कोर्ट रूम में मौजूद सभी लोगों ने तालियां बजाकर इस पुनर्मिलन का स्वागत किया. जज साहब ने भी इस जोड़े को सुखद भविष्य का आशीर्वाद देते हुए विदा किया. यह घटना समाज के उन युवाओं के लिए एक बड़ी सीख है, जो छोटी-छोटी बातों पर बिखर जाते हैं.
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