उत्तर प्रदेश में बिजली के स्मार्ट मीटर का विरोध तेज होता जा रहा है. जिसमें अब राजनीति भी तेज हो चुकी है. नगीना सांसद और आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद ने इस मुद्दे को लेकर यूपी सरकार को चेताया है. उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में जनता को गुमराह कर जबरदस्ती स्मार्ट मीटर लगवाए जा रहे हैं. इसको लेकर उन्होंने अपने एक्स हैंडल पर एक पोस्ट किया है.
नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद ने सरकार पर सवाल दागते हुए कहा कि जो लोग स्मार्ट मीटर का विरोध कर रहे हैं, उन पर फर्जी मुदकमे भी लिखे जा रहे हैं, ये अत्याचार की हद है. उनके मुताबिक नियम ये है कि बिना उपभोक्ता की मर्जी के स्मार्ट मीटर नहीं लगाए जा सकते.
चंद्रशेखर आजाद का पोस्ट
सांसद चंद्रशेखर आजाद ने बिजली के स्मार्ट मीटर को लेकर संसद में भी सवाल उठाया था, जिसका जिक्र उन्होंने अपनी पोस्ट में किया है. चंद्रशेखर के मुताबिक, उन्होंने इस संबंध में 27 मार्च को संसद में सवाल पूछा था, जिस पर केंद्रीय उर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने जबाब में बताया था कि विद्युत अधिनियम की धारा 47(5) के तहत उपभोक्ता की सहमति के बिना प्रीपेड मोड लागू नहीं किया जा सकता है तथा प्रीपेड स्मार्ट मीटर अनिवार्य नहीं, बल्कि स्वैच्छिक हैं. इस संबंध में केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण द्वारा जारी अधिसूचना में महत्वपूर्ण संशोधन करते हुए प्रीपेड मीटर की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है.
यूपी में नियमों को ताक पर रखा जा रहा
नगीना सांसद ने यूपी सरकार पर आरोप लगाए हुए लिखा, “इसके बावजूद, केंद्र के निर्देशों को दरकिनार करते हुए उत्तर प्रदेश में सम्मानित जनता को गुमराह कर, भय का माहौल बनाकर तथा पुलिस की मौजूदगी में जबरन स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए जा रहे हैं. जब जनता इस अन्यायपूर्ण कृत्य का विरोध करती है, तो उस पर फर्जी मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं. मेरा सवाल है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी, प्रदेश की सम्मानित जनता इसे किसी डील की मजबूरी क्यों करार दे रही है? इससे सरकार की विश्वसनीयता और इकबाल पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं."
आंदोलन की चेतावनी
इसके साथ ही सांसद चंद्रशेखर आजाद ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को संबोधित करते हुए लिखा, “मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी यदि सम्मानित जनता पर लगाए गए ये फर्जी मुकदमे शीघ्र वापस नहीं लिए जाते हैं, तो भीम आर्मी-आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) पूरे प्रदेश में व्यापक जन आंदोलन करने को मजबूर होगी.
