उत्तर प्रदेश में हो रही एसआईआर प्रक्रिया में वोटर लिस्ट से 2.89 करोड़ नाम कट सकते हैं, हालांकि अभी तक फ़ाइनल ड्राफ्ट नहीं आया है. आंकड़ों के लिहाज़ से ग्रामीण इलाकों के मुकाबले शहरी क्षेत्रों में सबसे ज्यादा वोट कटे हैं ऐसे में प्रदेश की सभी सियासी दलों की टेंशन बढ़ गई हैं. जिन शहरों में सबसे ज्यादा वोट कटे हैं वो भारतीय जनता पार्टी का सिरदर्द बढ़ाने वाले हैं.
अभी तक के आंकड़ों के मुताबिक़ राज्य में औसत 18.7 फ़ीसद से ज्यादा वोट कटा है जबकि टॉप 10 जिलों का औसत अनकलेक्टेबल आंकड़ा 25.23% तक है. वहीं 30 जिले ऐसे हैं जहां पर राज्य के औसत 18.7% से ज्यादा वोट कट गया है.
उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहरी इलाकों के बात करें तो यहां 20 फीसद अनकलेक्टेबल वोटर रहे. इनमें सबसे ज्यादा वोट कटने वालों की संख्या ग़ाज़ियाबाद जिले की है जिसे बीजेपी का गढ़ माना जाता है. गाजियाबाद में सबसे ज्यादा 28.83 फ़ीसद अनकलेक्टेबल वोटर मिले.
प्रमुख शहरी जिले (20%+ असंग्रहणीय)
इनमें गाजियाबाद में 28.83% लखनऊ में 24.40%, कानपुर नगर में 24.10%, मेरठ में 24.66%, प्रयागराज में 23.80%, आगरा में 23.25%, हापुड़ में 22.30%, वाराणसी में 22.70% मतदाताओं को नाम कट गए हैं.
ग्रामीण जिले में सबसे ज्यादा यहां कटे वोट
एसआईआर की प्रक्रिया में जिन ग्रामीण जिलों में सबसे ज्यादा वोट कटे हैं उनमें सबसे ऊपर बलरामपुर जिले का नाम है. यहां 25.98% वोट कटे. बहराइच में 20.44%, सिद्धार्थनगर में 20.33%, संभल में 20.29%, बदायूं में 20.39%, कन्नौज में 21.57% और शाहजहांपुर में 21.76% फ़ीसद वोट कटने का अनुमान है.
इन आकंड़ों पर सियासी दलों में हलचल
हालांकि इन आंकड़ों को लेकर अभी तक किसी दल की ओर से चुनाव आयोग में कोई शिकायत नहीं की गई है लेकिन शहरी इलाकों के ज्यादा वोट कटने से बीजेपी में घमासान मचा हुआ है. सीएम योगी ने तमाम पदाधिकारियों को एसआईआर गंभीरता से कराने के निर्देश दिए हैं तो वहीं समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने फ़ाइनल ड्राफ्ट की तारीख बढ़ाए जाने पर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि कहीं मानवीय भूल के बहाने ये आंकड़ा बढ़ न जाए.
नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद ने भी इतनी बड़ी संख्या में वोट कटने पर सवाल उठाए और पूछा कि लोकसभा चुनाव में जो वोट डाले गए उनकी जिम्मेदारी कौन लेगा.