उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए चुनाव का ऐलान हो गया है. विधानसभा में मौजूदा संख्याबल के आधार पर 8 सीटें बीजेपी और 2 सीट सपा को जा सकती है. हालांकि यह तभी होगा जब दोनों ही दलों की ओर से उतने ही प्रत्याशी उतारे जाएं, जितनी सीटों के लिए उनके पास संख्याबल हैं. 

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अगर कोई भी पार्टी अपने पास मौजूद वोट से ज्यादा प्रत्याशी उतारती है तो निश्चित तौर पर विधायकों के टूटने और सीटों के हार जीत की संख्या का अंतर बढ़ सकता है. जो 10 सीटें खाली हो रहीं हैं उसमें 1 सपा, 1 बसपा और 8 बीजेपी के पास हैं. इस चुनाव के बाद बसपा राज्यसभा में भी 0 हो जाएगी. 

विधानसभा में पार्टीवार संख्याबल की बात करें तो 257 विधायक बीजेपी, सपा 101, अपना दल सोनेलाल 13, राष्ट्रीय लोकदल 9, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी 6, निषाद पार्टी 5, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस 2, जनसत्ता दल लोकतांत्रिक 2 और असंबद्ध विधायकों की संख्या 3 है. असंबद्ध विधायकों में मनोज पांडेय, राकेश सिंह और अभय सिंह शामिल हैं.

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राज्यसभा सदस्यों के निर्वाचन में केवल विधानससभा के विधायक ही मतदान करते हैं. ऐसे में मौजूदा संख्या बल के आधार पर 7 सीट पर भारतीय जनता पार्टी, 2 सीट सपा जीत सकती है. वहीं 1 सीट पर लड़ाई के आसार हैं.

क्या है बीजेपी खेमे का सियासी गणित?

यूपी विधानसभा में फिलहाल कुल 398 विधायक हैं और 10 सीटों पर चुनाव है. जीत के लिए आवश्यक कोटा लगभग 37 विधायक वोट है. बीजेपी खेमे के पास कुल 295 विधायक हैं. 7 सीटों के लिए 7 × 37 = 259 वोट की जरूरत होगी. 259 वोट इस्तेमाल करने के बाद बीजेपी खेमे के पास 295 - 259 यानी कुल 36 वोट बचेंगे. 8वीं सीट के लिए 37 वोट चाहिए, यानी बीजेपी खेमे के पास अपने दम पर 8वीं सीट निकालने के लिए 1 वोट की कमी रह जाएगी.

ऐसे में इस बात की संभावना है कि कुछ विधायक फिर इस बार टूटें. अब वह किस दल से टूटेंग यह वक्त और चुनाव के समीकरण तय करेंगे.

सपा के पास बहुत वोट बचेंगे!

सपा की बात करें तो कांग्रेस के 2 विधायकों को मिलाकर अलायंस के पास कुल 103 विधायक हैं. 2 सीटों पर उनकी जीत तय है. 2 सीटों के लिए 2 × 37 = 74 वोट की जरूरत होगी. 74 वोट इस्तेमाल करने के बाद सपा खेमे के पास 103 - 74 = 29 वोट बचेंगे.

हालांकि यहां एक और पेच है. साल 2024 के राज्यसभा चुनाव में सपा से कुल 8 विधायकों ने बागी रुख अख्तियार किया था. इसमें से 1 बीजेपी, और3 असंबद्ध है. 2024 के चार बागियों को भी 101 विधायकों में से घटा दें तो सपा के पास 97 विधायक बचते हैं. कांग्रेस और सपा की कुल संख्या इस लिहाज से 99 रहेगी. 

2 सीटों के लिए अभी भी सपा अलायंस के पास पर्याप्त संख्याबल है लेकिन यह तभी तक है जब तक कि 10 सीटों के लिए 10 ही प्रत्याशी हों. अगर 10 सीटों के लिए 11 प्रत्याशी हुए तो निश्चित तौर पर किसी न किसी ओर से विधायकों के टूटने की खबरें आ सकतीं हैं.