AIMIM की एंट्री से UP में NDA को नुकसान है या नहीं? योगी के मंत्री बोले- अगर मुस्लिम नए विकल्प...
AIMIM के नेता और हैदराबाद से सांसद ओवैसी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने कहा कि ओवैसी किसी के साथ जाएं, इससे एनडीए को कोई नुकसान नहीं होगा.

उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी के विजय रथ को रोकने के लिए सम्मानजनक समझौते और सीटों के बंटवारे की स्थिति बनने पर गठबंधन के लिए तैयार होने के असदुद्दीन ओवैसी के बयान के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं. राजनीतिक हलकों में इसे समाजवादी पार्टी की ओर संकेत के तौर पर भी देखा जा रहा है.
वहीं उनकी पार्टी के कुछ नेताओं की ओर से सार्वजनिक मंचों पर बहुजन समाज पार्टी के साथ संभावित गठबंधन की बात भी पहले कही जा चुकी है. इसके अलावा समय-समय पर आजाद समाज पार्टी के साथ संवाद और संभावित तालमेल की चर्चाएं भी सामने आती रही हैं.
ऑल इंडिया मजलिस इत्तेहादुल मुस्लिमीन के नेता और हैदराबाद से सांसद ओवैसी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने कहा कि ओवैसी किसी के साथ जाएं, इससे एनडीए को कोई नुकसान नहीं होगा. सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के मुखिया ने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि पिछले चुनावों के नतीजे उनके सामने हैं और ऐसे राजनीतिक गठजोड़ों से उन्हें कोई विशेष प्रभाव नहीं दिखता.
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बसपा और AIMIM का अलायंस हुआ तो?
बसपा और ओवैसी की पार्टी के संभावित गठबंधन तथा मुस्लिम-दलित सामाजिक समीकरण को लेकर पूछे गए सवाल पर राजभर ने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस की राजनीति की आलोचना की. उन्होंने कहा कि मुस्लिम मतदाताओं को दोनों दल लंबे समय से अपने साथ बनाए रखने की राजनीति करते रहे हैं. राजभर ने यह भी कहा कि यदि मुस्लिम मतदाता नए राजनीतिक विकल्पों की ओर जाते हैं तो इससे उन्हें कोई आपत्ति नहीं है.
ओवैसी को बीजेपी की ‘बी टीम’ कहे जाने के सवाल पर राजभर ने इस आरोप को खारिज करते हुए कहा कि ऐसी चर्चाओं के समर्थन में कोई ठोस राजनीतिक आधार नहीं दिखता. साथ ही उन्होंने समाजवादी पार्टी पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि कई मौकों पर उसके राजनीतिक रुख से बीजेपी को अप्रत्यक्ष लाभ मिला.
क्या बोली बीजेपी?
वहीं बीजेपी प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने कहा कि राजनीति केवल एक समुदाय के नाम पर नहीं होनी चाहिए. उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ दल वोट बैंक की राजनीति करते हैं, जबकि बीजेपी सभी वर्गों के विकास की बात करती है. उन्होंने यह भी कहा कि बीजेपी सरकारों ने मुस्लिम समुदाय के लिए भी कई योजनाओं पर काम किया है.
इस पूरे मुद्दे पर वरिष्ठ पत्रकार योगेश मिश्रा ने कहा कि ओवैसी की राजनीति को लेकर लंबे समय से यह बहस रही है कि उनके चुनावी हस्तक्षेप का असर विपक्षी वोटों के बंटवारे पर पड़ता है. हालांकि उन्होंने इसे राजनीतिक विश्लेषण बताया, न कि स्थापित तथ्य. योगेश मिश्रा के अनुसार यदि भविष्य में ओवैसी और बसपा के बीच कोई समझौता होता है तो उसका प्रभाव बीजेपी से अधिक विपक्षी दलों, खासकर समाजवादी पार्टी के वोट समीकरण पर पड़ सकता है.
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उन्होंने यह भी कहा कि समाजवादी पार्टी और ओवैसी के बीच संभावित गठबंधन की संभावना फिलहाल सीमित दिखाई देती है, क्योंकि दोनों दल कुछ समान सामाजिक समूहों और मतदाताओं के बीच राजनीतिक आधार बनाने की कोशिश करते रहे हैं.
























