सुभासपा से नाता तोड़ अखिलेश के साथ दिखेंगे अब्बास? कभी मऊ MLA के लिए हाईकोर्ट जा रहे थे OP राजभर
UP Politics: यूपी में साल 2027 में चुनाव प्रस्तावित हैं. उससे पहले एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जिसने पूर्वांचल के मऊ जिले में हलचल मचा दी है. इसका असर सुभासपा पर भी पड़ सकता है.

माफिया से नेता बने मुख्तार अंसारी के बेटे और मऊ सदर से विधायक अब्बास अंसारी के सोमवार को मऊ आगमन ने जिले की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी. सुप्रीम कोर्ट के आदेश की प्रति लेकर एसपी-डीएम से मुलाकात करने के बाद उनका सीधे समाजवादी पार्टी कार्यालय पहुंचना राजनीतिक गलियारों में बड़े संकेत के रूप में देखा जा रहा है.
सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी से विधायक होने के बावजूद गठबंधन कार्यालय से दूरी और सपा नेताओं के बीच करीब चार घंटे तक मौजूदगी ने इस चर्चा को और तेज कर दिया कि क्या अब्बास अंसारी भविष्य में समाजवादी पार्टी का दामन थाम सकते हैं?
मऊ की राजनीति सोमवार, 18 मई को उस समय अचानक गरमा गई जब सदर विधायक अब्बास अंसारी भारी सुरक्षा व्यवस्था और करीब आधा दर्जन गाड़ियों के काफिले के साथ जिले में पहुंचे. सुप्रीम कोर्ट के आदेश की प्रति लेकर उन्होंने पुलिस अधीक्षक कमलेश बहादुर और जिलाधिकारी आनंद वर्धन से मुलाकात कर अपने आगमन की औपचारिक जानकारी दी.
प्रशासनिक मुलाकातों से ज्यादा चर्चा उनके अगले कदम को लेकर रही. अधिकारियों से मिलने के बाद अब्बास अंसारी सीधे समाजवादी पार्टी कार्यालय पहुंच गए. वहां पर उन्होंने मीडिया समेत सभी समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं को लस्सी पिलाया और कार्यालय के मरम्मत के भी निर्देश दिए. खास बात यह रही कि सुभासपा और बीजेपी गठबंधन का कार्यालय उसी परिसर में आमने-सामने स्थित होने के बावजूद उन्होंने वहां जाना उचित नहीं समझा. इसे लेकर राजनीतिक हलकों में तरह-तरह के मायने निकाले जा रहे हैं.
कार्यकर्ताओं और समर्थकों में उत्साह का माहौल
सपा कार्यालय में उनके पहुंचते ही कार्यकर्ताओं और समर्थकों में उत्साह का माहौल बन गया. जिलाध्यक्ष समेत कई नेताओं ने उनका स्वागत किया. करीब चार घंटे तक चली मुलाकातों और राजनीतिक चर्चाओं ने यह संकेत दिया कि आने वाले समय में मऊ की राजनीति में नए समीकरण बन सकते हैं. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि साल 2027 विधानसभा चुनाव से पहले अब्बास अंसारी अपनी नई राजनीतिक जमीन तलाशने की रणनीति पर काम कर रहे हैं.
इस दौरान मीडिया के सवालों से बचते नजर आए अब्बास अंसारी का हावभाव भी चर्चा का विषय बना रहा. कभी बाल संवारते तो कभी दाढ़ी सहलाते हुए वह पत्रकारों के सवालों का सीधा जवाब देने से बचते रहे. कई बार उन्होंने उल्टे मीडिया कर्मियों से ही सवाल पूछकर बातचीत को टालने की कोशिश की.
गौरतलब है कि कुछ दिन पहले जिले के एक सामाजिक संगठन ने थाना सरायलखनसी में तहरीर देकर 'लापता विधायक' के रूप में अब्बास अंसारी को खोजने की मांग की थी. ऐसे में अचानक उनका मऊ पहुंचना और लंबे समय तक सपा कार्यालय में सक्रिय रहना राजनीतिक चर्चाओं को और हवा दे गया है.
वहीं बीजेपी जिलाध्यक्ष रामाश्रय मौर्य ने पूरे घटनाक्रम पर तंज कसते हुए कहा कि 'वह हमारे यहां क्यों आएंगे? यह मामला सुभासपा का है. गठबंधन जरूर है, लेकिन फैसला ओमप्रकाश राजभर को करना है.' उन्होंने यह भी कहा कि अब्बास अंसारी और उनका परिवार लगातार विवादों में रहा है तथा प्रशासनिक कार्रवाई भी चल रही है.
हाईकोर्ट जाने को तैयार थे सुभासपा चीफ
सुभासपा चीफ और योगी सरकार में मंत्री ओपी राजभर, उस वक्त अब्बास के लिए हाईकोर्ट जाने को तैयार थे जब एमपी एमएलए कोर्ट ने उनको सजा सुनाई और उनकी विधायकी रद्द हो गई थी.
करीब चार घंटे के प्रवास के बाद अब्बास अंसारी गाजीपुर के लिए रवाना हो गए, लेकिन उनका यह दौरा मऊ की राजनीति में कई नए सवाल छोड़ गया. अब सबसे बड़ी चर्चा इसी बात की है कि क्या मुख्तार अंसारी की राजनीतिक विरासत अब समाजवादी पार्टी के साथ नई दिशा लेने जा रही है.

























