सपा-BJP के बीच फंसी रायबरेली की इन 3 सीटों पर राहुल गांधी का फोकस, क्या 2027 में बदलेंगे हालात?
UP Vidhan Sabha Chunav 2027: राहुल गांधी, रायबरेली की तीन विधानसभा सीटों पर सभाएं करेंगे. इन तीनों ही सीटों पर कभी न कभी कांग्रेस का विधायक रहा है लेकिन मौजूदा परिदृश्य बहुत अलग है.

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, 19 मई 2026, मंगलवार को अपने संसदीय क्षेत्र उत्तर प्रदेश स्थित रायबरेली जाएंगे. यहां वह तीन विधानसभाओं में जनसभा भी करेंगे. माना जा रहा है कि वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस, राहुल गांधी के संसदीय क्षेत्र में अपनी स्थिति बेहतर करना चाहती है इसलिए उनकी सभाएं अभी से कराई जा रही हैं, ताकि समाजवादी पार्टी के साथ सीट बंटवारे में जिले की अधिकतम विधानसभाओं में वह अपना पहल हक जता सके.
राहुल गांधी, अपने एक दिवसीय दौरे में बछरावां, हरचंदपुर और सरेनी विधानसभा निर्वाचन भेत्र में जाएंगे. बछरावां में राहुल बारात घर का उद्घाटन करेंगे. हरचंदपुर में कार्यकर्ता सम्मेलन करेंगे और सरेनी के लालगंज में महिला संवाद करेंगे. इसके साथ ही वह रायबरेली सदर में नगर पालिका के वार्ड संख्या 14 स्थित वैभव नगर में सड़क का उद्घाटन करेंगे.
आइए हम आपको बताते हैं कि बछरावां, हरचंदपुर और सरेनी विधानसभा के बीते कुछ चुनावों में कांग्रेस की क्या स्थिति रही है.
सरेनी विधानसभा क्षेत्र
सरेनी विधानसभा सीट रायबरेली जिले की अहम राजनीतिक सीटों में गिनी जाती है और यह अमेठी लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है. इस सीट पर समय-समय पर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और बीजेपी के बीच सीधा मुकाबला देखने को मिला है. साल 1996 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के अशोक कुमार सिंह ने जीत दर्ज की थी. इसके बाद साल 2002 में समाजवादी पार्टी के देवेंद्र प्रताप सिंह विधायक बने और सपा ने इस क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत की. साल 2007 में कांग्रेस ने वापसी करते हुए अशोक कुमार सिंह को विधायक बनाया. साल 2012 में फिर से समाजवादी पार्टी के देवेंद्र प्रताप सिंह ने जीत हासिल की और सीट पर सपा का कब्जा हो गया.
साल 2017 का चुनाव यहां काफी चर्चित रहा. बीजेपी के धीरेंद्र बहादुर सिंह ने बसपा के ठाकुर प्रसाद यादव को 13,007 वोटों के अंतर से हराया. इस चुनाव में बीजेपी को प्रदेशभर में मिली बड़ी जीत का असर सरेनी में भी दिखाई दिया. हालांकि साल 2022 के चुनाव में समाजवादी पार्टी ने फिर वापसी की और देवेंद्र प्रताप सिंह ने बीजेपी प्रत्याशी को हराकर सीट दोबारा अपने नाम कर ली.
हरचंदपुर विधानसभा क्षेत्र
हरचंदपुर विधानसभा सीट रायबरेली जिले की राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील सीट मानी जाती है. यह रायबरेली लोकसभा सीट के अंतर्गत आती है और लंबे समय से कांग्रेस के प्रभाव वाले क्षेत्रों में गिनी जाती रही है. साल 2012 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के सुरेंद्र विक्रम सिंह विधायक चुने गए थे. इसके बाद साल 2017 में कांग्रेस ने यहां वापसी की और राकेश सिंह ने बीजेपी की कंचन लोधी को बेहद करीबी मुकाबले में सिर्फ 3,652 वोटों से हराया. यह चुनाव रायबरेली जिले की सबसे दिलचस्प सीटों में शामिल रहा क्योंकि मुकाबला आखिरी दौर तक कांटे का बना रहा.
साल 2022 के विधानसभा चुनाव में यहां बड़ा उलटफेर हुआ. समाजवादी पार्टी के राहुल राजपूत ने बीजेपी के राकेश सिंह को 14,489 वोटों के अंतर से हराया. इस चुनाव में कांग्रेस का पारंपरिक आधार कमजोर होता दिखा और सपा ने सामाजिक समीकरणों के जरिए मजबूत बढ़त बनाई.
बछरावां विधानसभा क्षेत्र
बछरावां विधानसभा सीट अनुसूचित जाति (एससी) के लिए आरक्षित सीट है और रायबरेली जिले की दलित राजनीति का बड़ा केंद्र मानी जाती है. शुरुआती वर्षों में यहां कांग्रेस का दबदबा रहा. साल 1974 और साल 1977 में राम दुलारे कांग्रेस से विधायक बने. इसके बाद साल 1980, साल 1985, साल 1989 और साल 1991 में लगातार शिव दर्शन कांग्रेस के टिकट पर जीतते रहे. इस दौर में कांग्रेस का संगठन और परंपरागत वोट बैंक काफी मजबूत था.
साल 1993 में बीजेपी के राजा राम त्यागी ने जीत दर्ज कर कांग्रेस के लंबे वर्चस्व को तोड़ा. साल 1996 में बसपा के श्याम सुंदर भारती विधायक बने और दलित राजनीति का प्रभाव बढ़ा. साल 2002 में समाजवादी पार्टी के राम लाल अकेला ने जीत हासिल की.साल 2007 में कांग्रेस ने फिर वापसी की और राजा राम त्यागी विधायक बने. साल 2012 में एक बार फिर समाजवादी पार्टी के राम लाल अकेला ने सीट जीत ली.
साल 2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के राम नरेश रावत ने कांग्रेस के शाहब शरण को 22,309 वोटों के बड़े अंतर से हराया. यह जीत बीजेपी के लिए महत्वपूर्ण मानी गई क्योंकि पार्टी ने दलित आरक्षित सीट पर मजबूत प्रदर्शन किया. साल 2022 में मुकाबला बेहद करीबी रहा. समाजवादी पार्टी के श्याम सुंदर भारती ने अपना दल (एस) के लक्ष्मीकांत को सिर्फ 2,812 वोटों के अंतर से हराया. इस सीट पर हर चुनाव में सामाजिक समीकरण और दलित वोट बैंक निर्णायक भूमिका निभाता रहा है.
कुल मिलाकर इन तीनों ही सीटों पर किसी न किसी चुनाव में कांग्रेस ने जीत हासिल की है लेकिन मौजूदा स्थिति में लड़ाई सपा और भारतीय जनता पार्टी के बीच हो चुकी है. ऐसे में अब यह देखना होगा कि कांग्रेस की इन कोशिशों का परिणाम , सपा के साथ सीट बंटवारे में क्या रहता है. सपा चीफ अखिलेश यादव सीट बंटवारे को लेकर कई मौकों पर यह कह चुके हैं कि जो जिस सीट पर जीत सकता है, वह सीट उसे मिलेगी.


























