UP Politics: यूपी में ओवैसी की एंट्री से किसको ज्यादा नुकसान-किसे फायदा? ये आंकड़े अखिलेश को करेंगे परेशान!
UP Politics: उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए अब एक साल से भी कम का समय बचा है. सियासी दल अपनी रणनीति बनाने में जुट गए हैं. उधर AIMIM की एंट्री सियासी दलों के लिए परेशानी का सबब बनती दिख रही है.

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले सियासी दल अपनी अपनी रणनीति बनाने में जुट गए हैं. राज्य में एक ओर जहां समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के बीच कांटे की टक्कर मानी जा रही है. वहीं इन दोनों के बीच अब ऑल इंडिया मजलिस इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) भी ताल ठोंकते दिख रही है. महाराष्ट्र नगर निकाय चुनावों में मिली बढ़त के बाद अब हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी के हौसले बुलंद हैं.
साल 2027 के चुनावी रण में अब एक साल से कभी कम वक्त बचा है. सीएम योगी आदित्यनाथ बनाम सपा चीफ अखिलेश यादव की लड़ाई में ओवैसी एक बड़ा फैक्टर बन चुके हैं. विपक्ष कभी उन पर डोरे डालता है तो कभी कोसने लगता है लेकिन इन सबके बीच ओवैसी ने जो प्लान सामने रखा है वो सियासत में कई लोगों की नींद उड़ा सकता है.
हैदराबाद सांसद ने बीते दिनों कहा था कि लोग हमसे पूछ रहे हैं कि यूपी में कितनी सीटें लड़ रहे हैं. कम लड़ो. पार्टी के स्थापना समारोह में ओवैसी ने यूपी में पूरे दमखम के साथ चुनाव लड़ने का ऐलान किया है.
अब सवाल है कि ओवैसी की एंट्री से किसकी मुश्किल बढ़ेगी. जब इस संदर्भ में यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि ओवैसी साइकिल पर सवाल होकर आएंगे. अखिलेश के इस बयान के बाद माना जा रहा है कि सपा, ओवैसी की पार्टी के साथ अलायंस की चर्चा शुरू कर सकती है.
यूपी में किन सीटों पर मुस्लिम मतदाताओं का असर?
बता दें यूपी के 14 जिलों में 25 फीसदी से ज्यादा मुस्लिम आबादी हैं. पूरे राज्य की आबादी में यह हिस्सा करीब 20 फीसदी तक पहुंचता है यूपी की 403 विधानसभा क्षेत्रों में से 143 सीटों पर मुस्लिम मतदाताओं का असर है. 70 सीटों पर मुस्लिम आबादी 20-30 फीसदी के बीच है वहीं 73 सीटों पर 30 फीसदी से ज्यादा आबादी है.

हालांकि पिछले दो चुनावों में ओवैसी को यूपी में झटका ही लगा. वर्ष 2017 और वर्ष 2022 के चुनाव में उनकी पार्टी को बुरी हार का सामना करना पड़ा. साल 2022 में 95 सीटों पर चुनाव लड़ने वाली AIMIM को .49 फीसदी मत मिले.
इस सियासी रणनीति पर राजनीतिक विश्लेषकों की राय ओवैसी के दावों से जुदा है. राजनीतिक विश्लेषक विजय उपाध्याय ने कहा कि ओवैसी के आने से बीजेपी को लाभ होगा, यह कहना ठीक नहीं होगा. हालांकि अगर ओवैसी मुस्लिम बाहुल्य सीटों पर हिन्दू प्रत्याशी उतारते हैं, तो बीजेपी को दिक्कत हो सकती है.
उधर, सीएम योगी आदित्यनाथ ने एक बार फिर बंटोगे तो कटोगे के संदेश दिए हैं. 9 फरवरी को एक कार्यक्रम में सीएम ने कहा था कि अगर बंट गए तो कटने के रास्ते तैयार हो जाएंगे.
इन सबके बीच एआईएमआईएम की यूपी इकाई के पूर्व अध्यक्ष इसरार अहमद ने दावा किया है कि राज्य में पार्टी 200 सीटों पर मजबूती से चुनाव लड़ेगी और उसकी कोशिश होगी कि बिना हमारी मदद के सरकार न बने. मुस्लिमों के अलावा हमारे साथ सभी वर्गों के लोग आ रहे हैं.

यूपी कितने मुस्लिम विधायक?
बीते चार चुनावों के आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2007 में जब बसपा सरकार में आई तो 56, 2012 में जब अखिलेश सीएम बने तब 68, 2017 में जब बीजेपी आई तब 24, 2022 में संख्या बढ़ी और मुस्लिम विधायकों की कुल संख्या 34 तक पहुंची.
यूपी के संदर्भ में बात करें तो सिर्फ मुस्लिम पॉलिटिक्स करने वाले राजनीतिक दल हाशिये पर ही रहे. चाहे 1968 में मुस्लिम मजलिस पार्टी हो या 1974 में आईयूएमएल इनके लिए सियासत का यह खेल घाटे का सौदा ही रहा. मुस्लिम मजलिस पार्टी की जहां 1968 में जमानत जब्त हुई तो वहीं आईयूएमएल को 1974 में सिर्फ 1 सीट मिली. फिर साल 2002 में नेशनल लोकतांत्रिक पार्टी की भी जमानत जब्त हो गई है. वहीं 2007 में यूडीएफ के हिस्से सिर्फ 1 सीट आई. 2012 में पीस पार्टी के हिस्से चार सीट आई. इसके बाद 2017 और 2022 में ओवैसी की पार्टी की जमानत ही जब्त हुई.

एआईएमआईएम की यूपी इकाई के अध्यक्ष शौकत अली ने दावा किया है कि सपा, बीजेपी को सत्ता से नहीं उखाड़ पाएगी. यह काम सिर्फ हम कर पाएंगे.
यूपी में एआईएमआईएम करेगी अलायंस?
गठबंधन के संदर्भ में शौकत अली ने कहा कि हम चाहते हैं कि यूपी में एक थर्ड फ्रंट बने. उन्होंने कहा कि बीएसपी और एआईएमआईएम के बीच अलायंस अगर हो, तो बेहतर होगा. बता दें सपा ने इशारों में ओवैसी के साथ अलायंस की डिमांड रखी है वहीं कांग्रेस ने एआईएमआईएम से अलर्ट रहने के लिए कहा है.
साल 2027 के लिए सियासत का ऊंट किस करवट बैठेगा यह तो वक्त बताएगा लेकिन वर्ष 2022 के चुनाव में ओवैसी के कारण अखिलेश सहारनपुर, मुरादाबाद, बिजनौर, भदोही, सुल्तानपुर और जौनपुर की कई सीटें हार गए.
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