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UP Politics: सपा की हार के पीछे संगठन की कमजोरी बड़ी वजह, सक्रिय नेताओं को मिल सकती है नई जिम्मेदारियां

UP Elections: समाजवादी पार्टी की हार के पीछे संगठन का कमजोर होना एक बड़ी वजह माना जा रहा है. सपा के तमाम बड़े नेताओं ने संगठन की कमजोरी को लेकर सवाल भी उठाए हैं.

UP Assembly Election Result 2022: समाजवादी पार्टी की हार के पीछे संगठन का कमजोर होना एक बड़ी वजह माना जा रहा है. सपा के तमाम बड़े नेताओं ने संगठन की कमजोरी को लेकर सवाल भी उठाए हैं. यही वजह है सपा अब संगठन को नए सिरे से सक्रिय करने की तैयारी कर रही है. उन नेताओं को चिन्हित किया जा रहा है जिन्होंने विधानसभा चुनाव में सक्रिय भूमिका निभाई है. ऐसे नेताओं को समाजवादी पार्टी नई जिम्मेदारी सौंप सकती है.

समाजवादी पार्टी विधानसभा चुनाव भले ही हार गई हो लेकिन अभी स्थानीय निकाय चुनाव होने हैं जिसमें संगठन की भूमिका अहम होती है. पार्टी की रणनीति है कि संगठन को सक्रिय करके स्थानीय निकाय के चुनाव में जोरदार उपस्थिति दर्ज कराई जाए. विधानसभा चुनाव में पार्टी का वोट बैंक बढ़ा है. 2017 के विधानसभा चुनाव में सपा को 21.82 फ़ीसदी वोट मिला था जो 2022 में 32 फ़ीसदी पहुंच गया. विधायकों की संख्या भी 47 से बढ़कर 111 हो गई. समाजवादी पार्टी स्थानीय निकाय चुनाव में ज्यादा से ज्यादा सीटें हासिल करके अपना बढ़ा हुआ वोट बैंक बनाए रखने की कोशिश जारी रखेगी. सपा के वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि अगर विधानसभा चुनाव में प्राप्त हुआ 32 फ़ीसदी वोट बैंक बना रहा तो स्थानीय निकाय चुनाव में काफी फायदा मिलेगा. हालांकि, इसके लिए संगठन का मजबूत और सक्रिय होना जरूरी है.

सपा के चुनावी रणनीतिकारों ने कही ये बात

सपा के चुनावी रणनीतिकारों का मानना है कि समाजवादी पार्टी का संगठन विधानसभा चुनाव में काफी देर से सक्रिय हुआ था. पार्टी ने अक्टूबर में प्रदेश कार्यकारिणी घोषित की. कार्यकारिणी जारी होने में नवंबर गुजर गया. जनवरी-फरवरी तक संगठन में लगातार मनोनयन होते रहे. ऐसे में चुनावी जिम्मेदारियां तय करने में चूक हो गई. जब भारतीय जनता पार्टी का कार्यकर्ता गांव गांव और शहर शहर में चुनाव प्रचार कर रहा था तब समाजवादी पार्टी के संगठन से जुड़े तमाम नेता अपने टिकट और सिफारिशों के लिए प्रदेश मुख्यालय में डेरा डाले थे. यही वजह रही कि तमाम नेता अपने विधानसभा क्षेत्र में जातीय गोलबंदी भी नहीं कर पाए.

पार्टी सूत्रों ने दी ये जानकारी

पार्टी सूत्रों ने बताया कि संगठन को मजबूत करने के लिए उन नेताओं को चिन्हित किया जा रहा है जिन्होंने इस बार चुनाव में बेहतरीन प्रदर्शन किया है. साथ ही चुनाव में नेताओं की सक्रियता का अंदाजा लगाने के लिए उनके बूथ पर मिले वोट की भी जानकारी ली जा रही है. जिन नेताओं को जिलों का प्रभार दिया गया था वहां हासिल वोटों से भी नेता की मेहनत का आकलन कराया जा रहा है. पार्टी सूत्रों का कहना है कि 30 मार्च को विधानसभा की क्षेत्रवार समीक्षा के लिए एक बैठक आयोजित की जाएगी. सपा मुखिया अखिलेश यादव खुद सभी नेताओं को मिली जिम्मेदारी और उनके कामकाज की समीक्षा करेंगे.

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