जयवीर सिंह बोले- अजान से नींद हो रही खराब, सीएम ने कहा- सड़क पर नहीं होगी नमाज, चुनावी साल में संयोग या प्रयोग?
UP Politics: यूपी में अगले वर्ष 2027 में चुनाव है. इससे पहले अजान और नमाज पर सियासत तेज हो गई है. CM योगी के बयान के बाद सपा, AIMIM और मौलाना, सभी ने अपनी राय रखी है.

- योगी सरकार के मंत्रियों के अजान-नमाज पर बयान से गरमाई सियासत।
- बीजेपी कानून-व्यवस्था, विपक्ष मुस्लिम समुदाय को निशाना बता रहा।
- सीएम योगी बोले- सड़कों पर नमाज नहीं, शिफ्ट में पढ़ें।
- 2027 चुनाव से पहले धार्मिक मुद्दे, पहचान बने चुनावी एजेंडा।
उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले नमाज, अजान और मुस्लिम मुद्दों को लेकर सियासत तेज हो गई है. योगी सरकार के मंत्री जयवीर सिंह के अजान वाले बयान और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सड़क पर नमाज को लेकर दिए गए बयान के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है.
भारतीय जनता पार्टी इसे कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक अनुशासन का मुद्दा बता रही है, जबकि विपक्ष और मुस्लिम संगठन इसे मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाने की राजनीति करार दे रहे हैं.
दरअसल, योगी सरकार में मंत्री जयवीर सिंह ने फिरोजाबाद में एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि सुबह चार बजे अजान होती है, जिससे नींद में खलल पड़ता है. इस बयान के बाद विवाद शुरू हुआ और विपक्षी दलों ने इसे धार्मिक भावनाओं को भड़काने वाला बयान बताया.
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इसी बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सड़क पर नमाज को लेकर सख्त संदेश दिया. उन्होंने कहा कि लोग उनसे पूछते हैं कि क्या उत्तर प्रदेश में सड़कों पर नमाज होती है? कतई नहीं होती है. सड़कें चलने के लिए हैं या कोई चौराहे पर तमाशा करेगा? आवागमन बाधित करने का अधिकार किसी को नहीं है.' मुख्यमंत्री ने कहा कि नमाज पढ़ना जरूरी है तो लोग अपने निर्धारित स्थान पर जाकर पढ़ें, और अगर संख्या ज्यादा है तो 'शिफ्ट में नमाज पढ़ लें.'
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि 'अगर सिस्टम के साथ रहना है तो कानून मानना होगा.' उन्होंने कहा कि सरकार संवाद से बात मनवाना चाहती है, लेकिन अगर कोई नहीं मानेगा तो 'दूसरा तरीका' भी अपनाया जाएगा. योगी आदित्यनाथ ने बरेली का जिक्र करते हुए कहा कि वहां लोगों ने 'हाथ आजमाने' की कोशिश की थी और सरकार की ताकत देख ली.
अभी नमाज चर्चा में क्यों?
पहली वजह यह है कि यूपी विधानसभा चुनाव में अब करीब 7–8 महीने का वक्त बचा है, ऐसे में राजनीतिक दल अपने-अपने कोर वोटबैंक को मजबूत करने में जुट गए हैं. बीजेपी हिंदुत्व और कानून-व्यवस्था के मुद्दों को धार दे रही है, जबकि विपक्ष मुस्लिम वोटों को एकजुट करने की कोशिश में है.
दूसरी वजह यह है कि पश्चिम बंगाल में सड़क पर नमाज को लेकर हाल के दिनों में विवाद और राजनीतिक बयानबाजी तेज हुई, जिसका असर यूपी की राजनीति पर भी दिख रहा है.
तीसरी वजह यह है कि भोजशाला मामले पर आए फैसले के बाद काशी और मथुरा जैसे धार्मिक मुद्दे फिर चर्चा में हैं, जिससे हिंदुत्व की राजनीति को नया विमर्श मिला है.
चौथी वजह यह है कि जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष अरशद मदनी के बयान के बाद राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया है.
कल मदनी बोले, आज योगी का जवाब
मौलाना अरशद मदनी ने कहा था कि 'मुसलमान कभी झुके नहीं हैं और न कभी झुकेंगे.' उन्होंने आरोप लगाया कि मुसलमानों को भयभीत करके उन पर शर्तें थोपी जा रही हैं. मदनी ने समान नागरिक संहिता, विशेष गहन पुनरीक्षण और मस्जिद-मदरसों पर कार्रवाई का भी विरोध किया.
इसके अगले ही दिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 'नमाज पढ़नी आवश्यक है, शिफ्ट में पढ़िए.' उन्होंने यह भी कहा कि 'प्यार से मानेंगे तो ठीक, नहीं मानेंगे तो दूसरा तरीका अपनाया जाएगा.'
मुख्यमंत्री योगी ने बरेली का जिक्र क्यों किया?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने बयान में बरेली की घटना का विशेष रूप से जिक्र किया, जिसके पीछे सितंबर 2025 की वह घटना बताई जा रही है जब नमाज और प्रदर्शन को लेकर बवाल हुआ था.
बरेली में नमाज के बाद प्रदर्शन हुआ था, सितंबर 2025 में बड़ा बवाल हुआ था, तौकीर रजा खान के एलान के बाद भीड़ जुटी थी, इस्लामिया ग्राउंड में नमाज का एलान किया गया था, पुलिस ने रोकने की कोशिश की तो पथराव हुआ और हालात काबू करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया था.
भारतीय जनता पार्टी अब इस घटना को 'कानून-व्यवस्था बनाम अराजकता' के नैरेटिव में पेश कर रही है.
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यूपी चुनाव में चर्चित फैक्टर क्या?
2027 विधानसभा चुनाव से पहले जिन मुद्दों पर सबसे ज्यादा राजनीति की संभावना है, उनमें नकाब और हिजाब, सड़क पर नमाज, विशेष गहन पुनरीक्षण, बुलडोजर कार्रवाई और एनकाउंटर जैसे मुद्दे शामिल हैं. बीजेपी इन मुद्दों को 'सख्त शासन' और 'कानून के राज' से जोड़ रही है, जबकि विपक्ष इन्हें मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाने वाली राजनीति बता रहा है.
यूपी विधानसभा चुनावों के पिछले आंकड़ों पर नजर डालें तो 2012 में कुल 69 मुस्लिम विधायक चुने गए थे, जिनमें 45 समाजवादी पार्टी से थे. वहीं 2022 के चुनाव में यह संख्या घटकर 34 रह गई, जिनमें 32 सपा और 2 राष्ट्रीय लोकदल के विधायक शामिल थे.
यूपी में मुस्लिम आबादी और प्रभाव की बात करें तो राज्य में लगभग 3.84 करोड़ मुस्लिम आबादी है, जो कुल जनसंख्या का करीब 19.3 प्रतिशत है. पश्चिमी उत्तर प्रदेश में यह हिस्सेदारी 26.21 प्रतिशत तक जाती है. राज्य में 21 लोकसभा सीटें ऐसी हैं जहां मुस्लिम आबादी 30 प्रतिशत से अधिक है, जबकि करीब 75 विधानसभा सीटें मुस्लिम बहुल मानी जाती हैं. 2022 में कुल 34 मुस्लिम विधायक चुने गए थे.
मुस्लिम बहुल लोकसभा सीटों में सहारनपुर, मेरठ, कैराना, बिजनौर, अमरोहा, मुरादाबाद, रामपुर, संभल, बुलंदशहर, अलीगढ़, घोसी और गाजीपुर शामिल हैं.
सपा, बीजेपी, AIMIM, मौलाना... सीएम के बयान पर किसने क्या कहा?
सपा प्रवक्ता अनुराग भदौरिया ने सीएम के बयान पर कहा कि आज के भाषण के बाद यह एहसास हो गया कि बीजेपी ने अपनी हार मान ली है. उन्होंने कहा कि अब बीजेपी को लग गया है कि प्रदेश की जनता उनके बहकावे में नहीं आने वाली है. नीट और महंगाई जैसे मुद्दों पर कोई चर्चा नहीं हो रही है और विकास पूरी तरह गायब है.
बीजेपी प्रवक्ता अजय आलोक ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना जरूरी है और अगर इसे धमकी माना जाता है तो यह उचित नहीं है. उन्होंने कहा कि अगर अरब देशों में यह लागू हो सकता है तो भारत में क्यों नहीं.
एआईएमआईएम नेता शोएब जमई ने कहा कि सड़क पर नमाज जैसे मुद्दे चुनावी ध्रुवीकरण के लिए उठाए जा रहे हैं और सरकार असल मुद्दों से ध्यान भटका रही है.
विश्व हिन्दू परिषद् के नेता सुनील बंसल ने कहा कि सड़क पर नमाज कानून-व्यवस्था के खिलाफ है और इसे रोका जाना चाहिए. शिफ्ट में नमाज पढ़ने के सीएम योगी के बयान पर समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता दीपक रंजन ने कहा देश संविधान से चलेगा किसी के फरमान से नहीं. हर आदमी का अपना धर्म, अपनी आस्था है. किसी को परेशान करना उचित नहीं है. वह लोग खुद समझदार हैं. कोई जमा थोड़े ही लगाना चाहता है.
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले महीनों में उत्तर प्रदेश की राजनीति में धार्मिक पहचान, सार्वजनिक धार्मिक गतिविधियां और कानून-व्यवस्था प्रमुख चुनावी मुद्दे बने रहेंगे. भारतीय जनता पार्टी जहां इसे 'समान कानून' और 'अनुशासन' की लड़ाई बता रही है, वहीं विपक्ष इसे 'ध्रुवीकरण' और 'डर की राजनीति' करार दे रहा है.
इसके अलावा उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने योगी आदित्यनाथ के बयान पर कहा, 'मस्जिद, मंदिर, गिरजाघर, गुरुद्वारा इसी नाते बनाए जाते हैं कि उसके अंदर हम पूजा-पाठ करेंगे. किसी सड़क पर खुलेआम कोई पूजा-पाठ नहीं करता है. मुख्यमंत्री ने सही कहा है.'
शहाबुद्दीन रजवी ने किया सीएम का समर्थन
वहीं मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने सीएम के बयान पर कहा कि मुसलमान मस्जिद में नमाज पढ़ता है, घर और दुकान-मकान में भी नमाज पढ़ता है. इस्लाम ने सख्त हिदायत दी है कि नमाज पढ़ने वाले बंदे और खुदा के बीच इत्मिनान और सुकून होना चाहिए, जो मस्जिद और घर में मिलता है, सड़क पर नहीं. उन्होंने कहा कि मुसलमान न सड़क पर नमाज पढ़ते हैं, न चौराहे पर.
उन्होंने कहा कि ईद-बकरीद पर जब भीड़ ज्यादा होती है तो नियम है कि एक मस्जिद में इमाम बदलकर शिफ्ट-दर-शिफ्ट नमाज हो सकती है, जिससे कहीं भी सड़क पर दिक्कत नहीं होगी और न ही ट्रैफिक व्यवस्था बाधित होगी. उन्होंने कहा कि इस्लाम दिक्कत नहीं देता, बल्कि आसानी पैदा करता है.
वहीं समाजवादी पार्टी से चंदौली के सांसद वीरेंद्र सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि उनके पास विकास के मुद्दों पर चर्चा करने के लिए कुछ भी नहीं है, इसलिए वे घिसे-पिटे मुद्दों को आगे ला रहे हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि अध्यापकों से लेकर वकीलों तक पर लाठी चलाई जा रही है और यह सरकार मुद्दों पर चुनाव नहीं लड़ती, बल्कि हिंदू-मुस्लिम के मुद्दों पर चुनाव लड़ती है.
सपा सांसद ने कहा कि वीरेंद्र सिंह ने कहा कि हम लोगों ने इनकी काट देख रखी है और इसका जवाब हम बूथ पर देंगे. उन्होंने यह भी कहा कि बंगाल और असम में जिस तरीके से बयानबाजी की गई, उसी तरह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश में कर रहे हैं, लेकिन यह उत्तर प्रदेश है और यहां लोग इसका जवाब देंगे.
इन सबके बीच यह सवाल उठ रहे हैं कि वर्ष 2027 में प्रस्तावित चुनाव से पहले अजान से नमाज तक के ये बयान संयोग हैं या प्रयोग?

























