असम, केरलम्, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और पुद्दुचेरी के चुनाव परिणामों के बाद अब सबकी नजर उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 में प्रस्तावित विधानसभा चुनावों पर हैं. यहां समाजवादी पार्टी और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, इंडिया अलायंस के परचम तले चुनाव लड़ सकते हैं. सपा चीफ अखिलेश यादव अलग-अलग मौकों पर कह चुके हैं कि इंडिया अलायंस एकजुट है और साथ चुनाव लड़ेंगे.
हालांकि हालिया चुनाव परिणामों को देखते हुए भविष्य में दोनों की राह आसान नहीं होने वाली है. इसकी वजह है मुस्लिम बाहुल्य सीटों पर कांग्रेस की जीत. सबसे पहले बात करते हैं असम की जहां कांग्रेस ने 20 मुस्लिम प्रत्याशी उतारे थे, जिसमें से 18 जीते. वहीं केरलम् में कांग्रेस के 8 मुस्लिम प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की है. बात पश्चिम बंगाल की करें तो वहां जिन 2 प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की दोनों ही मुस्लिम बाहुल्य सीटों से जीते हैं. कांग्रेस ने बंगाल में 63 मुस्लिम उम्मीदवार उतारे थे. तमिलनाडु के मामले में कांग्रेस ने 2 मुस्लिम प्रत्याशियों को टिकट दिया और 1 ने जीत हासिल की.
गौरतलब है कि 2011 की जनगणना के अनुसार केरलम् में करीब 88.7 लाख यानी 26.6%, असम में लगभग 1.06 करोड़ यानी 34.2%, तमिलनाडु में करीब 42.3 लाख यानी 5.9% और पश्चिम बंगाल में लगभग 2.47 करोड़ यानी 27% मुस्लिम आबादी है. इन चारों राज्यों में प्रतिशत के लिहाज से सबसे ज्यादा मुस्लिम आबादी असम में है, जबकि कुल संख्या के लिहाज से पश्चिम बंगाल सबसे आगे है और तमिलनाडु में मुस्लिम आबादी का प्रतिशत सबसे कम है.
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सपा और कांग्रेस में बढ़ेगी तनातनी?
अब बात यूपी की करें तो यहां कांग्रेस और सपा के बीच मुस्लिम सीटों के लिए तनाव बढ़ सकता है. जानकारों की मानें तो कांग्रेस एक ओर जहां पांच राज्यों के चुनाव परिणामों के आधार पर ज्यादा मांग करेगी तो वहीं सपा अपने वोटबैंक में कोई सेंध लगने नहीं देना चाहेगी.
राज्य की 403 विधानसभा सीटों में से 143 सीटों के संदर्भ में दावा किया जाता है कि यहां मुस्लिम बाहुल्य आबादी हैं. इन 143 में से 73 ऐसी सीटें हैं जहां 30 फीसदी से अधिक मुस्लिम आबादी है. वर्ष 2024 के आम चुनावों में कांग्रेस जिन 6 लोकसभा सीटों में जीत दर्ज की उसमें कुल 45 विधानसभा सीटें हैं.
इन 20 सीटों पर कांग्रेस करेगी मजबूती से दावा?
कांग्रेस ने जो लोकसभा सीटें जीतीं उसमें सहारनपुर जिले में बेहट, सहारनपुर देहात और सहारनपुर नगर, सीतापुर लोकसभा सीट में सीतापुर, बाराबंकी की सभी 5 सीटों पर 25 फीसदी के करीब मुस्लिम आबादी है. प्रयागराज में इलाहाबाद उत्तर, इलाहाबाद पश्चिम, फूलपुर, हंड़िया सीट मुस्लिम बहुल मानी जाती है. अमेठी में जगदीशपुर और गौरीगंज सीट पर मुस्लिम निर्णायक भूमिका में हैं. वहीं 2011 की जनगणना के अनुसार रायबरेली में 12.13 फीसदी मुस्लिम हैं जो जिले की 5 विधासनभा सीटों पर निर्णायक होते हैं.
जानकारों की मानें तो कांग्रेस इन चुनावों के परिणामों के आधार पर मुस्लिम बाहुल्य सीटों पर दावा ठोंक सकती है.
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गौरतलब है कि सपा चीफ अखिलेश यादव सीट शेयरिंग के मुद्दे पर यह कह चुके हैं कि जो जिस सीट पर जीत सकता है वह उस पर लड़ेगा. अब यह देखना दिलचस्प होगा कि साल 2027 के चुनाव में सपा और कांग्रेस के बीच मुस्लिम बाहुल्य सीटों पर सहमति कैसे बनेगी और कौन सी सीट किसके खाते में जाएगी.
