'विरोध तो होगा ही...' INDIA अलायंस की बैठक से पहले अखिलेश यादव के चाचा ने फोड़ा सियासी बम
Women Reservation Bill: 33% महिला आरक्षण और परिसीमन को लेकर कांग्रेस की बैठक के बीच समाजवादी पार्टी के नेता रामगोपाल यादव ने बड़ी टिप्पणी की है.

- रामगोपाल यादव ने महिला आरक्षण और परिसीमन पर सरकार को घेरा.
- विधेयक संशोधन पर सरकार की नीयत पर उठाए सवाल.
- 2011 की जनगणना पर चुनाव को अनुचित बताया.
- परिसीमन द्वारा मनचाही सीटें बनाने की कोशिश का आरोप.
समाजवादी पार्टी के राज्यसभा रामगोपाल यादव ने महिला आरक्षण और परिसीमन के मुद्दे पर बड़ा सियासी बम फोड़ा है. सपा चीफ अखिलेश यादव के चाचा ने कहा है कि सरकार का जैसा रवैया है उस आधार पर विरोध तो होगा ही. उनका बयान ऐसे वक्त में आया है जब इस मुद्दे पर INDIA अलायंस के दलों की बैठक होने वाली है.
सोशल मीडिया साइट एक्स पर यादव ने लिखा कि महिला आरक्षण विधेयक संसद के दोनों सदनों ने सर्वसम्मति से पारित किया था. एक भी सदस्य ख़िलाफ़ नहीं था. उस विधेयक में संशोधन करने वाला विधेयक सरकार की बदनीयती को दर्शाता है. पश्चिम बंगाल में 23 और 29 को मतदान है. सदन उसके बाद भी बुलाया जा सकता था. इतने दिनों में कौन सा पहाड़ टूटा जा रहा था.
उन्होंने लिखा है कि 2011 की जन गणना पर चुनाव कराने का कोई औचित्य नहीं है. पहले जन गणना, फिर परिसीमन फिर चुनाव यही तय हुआ था. इसका विरोध तो होना ही है और सरकार का मंशा भी विपक्ष को महिला आरक्षण विरोधी करार देकर पूरे देश में घूम घूम कर बदनाम करने का है. अब ये सारा देश जान चुका है की बीजेपी की नीयत परिसीमन के द्वारा मनचाही कांस्टीट्यूएँसीज़ बनाकर येन केन प्रकारेन सत्ता में बने रहने की है. विपक्ष ऐसी चुनाव-क्षेत्र का सीमा-परिवर्तनको बर्दास्त नहीं करेगा.
अखिलेश यादव ने क्या कहा?
उधर, इसी मुद्दे पर सपा चीफ अखिलेश यादव ने भी टिप्पणी की. एक्स पर अखिलेश ने कहा कि हम महिला आरक्षण के साथ हैं पर उस भाजपाई चालबाज़ी के ख़िलाफ़ हैं, जो एक साज़िश के तहत की जा रही है. भाजपाई और उनके संगी-साथी देश की सबसे बड़ी आबादी के वर्ग मतलब ‘पिछड़े वर्ग’ की महिलाओं के बारे में चुप्पी साधे बैठे हैं.
कन्नौज सांसद ने लिखा कि ये संशोधन के नाम पर जो जल्दबाज़ी दिखा रहे हैं दरअसल उसके पीछे भाजपाइयों की मंशा ये है कि जनगणना न करनी पड़े क्योंकि अगर जनगणना हुई तो जातिवार आँकड़े भी देने पड़ेंगे और जातिवार आरक्षण भी. ये भाजपा का एक बहुत बड़ा षड्यंत्र है, जिसमें जनगणना आधारित परिसीमन को नकार कर पिछड़ों का अधिकार लूटा जा रहा है. आनुपातिक प्रतिनिधित्व के आधार पर इसे लागू करने की छूट पार्टियों को मिलनी चाहिए. ये लोकतंत्र के ख़िलाफ़ ख़ुफ़िया लोगों की गुप्त योजना है, जो तब तक स्वीकार्य नहीं जब तक प्रक्रिया में सुधार नहीं.
























