BJP के WANTED वाले पोस्टर पर आया अखिलेश यादव का जवाब, कहा- डरपोकों के पास विकल्प नहीं होते
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी के वॉन्टेड वाले पोस्टर पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि डरपोकों के पास ज्यादा विकल्प नहीं होते हैं.

- सपा प्रमुख ने बीजेपी के 'WANTED' पोस्ट को राजनीतिक पतन बताया.
- उन्होंने कहा, बीजेपी को पीडीए समाज के एक साथ खड़े होने का डर है.
- यादव ने भाजपाइयों के संस्कार और अभिव्यक्ति पर सवाल उठाए.
- उन्होंने कहा, बीजेपी ने पीडीए समाज के नेताओं का राजनीतिक भविष्य शून्य किया.
उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी के सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर किए गए WANTED वाले पोस्ट पर प्रतिक्रिया दी है. एक्स पर एक पोस्ट में सपा चीफ ने बीजेपी के पोस्टर को अपमानजनक बताया.
उन्होंने लिखा कि बीजेपी ने अपनी पार्टी के आधिकारिक हैंडल से जो अपमानजनक बात पोस्ट की है वो राजनीतिक नैतिक पतन का ऐसा दस्तावेज़ है जो देश के इतिहास में हमेशा के लिए दर्ज़ हो गया है. भाजपाइयों की घृणित मानसिकता से इसके अतिरिक्त कुछ और अपेक्षा भी नहीं की जानी चाहिए. ऐसे विषैली मानसिकता वाले लोगों को देखकर तो आस्तीन का साँप भी ख़ुद को डसकर आत्महत्या कर लेता है.
इसके साथ ही कन्नौज सांसद ने लिखा कि बीजेपी और उसके संगी-साथी पराजय स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं और अब उनमें ये डर बैठ गया है कि देश की 95% आबादी से बना पीडीए समाज जब बीजेपी की करतूतों के ख़िलाफ़ एक साथ खड़ा हो जाएगा तो उनका क्या होगा. उनकी रातों की नींद और दिन का चैन छिन गया है. वो सदैव की तरह भूमिगत होकर बिलबिला रहे हैं.
उन्होंने लिखा कि इन नकारात्मक लोगों ने आज़ादी से पहले भी देश से ग़द्दारी की और अंडरग्राउंड रहकर देश को ग़ुलाम बनानेवालों की ग़ुलामी की, स्वतंत्रता सेनानियों के ख़िलाफ़ चंद पैसों और वज़ीफ़े के लालच में मुख़बिरी का तुच्छ काम किया. इन्होंने पहले भी देश को धोखा देकर अकूत दौलत इकट्ठा की और अब भी कर रहे हैं. न इन्होंने तब हिसाब दिया था और न अब दे रहे हैं. देश और समाज के लिए एक गिरोह के रूप में ये एक विशाल ‘विषग्रंथी’ है.
'भाजपाइयों का जैसा संस्कार है, वैसा ही उनका शब्दकोश'
सपा नेता ने लिखा कि भाजपाइयों का जैसा संस्कार है, वैसा ही उनका शब्दकोश है और वैसी ही अभिव्यक्ति. भाजपाइयों की वर्चस्ववादी सोच पीडीए को सदैव अपशब्दों से संबोधित करती आई है, इसमें कुछ नया नहीं है. दरअसल जब-जब पीडीए समाज के किसी भी व्यक्ति का ऐसा अपमान होता है, पीडीए एकता और संकल्प उतना ही दृढ़ होकर उभरता है. पीडीए की एकता और एकजुटता को इससे और भी बल मिला है.
पूर्व सीएम ने लिखा कि आज बीजेपी ने एक ऐसी लकीर खींच दी है कि बीजेपी में शामिल पीडीए समाज के सांसद, विधायक, पार्षद, पदाधिकारी और सामान्य सदस्य तक का राजनीतिक भविष्य शून्य हो गया है. अब वो किस मुँह से अपने-अपने समाजों के सामने जाएंगे.
उन्होंने लिखा कि पीडीए ने तो 2024 के आम चुनाव में ही बीजेपी में शामिल ऐसे नेताओं का चुनावी बहिष्कार करके उन्हें हार का और बाहर का रास्ता दिखा दिया था, अब तो पीडीए समाज के बीच उनकी हमेशा के लिए मानसिक नाकाबंदी हो जाएगी. बीजेपी की ये गहरी चाल है कि वो पीडीए समाज के अपने सभी नेताओं की सियासत की नींव खोद दे और उनकी राजनीति हमेशा के लिए ख़त्म कर दे.
'देश छोड़कर भागते हैं या ...'
सपा नेता ने लिखा कि बीजेपी का भ्रष्टाचार और आपसी मतभेद ही उसे अंतिम चरण में ले आया है, जहाँ ये खलनायक आपस की गैंगवार में एक-दूसरे का काला चिट्ठा खोलकर, एक-दूसरे को ही ख़त्म कर देंगे. इतिहास गवाह है कि जैसे ही नकारात्मक शक्तियां हारने लगती हैं वो टूटने लगती हैं, इनके साथ भी ऐसा ही होना शुरू हो गया है और आख़िरकार ये होगा भी क्योंकि इन जैसे अवांछित लोगों के लिए इतिहास अपनी चाल नहीं बदलेगा.
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देखना ये है कि ये दग़ाबाज़ लोग देश छोड़कर भागते हैं या अपने काले अतीत को दोहराते हुए भूमिगत होते हैं, डरपोकों के पास वैसे भी ज़्यादा विकल्प नहीं होते हैं.

























