उत्तर प्रदेश पुलिस कांस्टेबल भर्ती में सामान्य वर्ग को आयु सीमा में छूट देने का मामला गरम हैं. समाजवादी पार्टी समेत बीजेपी के कई नेता भी इस मांग का समर्थन कर रहे हैं लेकिन, इसके आसार काफी कम है. जानकारी के मुताबिक बोर्ड साल 2023 में हुई भर्ती में पहले ही तीन वर्ष की छूट दी जा चुकी है इसलिए दोबारा राहत नहीं दी जाएगी. 

यूपी पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड ने हाल ही में 32,679 पदों पर कांस्टेबल भर्ती निकाली हैं, जिसमें सामान्य वर्ग के लिए अधिकतम आयु 22 वर्ष तय की गई है. जिसके बाद सोशल मीडिया पर अभ्यार्थियों द्वारा सिपाही भर्ती में अधिकतम आयु सीमा बढ़ाने की मांग तेज हो गई है. प्रदेश सरकार पर इस इसके लिए दबाव बनाया जा रहा है. 

राज्य सरकार ले सकती है ये फैसला

दरअसल सिपाही भर्ती में आयु सीमा बढ़े या नहीं इसका फैसला पुलिस भर्ती बोर्ड नहीं ले सकता हैं. ऐसे में अब गेंद सरकार के पाले में हैं. सरकार चाहे को आयु सीमा में छूट का ऐलान कर सकती है. लेकिन, इसके लिए सरकार के पास कोई ठोस वजह होना भी जरूरी है. 

इस मामले में ऐसे कुछ नहीं दिखाई दे रहा हैं. अधिकारियों का कहना है कि साल 2023 में 60244 पदों पर सिपाही की भर्ती हुई थी, जिसमें पहले ही अभ्यार्थियों को आयु सीमा में छूट दी जा चुकी है. ऐसे में दोबारा उन्हें कोई राहत मिलेगी इसकी संभावना कम है. 

विरोधी दलों ने भी सरकार से की मांग

बता दें इस पूरे मामला पर सियासत भी देखने को मिल रही हैं. अभ्यार्थियों की इस मांग का समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने भी समर्थन किया है. सपा अध्यक्ष ने बीजेपी को घेरते हुए कहा कि सरकार की खामियों की वजह से पुलिस भर्ती अनियमित हुई जिसके चलते अभ्यार्थी ओवरएज हो गए. युवाओं के हित को ध्यान में रखते हुए सरकार को उम्र में छूट देनी चाहिए. 

वहीं नगीना से सांसद और आज़ाद समाज पार्टी के मुखिया चंद्रशेखर आज़ाद ने भी सीएम योगी चिट्ठी लिखकर पुलिस भर्ती में आयु सीमा में छूट देने का अनुरोध किया. विरोधी दलों के साथ खुद भारतीय जनता पार्टी के अंदर से भी इसकी माँग उठ रही हैं. बीजेपी विधायक शलभमणि त्रिपाठी ने भी इस संबंध में सीएम योगी को चिट्ठी लिखी और मानवीय आधार पर आयु में छूट देने की मांग की.  

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