उत्तर प्रदेश में वर्ष 2026 में पंचायत चुनाव प्रस्तावित हैं. हालांकि जानकारों की मानें तो चुनाव में इस बारे भी देरी हो सकती है. वर्ष 2021 की मई में संपन्न हुए पंचायत चुनाव भी कोरोना वायरस संक्रमण की वजह से देरी से हुए थे. 

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अब दावा है कि इस वर्ष अप्रैल-मई में प्रस्तावित चुनाव फिर देरी से हो सकते हैं. दरअसल, हर पंचायत चुनाव से पहले पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन होता है. जिसके आधार पर ग्राम पंचायत, नगर पंचायत और जिला पंचायतों में पदों के आरक्षण निर्धारित होता है. पहले इसकी अनंतिम सूची आती है, अगर किसी को आपत्ति है तो उसके लिए एक निश्चित समय दिया जाता है. उसके बाद फाइनल लिस्ट आती है. 

आरक्षण संबंधी पूरी प्रक्रिया करीब 3 से 5 महीने की होती है. जानकारों की मानें तो अगर मार्च में ही आयोग का गठन हो तब भी यह सब होते-होते जुलाई 2026 तक का समय लगेगा. फिर चुनाव सितंबर-अक्टूबर तक खिसक सकते हैं.

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यूपी विधानसभा चुनाव से पहले UP में पंचायत चुनाव दिक्कत क्यों?

सितंबर अक्टूबर तक अगर यूपी में पंचायत चुनाव ही होंगे तो ऐसे में सियासी दलों को जनवरी 2027 में प्रस्तावित विधानसभा चुनाव की तैयारियों का वक्त नहीं मिलेगा. तैयारियों के लिए वक्त मिलने से ज्यादा राजनीतिक दलों के लिए जरूरी है कि यह सत्ता का सेमीफाइनल माने जाने वाले पंचायत चुनाव को बिना किसी अंदरूनी कलह के निपटा लें.

हालांकि पिछले अनुभवों को देखें तो पंचायत चुनाव में हर दल की अंदरूनी कलह, जनता की निगाहों के सामने आ ही जाती है. ऐसे में पंचायत चुनाव के तत्काल के बाद विधानसभा इलेक्शन में उतरना सियासी दलों के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं होगा. 

2027 के चुनाव के बाद होंगे पंचायत चुनाव?

जानकारों की मानें तो यूपी में वर्ष 2027 के चुनाव के बाद ही पंचायत की प्रक्रिया शुरू की जाएगी. सूत्रों के अनुसार पंचायत और नगर निकाय चुनाव एक साथ अलग-अलग चरणों में कराए जा सकते हैं. एक ओर जहां गांवों में प्रधान चुने जाएंगे तो वहीं शहरों में चेयरमैन और मेयर का निर्वाचन हो सकता है. सूत्रों के मुताबिक वर्ष 2027 या वर्ष 2028 में ही दोनों चुनाव एक साथ होंगे, जो यूपी सरीखे बड़े राज्य में वन नेशन वन इलेक्शन का लिटमेस टेस्ट भी साबित हो सकता है.

पंचायत चुनाव टाइम पर होंगे या विधानसभा चुनाव से ठीक पहले या बाद, इस पर कोई भी कुछ बोलने को तैयार नहीं है. न सियासी दल, न अधिकारी.  इतना जरूर है कि अगर यह चुनाव समय पर न हुए तो गांव की सरकार, अगले इलेक्शन तक सेक्रटेरी और जिला पंचायत की कमान बतौर प्रशासक , जिलाधिकारी के हाथ में होगी.