उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर हलचल तेज हो गई हैं. लेकिन पंचायत चुनाव से पहले प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार राज्य पिछड़ा आयोग का गठन करेगी. राज्य सरकार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में सुनवाई के दौरान ये जानकारी दी है. आयोग की रिपोर्ट के आधार पर ही चुनाव कराए जाएंगे.
हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दाखिल कर ये मांग की गई थी कि जिसमें ये कहा गया था कि प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग का कार्यकाल पांच महीने पहले ही पूरा हो चुका हैं इसलिए सरकार को निर्देश दिया जाए कि इस आयोग का गठन किया जाए. इस याचिका पर जस्टिस राजन राय और जस्टिस अवधेश चौधरी की बेंच ने सुनवाई की.
योगी सरकार ने हाईकोर्ट में दिया हलफनामा
इस मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने कोर्ट में हलफनामा देते हुए बताया कि पंचायत चुनाव से पहले राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन किया जाएगा. ये आयोग जो रिपोर्ट देगा उसके आधार पर ही उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव कराया जाएगा. सरकारी अधिवक्ता ने कहा कि सरकार उक्त आयोग के गठन की प्रक्रिया में हैं. इसके बाद कोर्ट ने याचिका में कुछ शेष न बचने के कारण उसे निस्तारित कर दिया.
बता दें कि यूपी में इस साल अप्रैल मई के महीने में पंचायत चुनाव कराए जा सकते हैं. पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर भी दावा कर चुके हैं कि यूपी में पंचायत चुनाव अपने समय पर ही कराए जाएंगे. दूसरी तरफ़ अभी तक पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन नहीं हो पाया है. ऐसे में इन चुनावों में देरी भी हो सकती हैं.
इससे पहले नगीना सांसद और आज़ाद समाज पार्टी के मुखिया चंद्रशेखर आज़ाद ने भी सीएम योगी को पत्र लिखकर ओबीसी आयोग का गठन करने की माँग की थी. अब सरकार ने साफ कर दिया है कि यूपी में पंचायत चुनाव ओबीसी आयोग की रिपोर्ट आने के बाद ही कराए जाएंगे.
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