Noida News: भारत सरकार की प्राथमिकता वाले फेस रिकग्निशन और ई-केवाईसी कार्य में लापरवाही बरतने पर बाल विकास विभाग ने सख्त रुख अपनाया है. बाल विकास परियोजना अधिकारी चारू अग्रवाल ने जानकारी दी कि निर्धारित समयसीमा के बावजूद बार-बार निर्देश देने पर भी कई आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों ने ई-केवाईसी व फेस रिकग्निशन कार्य पूर्ण नहीं किया, जिससे उनका मानदेय तत्काल प्रभाव से रोक दिया गया है.
प्रभावित कार्यकत्रियों में सुनीता (नई आबादी), सरिता (दत्तावाली), संजू (जैतपुर वैशपुर), संजेश (चक्रसेनपुर), अंजू (केमराला), पिंकी (जुनपत), अनीता (गौतमपुरी), इंद्रेश, विमलेश (डबरा), रूपकौर (रायपुर बांगर), शकुंतला, मुथ्यानि, जेडकुसुम, जेडपूनम, जेडसुनीता (सादीपुर चिद्धोली) आदि शामिल हैं.
अधिकारियों ने दी जानकारीअधिकारियों ने बताया कि यह कार्य पात्र लाभार्थियों तक पोषण आहार की पारदर्शी आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत आवश्यक है. फेस रिकग्निशन और ई-केवाईसी के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाता है कि योजना का लाभ केवल पात्र और वास्तविक लाभार्थियों को ही मिले.
पोषण आहार में हो रही धांधली को देखते हुए सरकार ने ई-केवाईसी और फेस रिकग्निशन के जरिए पारदर्शिता बनाए रखने और निष्पक्ष तौर पर वितरण प्रक्रिया करने के लिए ये फैसला लिया है. अब जिन आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों की तरफ से इस काम को करने में देरी हुई है उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए उनका मानदेय रोक दिया गया है जो शीघ्र रिपोर्ट देने के बाद दोबारा मिलेगा.
टीमों द्वारा की गई फील्ड विजिटचारू अग्रवाल ने बताया कि सीडीपीओ कार्यालय की टीम द्वारा समय-समय पर फील्ड विजिट भी की गईं, लेकिन कुछ कार्यकत्रियाँ अपने कर्तव्यों के प्रति गंभीर नहीं दिखीं. ऐसे में अनुशासन और कार्य की गंभीरता बनाए रखने हेतु मानदेय रोकना जरूरी हो गया.
हालांकि, बाल विकास परियोजना अधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन कार्यकत्रियों द्वारा शीघ्र कार्य पूर्ण कर रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी, उनका मानदेय पुनः निर्गत कर दिया जाएगा. उन्होंने सभी कार्यकत्रियों से अपील की कि वे इस कार्य को गंभीरता से लें और समय से पूरा करें, जिससे लाभार्थियों को कोई असुविधा न हो और शासन की मंशा पूर्ण हो सके.