UP News: उत्तर प्रदेश में बिजली वितरण की व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम (डिस्कॉम) के निजीकरण की तैयारी पूरी कर ली गई है. माना जा रहा है कि इस साल जुलाई तक इन डिस्कॉम के निजीकरण के लिए निविदा (टेंडर) जारी कर दी जाएगी. बताया गया है कि अदाणी समूह, टाटा पावर लिमिटेड, ग्रीनको समूह समेत देश के आठ बड़े औद्योगिक घराने इस प्रक्रिया में दिलचस्पी दिखा रहे हैं.
फिलहाल पूर्वांचल और दक्षिणांचल डिस्कॉम 42 जिलों में बिजली वितरण का काम देख रहे हैं. बिजली व्यवस्था को और दुरुस्त करने के लिए यूपी पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) ने इन दोनों निगमों को भंग कर पांच नई कंपनियां बनाने का फैसला लिया है. खास बात यह है कि इन नई कंपनियों में 51 फीसदी हिस्सेदारी निजी उद्योग समूहों को दी जाएगी.
यूपीपीसीएल ने इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए ग्रांट थॉर्नटन भारत नाम की एक सलाहकार कंपनी को नियुक्त किया है. यह सलाहकार कंपनी निजीकरण के लिए जरूरी दस्तावेज तैयार कर रही है. पावर कॉरपोरेशन के प्रबंध निदेशक पंकज कुमार ने बताया कि जैसे ही नियामक आयोग का अभिमत (मंजूरी) मिल जाएगा, निविदा के दस्तावेजों को मंजूरी के लिए कैबिनेट के पास भेजा जाएगा. कैबिनेट से मंजूरी मिलते ही निविदा प्रक्रिया शुरू हो जाएगी.
कंपनियों ने दिलाया यूपी में बिजली सुधार में सहयोग का भरोसाइसी साल अप्रैल में लखनऊ में यूपी पावर कॉरपोरेशन ने इस मुद्दे पर एक बैठक भी की थी. इस बैठक में अदाणी पावर के एमडी अनिल सरदाना, टाटा पावर के संजय बग्गा, चंडीगढ़ पावर के अनिल धमीजा समेत कई बड़े उद्योग समूहों के लोग शामिल हुए थे. इन लोगों ने अपनी-अपनी कंपनियों के अनुभव साझा किए और यूपी में बिजली सुधार में सहयोग का भरोसा दिलाया.
सूत्रों के मुताबिक, टाटा पावर के एमडी प्रवीर सिन्हा ने पहले ही कह दिया है कि उनकी कंपनी इस प्रक्रिया में हिस्सा लेगी. अदाणी पावर के प्रवक्ता ने भी इस प्रक्रिया में शामिल होने की पुष्टि की है. हालांकि, सेरेंटिका रिन्यूबल्स के प्रवक्ता ने इस पर टिप्पणी करने से मना कर दिया, लेकिन संकेत दिए कि उनकी कंपनी संभावनाओं को तलाश रही है.
योगी सरकार का यूपी को तोहफा, इन इलाकों में 3,235 बनेंगे नए पुल, शहर तक बढ़ेगी कनेक्टिविटी
सरकार का कहना है कि सार्वजनिक वितरण व्यवस्था में सुधार के लिए यह कदम जरूरी हो गया है. यूपीपीसीएल के अध्यक्ष डॉ. आशीष गोयल का कहना है कि सुधार के सभी प्रयास नाकाफी साबित हुए हैं, इसलिए निजीकरण जरूरी हो गया है. सरकार की योजना है कि नवंबर तक इस पूरी प्रक्रिया को खत्म कर दिया जाए, ताकि बिजली वितरण की व्यवस्था और बेहतर हो सके.
बिजली वितरण के निजीकरण का उद्देश्य है कि उपभोक्ताओं को समय पर बिजली मिले, बिजली कटौती कम हो और सिस्टम में पारदर्शिता आए. अब लोगों की नजरें इस पर टिकी हैं कि कौन-सी कंपनियां निविदा प्रक्रिया में हिस्सा लेंगी और इस बदलाव से उपभोक्ताओं को क्या फायदा होगा.