यूपी सरकार की इस योजना में इजरायल ने दिखाया इन्ट्रस्ट, सीएम योगी से हो चुकी है चर्चा
UP News: योगी सरकार ने तीन बड़ी परियोजनाओं पर काम शुरू किया है. इनमें हमीरपुर (मसगांव चिल्ली), महोबा (कुलपहाड़) और ललितपुर (शहजाद) जिले शामिल हैं.

UP News: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार हर खेत को पानी देने के लक्ष्य के साथ अब 'पर ड्रॉप मोर क्रॉप' की दिशा में भी आगे बढ़ रही है. इसका मकसद कम पानी में ज्यादा से ज्यादा खेतों की सिंचाई करना है, जिससे किसानों को अधिक पैदावार मिले और उनकी आमदनी बढ़े. इसके लिए सरकार स्प्रिंकलर और ड्रिप जैसी आधुनिक सिंचाई प्रणालियों को बढ़ावा दे रही है और इस पर 80 से 90 प्रतिशत तक अनुदान भी दिया जा रहा है.
बुंदेलखंड में तीन स्प्रिंकलर परियोजनाओं पर काम जारी
पानी की कमी से जूझ रहे बुंदेलखंड में योगी सरकार ने तीन बड़ी स्प्रिंकलर परियोजनाओं पर काम शुरू किया है. इनमें हमीरपुर (मसगांव चिल्ली), महोबा (कुलपहाड़) और ललितपुर (शहजाद) स्प्रिंकलर परियोजनाएं शामिल हैं. इन परियोजनाओं से किसानों को कम पानी में अधिक खेती करने में मदद मिलेगी. इसके अलावा, सरकार खेत-तालाब योजना के तहत बनाए गए तालाबों को भी स्प्रिंकलर से जोड़ने की योजना बना रही है.
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स्प्रिंकलर और ड्रिप सिंचाई के फायदे-
1. पानी की बचत: पारंपरिक सिंचाई की तुलना में स्प्रिंकलर और ड्रिप सिस्टम से 50-70% तक पानी बचाया जा सकता है.
2. फसल की सुरक्षा: खेत में जरूरत के मुताबिक पानी देने से फसलों को जलभराव से होने वाले नुकसान से बचाया जा सकता है.
3. ऊर्जा की बचत: भूगर्भ जल से ऊपर पानी खींचने में लगने वाली बिजली और डीजल की खपत भी कम होगी.
4. बेहतर उपज: पौधों को समान मात्रा में पानी और पोषक तत्व मिलने से उनकी ग्रोथ अच्छी होती है और पैदावार बढ़ती है.
5. हर तरह की जमीन पर इस्तेमाल: असमतल और ऊबड़-खाबड़ जमीन पर भी स्प्रिंकलर और ड्रिप सिंचाई का इस्तेमाल किया जा सकता है.
इजरायल से मिल सकता है सहयोग
ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई को अधिक प्रभावी बनाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार इजरायल सरकार से भी सहयोग ले सकती है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की इजरायली राजदूत से इस विषय पर चर्चा हो चुकी है और कुछ सेंटर ऑफ एक्सीलेंस को इसका मॉडल भी बनाया गया है.
अब तक हुए बड़े काम
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत सरयू नहर, अर्जुन सहायक और बाण सागर परियोजना पूरी कर ली गई है. योगी सरकार के कार्यकाल में 976 छोटी-बड़ी सिंचाई परियोजनाएं पूरी की गईं, जिससे करीब 48.32 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त सिंचाई क्षमता बनी और 185.33 लाख किसानों को फायदा हुआ.
2017 में उत्तर प्रदेश में कुल सिंचित क्षेत्र 82.58 लाख हेक्टेयर था, जो अब बढ़कर 133 लाख हेक्टेयर हो गया है. इसका नतीजा यह है कि उत्तर प्रदेश देश का इकलौता राज्य बन गया है जहां 76% भूमि पर खेती होती है और 86% भूमि सिंचित है.
जारी परियोजनाएं और भविष्य की योजनाएं-
1. मध्य गंगा नहर परियोजना (फेज-2), कनहर सिंचाई परियोजना और रोहिन नदी पर बैराज का निर्माण.
2. इनसे करीब 5 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई होगी और 7 लाख किसानों को लाभ मिलेगा.
3. नदी जोड़ो परियोजना के तहत केन-बेतवा लिंक परियोजना से बुंदेलखंड के झांसी, महोबा, बांदा और ललितपुर जिलों में 2.51 लाख हेक्टेयर खेतों को पानी मिलेगा और 21 लाख लोगों को पीने का पानी उपलब्ध होगा.
योगी सरकार के ये प्रयास किसानों को कम लागत में अधिक फसल देने में मदद करेंगे और उनकी आमदनी में भी बढ़ोतरी होगी. आने वाले वर्षों में उत्तर प्रदेश की कृषि व्यवस्था और सिंचाई सुविधाओं में और सुधार देखने को मिलेगा.
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Source: IOCL



























