भदोही में सड़क चौड़ीकरण पर बवाल, PWD ने मनमानी कर सांसद के निर्देशों की अनदेखी, जनता में आक्रोश
UP News In Hindi: भदोही में सड़क चौड़ीकरण पर PWD की मनमानी के कारण जनता में भारी आक्रोश है. बीजेपी सांसद द्वारा 'दिशा' की बैठक में लिए गए आदेशों को भी PWD ने दरकिनार कर दिया है.

उत्तर प्रदेश के भदोही में सड़क चौड़ीकरण का मुद्दा अब विवादों में है. PWD की मनमानी और प्रशासनिक संवादहीनता के कारण आम जनता में भारी आक्रोश है. हैरानी की बात यह है कि PWD ने उस आदेश को भी दरकिनार कर दिया जो खुद बीजेपी सांसद ने 'दिशा' की बैठक में दिया था.
इस पूरे विवाद में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब PWD की कार्यप्रणाली ने खुद सत्तापक्ष के सांसद के निर्देशों को कटघरे में खड़ा कर दिया. मामला जनवरी महीने का है, जब कलेक्ट्रेट सभागार में जिला विकास समन्वय और निगरानी समिति (दिशा) की महत्वपूर्ण बैठक हुई थी.
ब्रिज बनने के बाद जाम की स्थिति और बढ़ी
इस बैठक में लिप्पन तिराहा अहमदगंज सड़क चौड़ीकरण का मुद्दा प्रमुखता से छाया रहा. बैठक की अध्यक्षता कर रहे बीजेपी सांसद डॉ. विनोद कुमार बिंद ने अधिकारियों को सख्त लहजे में हिदायत देते हुए निर्देश दिया था कि, जिला मुख्यालय पर मेरी और जिलाधिकारी की मौजूदगी में सड़क चौड़ीकरण की जद में आए. सभी भवन स्वामियों के साथ जब तक संयुक्त बैठक न हो जाए, तब तक किसी भी नागरिक को कतई परेशान न किया जाए.
PWD के सहायक अभियंता आलोक कुमार ने भी बताया कि यह मामला पहले से ही चल रहा है. इसीलिए सभी को अलाउंसमेंट कराकर कोतवाली में बुलाया गया था, जहां कुछ सुझाव मिले है और अगली बैठक 15 अप्रैल को रखी गई है. सरकार द्वारा ब्रिज बनने के बाद यहां जाम की स्थिति और बढ़ गई है, क्योंकि लोगों का आवागमन भी बढ़ा है. यहां लगने वाले जाम को देखते हुए स्थानीय लोगों की शिकायत पर ही चौड़ीकरण की पक्रिया की जा रही है.
तय गाइडलाइन के बाद भी PWD ने अलग राह क्यों चुनी?
सांसद के इन स्पष्ट आदेशों के बावजूद, PWD ने बिना किसी वरिष्ठ अधिकारी या सांसद की उपलब्धता सुनिश्चित किए बिना ही शहर में मुनादी करवा दी. विभाग ने आनन-फानन में जनता को कोतवाली बुलाकर न केवल अफरा-तफरी का माहौल पैदा किया, बल्कि सरकार की मंशा पर भी सवालिया निशान लगा दिए हैं. सवाल यह है कि जब 'दिशा' की बैठक में स्पष्ट गाइडलाइन तय थी, तो PWD ने अपनी अलग राह क्यों चुनी?
बताया जाता है कि PWD ने लगभग 3 दिनों तक ई-रिक्शा से घोषणा कराई थी कि 11 अप्रैल को DM की मौजूदगी में सुनवाई होगी. शनिवार (11 अप्रैल) को जब व्यापारी और नागरिक कोतवाली पहुंचे, तो वहां न सांसद थे और न ही जिलाधिकारी. मौके पर मौजूद PWD अधिकारी आलोक कुमार के पास जनता के सवालों का कोई ठोस जवाब नहीं था.
क्या PWD खुद को प्रशासन से ऊपर समझ रहा है?
हैरानी तब हुई जब उपजिलाधिकारी (SDM) अरुण गिरी ने दो टूक कहा कि उन्हें ऐसी किसी बैठक की जानकारी ही नहीं है. कोतवाली प्रभारी ने भी अनभिज्ञता जताई. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या PWD खुद को शासन और प्रशासन से ऊपर समझ रहा है, क्या जीरो टॉलरेंस की बात करने वाले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार के कामों पर पलीता लगाया जा रहा है?
शहर कोतवाली क्षेत्र अंतर्गत लिप्पन तिराहा स्थित स्थानीय नागरिकों का साफ कहना है कि हम सभी पीढ़ी दर पीढ़ी यहां रह रहे हैं. इसी रोड पर बने रेलवे ओवरब्रिज (31B) के लिए योगी आदित्यनाथ सरकार में ही मुआवजे दिए गए, तो हमें अवैध क्यों कहा जा रहा है, क्या हम गरीब आम जनता के साथ योगी सरकार में न्याय होगा या सिर्फ कागजी कार्रवाई के नाम पर हमें बेइज्जत कर बेदखल कर दिया जायेगा.
सीएम योगी से बैठक में सम्मान निर्णय की मांग
स्थानीय निवासियों में प्रेम जायसवाल, हरिश्चंद्र गुप्ता, पंकज, कुंदन, विशाल जायसवाल, किशन विश्वकर्मा, सतेन्द्र जायसवाल और अजय मोदनवाल ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मांग की है कि 'दिशा' की बैठक में लिए गए निर्णय का सम्मान हो. सांसद और DM की मौजूदगी में ही पारदर्शी तरीके से संवाद हो और उचित मुआवजे की प्रक्रिया अपनाई जाये ताकि इस सड़क चौड़ीकरण से हम लोगों सहित अन्य प्रभावित सैकड़ों परिवार के साथ न्याय हो सके.
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Source: IOCL

























