Assembly By Election: यूपी और महाराष्ट्र में उपचुनाव की तैयारी पूरी, आज हो सकता है चुनाव तारीखों का ऐलान
Assembly By Election In Hindi: चुनाव आयोग की प्रेसवार्ता में आज यूपी और महाराष्ट्र की कई विधानसभा सीटों पर उपचुनाव का ऐलान हो सकता है. राहुरी, बारामती, दुद्धी, घोसी और फरीदपुर सीटों पर हलचल तेज.

- चुनाव आयोग जल्द उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र की सीटों पर उपचुनाव की घोषणा करेगा.
- महाराष्ट्र की राहुरी सीट पर कर्डिले बनाम तनपुरे की लड़ाई फिर दिख सकती है.
- उत्तर प्रदेश की दुद्धी, फरीदपुर, घोसी सीटों पर उपचुनाव होंगे.
चुनाव आयोग की आज होने वाली प्रेसवार्ता में उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र की कुछ विधानसभा सीटों पर उपचुनाव की घोषणा होने की संभावना जताई जा रही है. महाराष्ट्र में अहिल्यानगर जिले की राहुरी सीट के साथ-साथ अजित पवार के गढ़ मानी जाने वाली बारामती सीट पर भी सबकी नजर है, जहां संभावित राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चा तेज है.
वहीं उत्तर प्रदेश में सोनभद्र की दुद्धी, बरेली की फरीदपुर और मऊ की घोसी सीट विधायकों के निधन के कारण खाली हुई हैं, जिन पर उपचुनाव कराए जा सकते हैं. ऐसे में चुनाव आयोग की घोषणा से दोनों राज्यों में सियासी हलचल और तेज होने की संभावना है.
महाराष्ट्र में राहुरी सीट पर सबकी नजर
महाराष्ट्र के अहिल्यानगर जिले की राहुरी विधानसभा सीट पर उपचुनाव होने जा रहा है. यह सीट भाजपा के विधायक शिवाजी कर्डिले के निधन के बाद खाली हुई है. कर्डिले का करीब 5 महीने पहले निधन हो गया था. इस सीट पर लंबे समय से भाजपा के कर्डिले परिवार और राष्ट्रवादी कांग्रेस के तनपुरे परिवार के बीच मुकाबला देखने को मिलता रहा है.
राहुरी विधानसभा क्षेत्र 3 तालुकों से मिलकर बना है. इसमें राहुरी का बड़ा हिस्सा, पाथर्डी और अहिल्यानगर के कुछ गांव शामिल हैं. उपचुनाव से पहले मतदाताओं की संख्या भी बढ़ी है.
2024 के चुनाव की तुलना में यहां 8,017 मतदाता बढ़े हैं और अब कुल मतदाता संख्या 3 लाख 33 हजार 183 हो गई है. पिछले चुनाव में यहां 74.27 प्रतिशत मतदान हुआ था, जिसमें 2 लाख 41 हजार 405 लोगों ने वोट डाले थे.
2024 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के शिवाजी कर्डिले ने राष्ट्रवादी कांग्रेस (शरद पवार गुट) के प्राजक्त तनपुरे को 35,487 मतों से हराया था. इसलिए इस बार भी कर्डिले बनाम तनपुरे की पारंपरिक लड़ाई देखने को मिल सकती है.
क्या बदलेंगे राजनीतिक समीकरण?
हाल के दिनों में प्राजक्त तनपुरे के बयानों और उनके भगवा टोपी व भगवा उपरणा पहनने को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं. राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि वह भाजपा की ओर जा सकते हैं. हालांकि इस संभावित समीकरण को लेकर पूर्व सांसद डॉ. सुजय विखे ने अप्रत्यक्ष रूप से विरोध जताया है.
तनपुरे राष्ट्रवादी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष जयंत पाटिल के भांजे हैं. इसलिए उनकी राजनीतिक दिशा को लेकर भी लगातार चर्चा होती रहती है. खुद प्राजक्त तनपुरे ने कहा है कि उपचुनाव में उनकी उम्मीदवारी तय है, लेकिन मौजूदा राजनीतिक स्थिति को देखते हुए अभी यह कहना मुश्किल है कि वह किस पार्टी से चुनाव लड़ेंगे.
पूर्व सांसद सुजय विखे ने भी एक बयान में कहा कि वह इस उपचुनाव की दौड़ में नहीं हैं, लेकिन किए गए एक सर्वे में उनका नाम पहले स्थान पर आया है. इस बयान से भी राजनीतिक हलचल तेज हो गई है.
नगर परिषद चुनाव ने बदला माहौल
राहुरी नगर परिषद चुनाव में प्राजक्त तनपुरे के नेतृत्व वाले गठबंधन ने हाल ही में स्पष्ट बहुमत हासिल किया था. इससे यह संकेत मिला कि विधानसभा चुनाव में हार के बावजूद उनका जनाधार अभी भी मजबूत है. यही कारण है कि इस उपचुनाव को काफी दिलचस्प माना जा रहा है.
बारामती विधानसभा सीट सीट पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार का मजबूत गढ़ मानी जाती है और यहां होने वाले संभावित उपचुनाव पर पूरे राज्य की नजर है. माना जा रहा है कि बारामती में जो राजनीतिक फैसला होगा, उसका असर राहुरी जैसे आसपास के इलाकों की राजनीति पर भी पड़ सकता है.
उत्तर प्रदेश में तीन सीटों पर उपचुनाव की तैयारी
उत्तर प्रदेश में भी तीन विधानसभा सीटों पर उपचुनाव की स्थिति बन गई है. ये सीटें विधायकों के निधन के कारण खाली हुई हैं. नियम के अनुसार ऐसी सीटों पर छह महीने के भीतर उपचुनाव कराना जरूरी होता है.
सोनभद्र जिले की दुद्धी सीट से समाजवादी पार्टी के विधायक विजय सिंह गोंड का हाल ही में लखनऊ के एसजीपीजीआई अस्पताल में निधन हो गया.
इससे पहले बरेली जिले की फरीदपुर सीट से भाजपा विधायक श्याम बिहारी लाल का दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया था. वहीं मऊ जिले की घोसी सीट समाजवादी पार्टी के विधायक सुधाकर सिंह के निधन के कारण खाली है.
बीजेपी और सपा के बीच मुख्य मुकाबला
इन तीनों सीटों पर मुख्य मुकाबला भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच माना जा रहा है. दुद्धी सीट से विजय सिंह गोंड आठ बार विधायक रह चुके थे और इलाके में उनका मजबूत राजनीतिक प्रभाव था. वहीं घोसी सीट पर समाजवादी पार्टी पहले ही सुधाकर सिंह के बेटे सुजीत सिंह को उम्मीदवार घोषित कर चुकी है.
पंचायत चुनाव से पहले अहम संकेत
राज्य में करीब एक वर्ष बाद विधानसभा चुनाव होने हैं और उससे पहले पंचायत चुनाव भी प्रस्तावित हैं. ऐसे में इन उपचुनावों को राजनीतिक दलों के लिए बड़े संकेत के रूप में देखा जा रहा है.
माना जा रहा है कि चुनाव आयोग आज प्रेसवार्ता में इन सीटों के उपचुनाव का कार्यक्रम घोषित कर सकता है, जिसके बाद दोनों राज्यों में राजनीतिक गतिविधियां और तेज हो जाएंगी.
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