उत्तर प्रदेश के ललितपुर में स्थित एक गांव में पहली बार शिक्षा की अलख जगी हैं. यहां के करीला गांव में दो सगी बहनें हाई स्कूल तक पहुंची हैं. जिसके बाद ये खबर चर्चा में बनी हुई हैं. इनमें बड़ी बहन हाईस्कूल पास कर चुकी हैं जबकि छोटी बहन इस साल हाई स्कूल की परीक्षा देगी. ये दोनों अब पढ़-लिखकर शिक्षक बनना चाहती हैं ताकि वो गांव के दूसरे बच्चों को पढ़ा-लिखा सकें.
ये मामला ललितपुर के तालबेहट मुख्यालय में रेल लाइन से एक किमी की दूरी पर करीला गाँव हैं. यहां रहने वाली नेहा और राखी ने पहली बार हाईस्कूल तक पहुंचकर इतिहास रच दिया है. नेहा ने बीते साल 65 फ़ीसद अंकों के साथ हाईस्कूल पास किया है और अब वो 11वीं कक्षा में पढ़ रही है.
गांव में पहली बार हाईस्कूल तक पहुंची बहनें
नेहा की छोटी बहन राखी हाईस्कूल की परीक्षा की तैयारी कर रही है, राखी का कहना है कि वो अपनी बहन से भी ज्यादा नंबर लाना चाहती हैं. दोनों बहने बड़े होकर टीचर बनना चाहती हैं ताकि वो गांव की दूसरी बच्चियों को शिक्षित कर सकें.
नेहा और राखी का कहना है कि उनके पिता नहीं चाहते थे कि वो ज्यादा पढ़ाई लिखाई करें लेकिन, उनकी मां ने उन्हें सपोर्ट किया, जिसकी वजह से वो यहां तक पहुँच पाईं हैं. उन्होंने बताया कि गांव वाले भी अक्सर उन्हें पढ़ाई के लिए ताना देते थे लेकिन उन्होंने पढ़ना नहीं छोड़ा. गांववालों का कहना है कि पढ़ने लिखने की वजह उनकी शादी में दिक़्क़त हो सकती है.
दरअसल करीला गांव चारों तरफ जंगलों से घिरा हुआ है, जिसमें करीब 300 परिवारों के लोग रहते हैं. इस गांव में सहरिया जनजाति के लोग रहते हैं जो मुख्यतः खेती-बाड़ी और मजदूरी का काम करके अपना जीवन चलाते हैं.
कहने के लिए तो इस गाँव में सरकार की सभी योजनाओं का लाभ मिलता है. यहां के लोगों के पास सरकारी आवास है, उज्जवला योजना के तहत सिलेंडर, बिजली, सड़क और शौचालय की सुविधाएं तक पहुँच चुकी हैं. लेकिन, एक भी स्कूल नहीं हैं. यहां के बच्चे ज्यादा से ज्यादा पांचवीं या आठवीं तक ही पढ़े हैं. इसके बाद वो काम की तलाश में निकल जाते हैं.