UP News: उत्तर प्रदेश में बिजली विभाग के निजीकरण को लेकर जारी राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन को कांग्रेस पार्टी का खुला समर्थन मिला है. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भाजपा सरकार का पूरा ध्यान निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के बजाय, विभाग को प्राइवेट कंपनियों को सौंपने और निजीकरण को बढ़ावा देने में लगा हुआ है. उन्होंने इस फैसले को किसान, गरीब और आम जनता के हितों के खिलाफ बताया है.

अजय राय ने कहा कि अगर बिजली विभाग का निजीकरण हुआ तो इसका सबसे ज्यादा असर गरीब और मध्यम वर्ग पर पड़ेगा. “बिजली की दरें कई गुना बढ़ जाएंगी, किसानों को मुफ्त बिजली मिलना बंद हो जाएगी और घरेलू उपभोक्ताओं को हर महीने जेब ढीली करनी पड़ेगी,” उन्होंने कहा. साथ ही यह भी जोड़ा कि “निजी कंपनियों का मकसद केवल मुनाफा कमाना होता है, ऐसे में जनसेवा की भावना पूरी तरह खत्म हो जाएगी.”

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उद्योग-व्यापार भी होंगे प्रभावितकांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि सिर्फ आम उपभोक्ता ही नहीं, बल्कि उद्योग और व्यापार भी इससे अछूते नहीं रहेंगे. जब बिजली महंगी होगी तो उत्पादन लागत बढ़ेगी, जिसका सीधा असर बाजार में बिकने वाले हर उत्पाद की कीमत पर पड़ेगा. इसका बोझ अंततः उपभोक्ताओं को ही उठाना पड़ेगा.

कांग्रेस ने बताया जनविरोधी कदमअजय राय ने भाजपा सरकार के इस फैसले को पूरी तरह जनविरोधी करार देते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी बिजली कर्मचारियों के आंदोलन के साथ मजबूती से खड़ी है. उन्होंने मांग की कि सरकार अविलंब इस निजीकरण प्रस्ताव को वापस ले और बिजली आपूर्ति को सस्ती व सुचारु बनाए रखने की दिशा में कदम उठाए.

बिजली निजीकरण का विरोध क्यों?बता दें कि यूपी में बिजली विभाग के निजीकरण को लेकर कई कर्मचारी संगठनों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है. कर्मचारी यूनियनों का कहना है कि यदि निजीकरण हुआ तो लाखों कर्मचारियों की नौकरी खतरे में पड़ जाएगी और आम जनता को महंगी बिजली झेलनी पड़ेगी. कई जिलों में हड़ताल और प्रदर्शन चल रहे हैं.

कांग्रेस का इतिहास भी बिजली हित मेंगौरतलब है कि कांग्रेस पार्टी पूर्व में भी सार्वजनिक संसाधनों के निजीकरण का विरोध करती रही है. पार्टी का मानना है कि बिजली, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे बुनियादी क्षेत्रों में सरकार की भागीदारी बनी रहनी चाहिए, ताकि गरीब और मध्यम वर्ग को राहत मिल सके.