उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच सीटों के बंटवारे की चर्चा शुरू हो गई है. जानकारी के मुताबिक कांग्रेस, सपा से 120 सीटों तक की डिमांड रख सकती है. वहीं सपा की कोशिश होगी कि वह 80 सीटों तक पर कांग्रेस को मना ले.
साल 2027 में प्रस्तावित विधानसभा चुनाव के लिए सपा और कांग्रेस इंडिया अलायंस के परचम तले साथ चुनाव लड़ेंगी. इससे पहले साल 2017 के चुनाव में भी सपा और कांग्रेस ने साथ इलेक्शन लड़ा था. साल 2017 के चुनाव में सपा ने कांग्रेस को 105 सीटें दी थीं. कई सीटों पर सपा और कांग्रेस ने एक दूसरे के खिलाफ भी चुनाव लड़ा था. वहीं साल 2022 के चुनाव में दोनों पार्टियों ने अलग-अलग चुनाव लड़ा था. उस चुनाव में कांग्रेस 2 सीटें जीती और सिर्फ 4 पर नंबर 2 पर थी.
साल 2017 के चुनाव में दोनों पार्टियों ने एक-दूसरे के खिलाफ 20 सीटों पर चुनाव लड़ा, जहां उम्मीदवारों ने अपना नाम वापस लेने से इनकार कर दिया था. कांग्रेस को इनमें से एक भी सीट नहीं मिली थी जबकि सपा ने दो सीटें जीतीं थीं, जिसमें अमेठी की गौरीगंज और रायबरेली की ऊंचाहार सीट शामिल हैं. बाकी सभी 18 सीटें भारतीय जनता पार्टी और उसके सहयोगी पार्टी अपना दल (सोनेलाल पटेल) के खाते में गईं थी.
UP Electricity: यूपी में महंगी नहीं होगी बिजली? 10 फीसदी फ्यूल सरचार्ज बढ़ोतरी को बताया गया गलत
2017 में इन सीटों पर जीती थी कांग्रेस
जिन 125 सीटों पर कांग्रेस चुनाव लड़ी थी उनमें से 7 पर उसे जीत हुई वहीं 50 सीटों पर वह नंबर दो पर रही. 2017 के चुनाव में जिन सात सीटों पर कांग्रेस जीती थी उसमें बेहट सीट से नरेश सैनी जीते थे. जिन्होंने बीजेपी के महावीर सिंह राणा को हराया. सहारनपुर सीट पर कांग्रेस के मसूद अख्तर विजयी रहे और उन्होंने बसपा के जगपाल सिंह को पराजित किया.
हरचंदपुर सीट से कांग्रेस के राकेश सिंह ने जीत दर्ज की और बीजेपी की कंचन लोधी को हराया था. रायबरेली सीट पर कांग्रेस की अदिति सिंह ने समाजवादी पार्टी के मोहम्मद शहबाज़ खान को शिकस्त दी थी. कानपुर कैंट सीट से कांग्रेस के सोहिल अख्तर अंसारी ने बीजेपी के राघवेंद्र मिश्रा को हराया था. रामपुर खास सीट पर कांग्रेस की आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने बीजेपी के नागेश प्रताप सिंह को पराजित किया था. वहीं, तमकुही राज सीट से कांग्रेस के अजय कुमार लल्लू विजयी रहे और उन्होंने बीजेपी के जगदीश मिश्रा को हराया था.
49 सीटों पर नंबर 2 रही कांग्रेस
वहीं 49 सीटों पर कांग्रेस नंबर 2 पर रही. इसमें नाकुड़, गंगोह, शामली, पुरकाजी (अनुसूचित जाति), बढ़ापुर, नेहटौर (अनुसूचित जाति), चंदौसी (अनुसूचित जाति), बिलासपुर, साहिबाबाद, हापुड़, मथुरा, बरेली, बरेली कैंट, बीसलपुर, तिलहर, पलिया, मोहम्मदी, संडी (अनुसूचित जाति), लखनऊ पूर्व, बछरावां (अनुसूचित जाति), सलोन (अनुसूचित जाति), जगदीशपुर (अनुसूचित जाति), गौरीगंज, गोविंदनगर, किदवई नगर, नरैनी (अनुसूचित जाति), मानिकपुर, हुसैनगंज, खागा (अनुसूचित जाति), विश्वनाथगंज, चायल, इलाहाबाद उत्तर, कोरांव (अनुसूचित जाति), जैदपुर (अनुसूचित जाति), नानपारा, बलरामपुर (अनुसूचित जाति), कैंपियरगंज, रुद्रपुर, जौनपुर, मड़िहान, वाराणसी उत्तर, वाराणसी दक्षिण, वाराणसी कैंट, मधुबन, गोरखपुर शहरी, फरेंदा, तुलसीपुर, महसी, राठ (अनुसूचित जाति) शामिल है.
वहीं साल 2022 के चुनाव की बात करें तो फरेंदा और रामपुर खास जीतने वाली कांग्रेस सिर्फ 4 सीटों पर नंबर 2 पर थी. इसमें मथुरा, खेरागढ़, किदवई नगर और मथुरा सीट शामिल थी.
मथुरा के मंदिर में महिलाओं को छेड़ रहा था युवक, फिर पैर छूकर मांगी माफी, पुलिस ने सिखाया सबक
चुनाव दर चुनाव गिरता गया ग्राफ
अब बात करते हैं बीते तीन चुनावों में कांग्रेस के ग्राफ की. उत्तर प्रदेश में कांग्रेस का ग्राफ पिछले तीन विधानसभा चुनावों में लगातार गिरता गया है. वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 28 सीटों पर जीत दर्ज की थी और उसका वोट शेयर 11.65 प्रतिशत रहा था. इसके बाद 2017 में समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन के बावजूद कांग्रेस का प्रदर्शन कमजोर रहा और पार्टी केवल 7 सीटें ही जीत सकी, जबकि उसका वोट शेयर घटकर 6.25 प्रतिशत रह गया.
वहीं साल 2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का प्रदर्शन और खराब हुआ तथा पार्टी महज 2 सीटों पर सिमट गई. इस चुनाव में कांग्रेस का वोट शेयर भी घटकर 2.33 प्रतिशत रह गया. यानी एक दशक के भीतर कांग्रेस की सीटों की संख्या 28 से घटकर 2 और वोट शेयर 11.65 प्रतिशत से घटकर 2.33 प्रतिशत पर आ गया.
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि साल 2017, साल 2022 के चुनाव के आधार पर कांग्रेस सीटों की डिमांड रखेगी या फॉर्मूला कुछ और होगा.
