वाराणसी के दो मंत्रियों की सीट पर कांटे का मुकाबला? विपक्ष पड़ सकता है भारी!
यूपी विधानसभा चुनाव में इस बार वाराणसी की शिवपुर विधानसभा और उत्तरी विधानसभा दो सीटों पर कांटे का मुकाबला देखने को मिल सकता है. इन दोनों सीटों के विधायक यूपी सरकार में मंत्री भी हैं.

यूपी चुनाव में अभी कुछ महीने शेष हैं इसी बीच पार्टी नेताओं का जनसंपर्क अभियान और अपनी सीट पर सियासी समीकरण बैठाने की कवायद तेज हो रही है. वाराणसी जनपद की आठ विधानसभा सीट में से दो ऐसी सीटें हैं जहां भाजपा विधायक प्रदेश सरकार में मंत्री हैं और यहां मुकाबला बेहद दिलचस्प बताया जा रहा है.
वाराणसी के उत्तरी विधानसभा सीट से मंत्री रविंद्र जायसवाल और शिवपुर विधानसभा से कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर की सीट पर कांटे का मुकाबला होने की संभावना है. विशेषज्ञों की माने तो उत्तरी विधानसभा सीट पर धार्मिक ध्रुवीकरण जबकि शिवपुर विधानसभा सीट पर जातीय समीकरण काफी ज्यादा प्रभावी रहा है.
आसान नहीं होगा मंत्रियों के लिए सीट बचाना
वरिष्ठ पत्रकार अशोक कुमार ने उत्तरी विधानसभा सीट और शिवपुर विधानसभा सीट को लेकर कहा कि शिवपुर और उत्तरी विधानसभा सीट पर यहां के विधायक लोगों से जुड़ने में कितना कामयाब हुए हैं यही परिणाम तय करेगा. लेकिन, निश्चित ही लोगों से मिलने वाली प्रतिक्रिया यह स्पष्ट दर्शाती है कि इस बार बीते डेढ़ दशक की तुलना में चुनावी माहौल अलग है और दोनों मंत्रियों के लिए चुनावी लड़ाई आसान नहीं होगी.
दावा तो यहां तक कर दिया कि अगर शिवपुर विधानसभा सीट पर अभी चुनाव होता है तो शायद मौजूदा विधायक के लिए परिणाम अनुकूल न हो. हालांकि उत्तरी में तीन बार से विधायक रहे रवींद्र जायसवाल उस लहर में भी जीते है जब 2012 में समाजवादी पार्टी की प्रचंड लहर थी लेकिन, इस बार उन्हें भी कड़ी चुनौती मिलने वाली है.
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पीएम मोदी के चेहरे पर हो सकता है फायदा
वरिष्ठ पत्रकार अरुण मिश्रा का शिवपुर और उत्तरी विधानसभा सीट के बारे में स्पष्ट मानना है कि बीते एक दशक से यहां पर वोट प्रधानमंत्री के कार्यों पर दिए जाते हैं, यानी किसी भी उम्मीदवार से ऊपर प्रधानमंत्री का कार्य देखा जाता है. अगर क्षेत्रीय विधायक से किसी बात को लेकर असंतोष होगा भी तो शायद प्रधानमंत्री द्वारा वाराणसी में हुए अनेक विकास कार्य मतदाताओं का भरोसा एक बार फिर जीता सकते हैं.
इन सबके बीच शहरी और ग्रामीण क्षेत्र की सबसे हॉट सीट शिवपुर और उत्तरी विधानसभा सीट बनी हुई है. राजनीतिक पंडितों का यह भी मानना है कि शिवपुर और उत्तरी विधानसभा सीट पर इंडिया गठबंधन के उम्मीदवार जो जातीय समीकरण साधने के अलावा क्षेत्र में प्रभावशाली व्यक्तित्व के साथ अगर मजबूत दावेदारी पेश करते हैं तो यहाँ बड़ा उलटफेर हो सकता है.
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