रुचि वीरा...कमाल अख्तर और अब आनंद भदौरिया! अखिलेश यादव के लिए सिरदर्द बन रहे हैं ये नेता?
UP News: यूपी चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी के अंदर मची गुटबाजी ने सपा मुखिया अखिलेश यादव की मुश्किलों के बढ़ा दिया है. पार्टी के नेताओं में आपसी टकराव अब खुलकर दिखाई दे रहा है.

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी के अंदर मची उठापटक और नेताओं के बीच असंतोष खुलकर सामने आने लगा है, जिससे पार्टी की राह बेहद मुश्किल होती दिखाई दे रही हैं. एक तरफ कांग्रेस से गठबंधन को लेकर हो रही बयानबाजी और दूसरी तरफ सपा के अपने ही चुनाव से पार्टी के मुश्किलें बढ़ाते दिख रहे हैं.
यूपी चुनाव से पहले सपा में घमासान तेज होता जा रहा है. मुरादाबाद से सपा सांसद रुचि वीरा और पूर्व सपा सांसद एसटी हसन के बीच तल्खी अभी शांत नहीं हो पाई हैं इस बीच सपा सांसद आनंद भदौरिया ये कहकर प्रदेश में सियासी हलचलें तेज कर दी है कि 2027 के चुनाव में सिफारिश से कोई टिकट नहीं मिलेगा. सपा अध्यक्ष ही ये तय करेंगे कि उम्मीदवार कौन होगा.
आनंद भदौरिया के बयान से बढ़ी सियासी हलचल
सपा सांसद आनंद भदौरिया ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर पोस्ट कर ये बात कही. उन्होंने कहा कि मैं साफ कहना चाहता हूं कि पार्टी उनके क्षेत्र की पांचों सीटों पर जिसे भी प्रत्याशी बनाएगी भले ही उसने हमारी खिलाफत की हों, मैं ईमानदारी से (क्योंकि कभी पार्टी के खिलाफ नहीं जा सकता) उसे जिताने का प्रयास करूंगा. जिसे भी टिकट चाहिए वो सीधे अखिलेश यादव जी से संपर्क करें. रही बात 2029 की तो मालिक की मर्जी के बग़ैर पत्ता नहीं हिलता.
आनंद भदौरिया के बयान से साफ है कि पार्टी के अंदर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है. उनसे पहले मुरादाबाद सांसद रुचि वीरा ने पीडीए कार्यक्रम में उन्हें नहीं बुलाए जाने पर तीखी नाराजगी जताई थी और सपा नेता एसटी हसन और विधायक कमाल अख़्तर के खिलाफ खुलकर विरोध जताया और कहा कि सपा मुखिया को ऐसे जयचंदों की पहचान कर कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए.
चुनाव से पहले अपनों ने बढ़ाई मुश्किल
ये मामला लखनऊ में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव तक भी पहुँच गया. सूत्रों के मानें तो रुचि वीरा और कांठ से सपा विधायक कमाल अख्तर इस दौरान सपा मुखिया के सामने ही भिड़ गए. जिसके बाद कमाल अख़्तर ने विधानमंडल के मुख्य सचेतक के पद से इस्तीफा दे दिया. अखिलेश यादव ने कमाल अख्तर को उस समय मुख्य सचेतक बनाया था जब मनोज पांडेय बागी होकर बीजेपी के साथ चले गए थे.
समाजवादी पार्टी इन दिनों मिशन 2027 में जुटी हुई हैं. सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव 'पीडीए' (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) फॉर्मूले के ज़रिए अपने जनाधार को बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं. ऐसे में पार्टी नेताओं के बीच की गुटबाजी से आगामी चुनाव की तैयारियों पर असर पड़ सकता है. अगर इसी तरह आपसी मतभेद खुलकर सामने आए तो पार्टी के लिए मुश्किलें खड़ी होना तय है.
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