उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी के भीतर यह सवाल है कि अगर तीसरी बार सरकार बनती है तो सीएम कौन होगा? उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के बीते दिनों ने एक बयान ने हलचल मचा दी थी. अब उन्होंने लगभग सफाई की मुद्रा में एक और बयान दिया है. 

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दरअसल, ये सवालिया दौर उस वक्त शुरू हुआ जब एबीपी न्यूज़ के विशेष कार्यक्रम चर्चा विथ चित्रा में वरिष्ठ पत्रकार और एंकर चित्रा त्रिपाठी के सवालों का जवाब देते हुए मौर्य ने कहा था कि मैं भी सीएम बनना चाहता हूं लेकिन यह मेरे चाहने से नहीं होगा.

मौर्य के इस बयान के बाद विपक्षी दल समाजवादी पार्टी और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने दावा किया था कि बीजेपी के भीतर ही कलह चल रही है.

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'जैसे मेरे मन में कोई महत्वाकांक्षा है...'

एबीपी न्यूज़ को दिए साक्षात्कार का जिक्र करते हुए मौर्य ने कहा कि मैंने कहा हमारी पार्टी में यह कोई नहीं तय करता है कि कौन कब तक क्या रहेगा. मैंने कहा ऐसा नहीं कि मेरे मन में यह नहीं है कि मैं उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनू. मैं बनना चाहता हूं. लेकिन यह मैं नहीं तय कर सकता. मेरे पार्टी का नेतृत्व तय करेगा. मेरे आने वाले 2027 में चुने हुए विधायक आए हुए वहां केंद्रीय पर्यवेक्षक,  जो विधायकों की राय होगी उससे तय होगा. लेकिन उसको इतना हवा देने का काम किया गया कि जैसे मेरे मन में कोई महत्वाकांक्षा है.

उप मुख्यमंत्री ने कहा- हम सीएम योगी के साथ मिलकर के 2017 से सरकार का काम कर रहे हैं. जनता की सेवा कर रहे हैं.  हमारे और सीएम योगी के बीच में कोई दीवार खड़ी करने की जरूर कोशिश लोग करते हैं.  अगर दीवार होती तो मैं उनका उपमुख्यमंत्री नहीं होता या तो वो मेरे मुख्यमंत्री नहीं होते. दो ही बातें होतीं. तो मैं तो साथ-साथ काम कर रहा हूं तो हमारे और उनके बीच में कोई भेदभाव नहीं है.