Aligarh News: दादा और पिता रहे सांसद, अब बेटे को BJP ने बनाया मंत्री, जानें कौन हैं सुरेंद्र दिलेर?
UP Cabinet Expansion: यूपी सरकार का मंत्रिमंडल विस्तार हो चुका है. इस बीच अलीगढ़ की खैर विधानसभा से विधायक सुरेंद्र दिलेर को राज्यमंत्री बनाया गया है. मंत्री बनने पर दिलेर के घर पर प्रशंसक मौजूद हैं.

अलीगढ़ की राजनीति में युवा धुरंधर की एंट्री हो चुकी है. इस बार यूपी सरकार के द्वारा सुरेंद्र दिलेर को राज्य का मंत्री बनाया है, जिसके बाद अलीगढ़ की राजनीति में मंत्रियों की संख्या बढ़ चुकी है. जहां पहले तीन मंत्री अलीगढ़ के हुआ करते थे, लेकिन अब चौथा नाम सुरेंद्र दिलेर का जुड़ चुका है.
दअरसल अलीगढ़ के विधानसभा खैर से भारतीय जनता पार्टी के विधायक सुरेंद्र दिलेर को यूपी सरकार ने राज्यमंत्री बनाया है. सुरेंद्र दिलेर के दादा किशन लाल दिलेर 4 बार के सांसद और 6 बार के विधायक रह चुके हैं तो वहीं भारतीय जनता पार्टी से सुरेंद्र दिलेर के पिता राजवीर दिलेर एक बार सांसद और एक बार विधायक रह चुके है.
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दादा और पिता की बादशाहत बरकरार
दादा और पिता की बादशाहत को बरकरार रखने के लिए यूपी सरकार ने दिलेर परिवार की तीसरी पीढ़ी को राजनीति में पहले जगह देकर विधायक बनाया और अब राज्य का मंत्री बनाया है. अलीगढ़ के खैर विधानसभा से उपचुनाव में सुरेंद्र दिलेर पर बीजेपी ने भरोसा जताया था.
जिसके बाद सुरेंद्र दिलेर के द्वारा खैर विधानसभा में दादा और पिता की तरह जनता को स्नेह और क्षेत्र मे विकास करने की बात कही तो जनता के द्वारा जीत की खुशियां सुरेंद्र दिलेर के झोली में रख दी सुरेंद्र दिलेर बीजेपी के युवा विधायकों में गिने जाते हैं.
हार्ट अटैक से गई थी पिता की जान
वहीं अगर भारतीय जनता पार्टी के द्वारा टिकट देने के पीछे के आंकड़ों की अगर बात की जाए तो भारतीय जनता पार्टी द्वारा 2024 के लोकसभा चुनाव में अन्य पूर्व के सांसदों को टिकट दी गई थी, लेकिन भारतीय जनता पार्टी के द्वारा स्व. सांसद राजवीर दिलेर को 2024 के लोकसभा चुनाव में लोकसभा हाथरस से टिकट नहीं दी गई जिसके चलते राजवीर दिलेर की हार्ट अटैक के कारण मौत हो गई.
राजनीतिकारों की मानें तो तभी से भारतीय जनता पार्टी के यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के द्वारा राजवीर सिंह दिलेर के पुत्र को आगे लाकर उसे राजनीतिक गलियारों में नई पहचान देने का वादा किया था.
राजनीतिकारों की मानें तो दिलेर परिवार की बादशाहत और दिलेर परिवार को लगातार मिल रहे जनता के प्यार को देखकर भारतीय जनता पार्टी के द्वारा सुरेंद्र दिलेर को पहले विधायक बनाया अब राज्य का मंत्री बनाया है.
अलीगढ़ की खैर विधानसभा से हैं विधायक
विधानसभा खैर की अगर बात की जाए तो आजादी के बाद 1957 में अस्तित्व में आई टप्पल और अब खैर विधानसभा सीट पर जाट बहुल होने के कारण चौधरियों का कब्जा रहा है. इसी वजह से इसे जिले का दूसरा जाटलैंड भी कहा जाता है. लेकिन बसपा के सोशल इंजीनियरिंग फार्मूले ने चौधराहट पर ब्रेक लगाया और 2002 में बसपा के टिकट पर चुनाव लड़े ब्राह्मण नेता प्रमोद गौड़ ने जीत दर्ज की.
हालांकि, 2007 में रालोद के चौ. सत्यपाल सिंह के सामने वे चुनाव हार गए. अनुसूचित जाति के लिए सीट आरक्षित होने के बाद से दो बार से अनुसूचित जाति के विधायक जीतकर विधानसभा पहुंच चुके हैं.स्वतंत्रता संग्राम सेनानी मोहनलाल गौतम यहां से विधायक थे.
1957 में इसे अलग टप्पल सीट का दर्जा मिला और टप्पल क्षेत्र के गांव मालव के रहने वाले कांग्रेस नेता के चौ. देवदत्त सिंह विधयक बने. अगले चुनाव में उन्हें क्षेत्र के गांव खेड़ा किशनगढ़ के दूसरे जाट नेता चौ. महेंद्र सिंह ने निर्दल चुनाव लड़कर हरा दिया.
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इस सीट पर इनके बीच रही वर्चस्व की जंग
इसके बाद इस सीट पर चौ. महेंद्र सिंह व स्यारौल के जाट नेता चौ. प्यारेलाल में वर्चस्व की जंग होती रही. 1967 में प्यारेलाल कांग्रेस से, 1969 में महेंद्र सिंह बीकेडी से, फिर 1974 में प्यारेलाल कांग्रेस से और अगली बार जेएनपी से चुनाव जीते. प्यारेलाल के पार्टी छोड़ जाने के कारण 1980 में कांग्रेस ने शिवराज सिंह को टिकट दिया और वे चुनाव जीते.
1985 में चौ.चरण सिंह ने इलाके के उभरते नेता जगवीर सिंह को लोकदल से चुनाव लड़ाया और उन्होंने जीत दर्ज की. दूसरी बार वह जनता दल से चुनाव जीते. इसके बाद बीजेपी से महेंद्र सिंह ने 1991 में पहली बार जीत दर्ज की. मगर 1993 में जगवीर सिंह ने जनता दल से सीट कब्जाई.
1996 में बीजेपी ने चौ.चरण सिंह की बेटी ज्ञानवती को चुनाव लड़ाया और वे जीतीं. इसके बाद बसपा से प्रमोद गौड़, फिर रालोद से सत्यपाल सिंह, उसके बाद भगवती प्रसाद सूर्यवंशी व अनूप प्रधान के बाद सुरेंद्र दिलेर बीजेपी से विधायक हैं.
कौन कब-कब रहा है इस सीट पर विधायक?
- इस सीट पर 1974 व 1977 में चौ.प्यारेलाल व 1985 व 1989 में जगवीर सिंह दोबारा विधायक बने हैं. इसके अलावा किसी विधायक को दूसरी बार जीत का स्वाद नहीं मिला है.
- 1952 में कांग्रेस से मोहनलाल गौतम (टप्पल, खैर, चंडौस, जवां संयुक्त विधानसभा क्षेत्र)
- 1957 में कांग्रेस से चौ. देवदत्त सिंह (टप्पल विधानसभा क्षेत्र बना)
- 1962 में निर्दलीय चौ. महेंद्र सिंह
- 1967 में कांग्रेस से चौ. प्यारेलाल (खैर विधानसभा क्षेत्र बना) 1969 में भारतीय क्रांति दल से चौ. महेंद्र सिंह 1974 में कांग्रेस से चौ. प्यारेलाल
- 1977 में जेएनपी से चौ. प्यारेलाल
- 1980 में कांग्रेस से चौ. शिवराज सिंह
- 1985 में लोकदल से चौ. जगवीर सिंह
- 1989 में जनता दल से चौ. जगवीर सिंह
- 1991 में बीजेपी से चौ. महेंद्र सिंह
- 1993 में जनता दल से चौ. जगवीर सिंह
- 1996 में बीजेपी से ज्ञानवती सिंह पुत्री चौ. चरण सिंह2002 में बसपा से प्रमोद गौड़
- 2007 में रालोद से चौ. सत्यपाल सिंह
- 2012 में रालोद से भगवती प्रसाद सूर्यवंशी
- 2017 में बीजेपी से अनूप प्रधान मौजूदा विधायक व राजस्व मंत्री हैं, लेकिन अब लोकसभा हाथरस के सांसद बनने के बाद विधानसभा खैर में सुरेंद्र दिलेर विधायक हैं. जिनको अब
- उत्तर प्रदेश सरकार के द्वारा राज्य का मंत्री बनाया है, जिसको लेकर उनके समर्थकों में खुशी की लहर है.
सुरेंद्र दिलेर के मंत्री बनने पर क्या बोलीं मां?
पूरे मामले पर जब सुरेंद्र दिलेर की माता रजनी दिलेर से बातचीत की तो उनके द्वारा बताया गया उत्तर प्रदेश सरकार वह भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेत्रत्व के द्वारा मेरे बेटे पर जो भरोसा जताया है. मेरा बेटा उस पर कायम रहेगा और निश्चित तौर पर समाज और पार्टी के द्वारा बताए गए कर्तव्यों का पालन करेगा.
फिलहाल चर्चाओं का बाजार गर्म है. अलीगढ़ की राजनीति में एक नया धुरंधर कदम रख चुका है, जिसका नाम सुरेंद्र दिलेर है. अब से पहले की अगर बात की जाए तो विधानसभा अतरौली से विधायक बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह व बरौली विधानसभा से ठाकुर जयवीर सिंह राज्य मंत्री व दर्जा प्राप्त राज्य मंत्री ठाकुर रघुराज सिंह के बाद अब एक नया नाम सुरेंद्र दिलेर का जुड़ चुका है.
सुबह से आवास पर लगा रहा तांता
शुभचिंतक बताते हैं जब सुरेंद्र दिलेर के मंत्री बनने की अटकले तेज हुई तो सुबह से ही उनके आवास पर उनके शुभचिंतकों का तांता लग गया. इस दौरान सभी के द्वारा उनके परिवारिजनों का फूल माला के साथ स्वागत किया गया. सुरेंद्र दिलेर लखनऊ जा चुके थे, लेकिन उनके प्रशंसक आवास छोड़ने को तैयार नहीं हैं. अब भी सुरेंद्र दिलेर के स्वागत के लिए उनके प्रशंसक आवास के बाहर डेरा जमाए हुए बैठे हैं.
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