यूपी कैबिनेट में विस्तार के बाद अब तक क्यों नहीं हुआ विभागों का बंटवारा? ये है वजह!
यूपी में 5 दिन का वक्त बीत जाने के बावजूद विभागों का बंटवारा न हो अपने को लेकर के तमाम अटकलें हैं. हालांकि उम्मीद जताई जा रही है कि सीएम के दिल्ली से लौटने के बाद बंटवारे पर अंतिम फैसला हो जाएगा

उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार के हालिया मंत्रिमंडल विस्तार को पांच दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब तक नए मंत्रियों के विभागों का बंटवारा नहीं हो पाया है. मंत्रिमंडल विस्तार में कुल आठ नेताओं को जगह दी गई थी, जिनमें दो कैबिनेट मंत्री, दो स्वतंत्र प्रभार राज्य मंत्री और चार नए राज्य मंत्री शामिल हैं.
मंत्रिमंडल विस्तार में पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी और मनोज पांडेय को कैबिनेट मंत्री बनाया गया है. वहीं अजीत पाल सिंह और सोमेंद्र तोमर को प्रमोट कर स्वतंत्र प्रभार राज्य मंत्री का दर्जा दिया गया है. इसके अलावा कृष्णा पासवान, सुरेंद्र दिलेर, हंसराज विश्वकर्मा और कैलाश सिंह राजपूत को राज्य मंत्री के रूप में शामिल किया गया है.
सूत्रों के मुताबिक अब सबसे ज्यादा माथापच्ची इन्हीं मंत्रियों के विभागों को लेकर चल रही है. खास तौर पर दो नए कैबिनेट मंत्री और दो स्वतंत्र प्रभार मंत्रियों के विभाग तय करने में सरकार और संगठन स्तर पर लगातार मंथन जारी है. कई मौजूदा विभागों में फेरबदल और राजनीतिक-सामाजिक समीकरणों को साधने की कवायद के चलते फैसला लंबा खिंच रहा है.
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विधानसभा चुनाव की रणनीति को ध्यान में
5 दिन का वक्त बीत जाने के बावजूद विभागों का बंटवारा न हो अपने को लेकर के तमाम अटकलें हैं. इस बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दिल्ली के दौरे पर भी गए हुए हैं जहां उनकी केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात हुई है. माना यह जा रहा है कि मुख्यमंत्री जिन विभागों को देने को तैयार है उन विभागों पर केंद्रीय नेतृत्व की सहमति नहीं बनी है इसी कारण यह बंटवारा इतना लंबा खींच रहा है .हालांकि उम्मीद इस बात की जताई जा रही है कि मुख्यमंत्री के दिल्ली से लौटने के बाद बंटवारे पर अंतिम फैसला हो जाएगा
उम्मीद जताई जा रही विभागों के बंटवारे में क्षेत्रीय संतुलन, जातीय समीकरण और 2027 विधानसभा चुनाव की रणनीति को ध्यान में रखा जा रहा है.
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हालांकि राजनीतिक गलियारों में इस बात को लेकर चर्चाएं तेज हैं कि किन नेताओं को अहम जिम्मेदारियां मिलेंगी और किन विभागों में बदलाव होगा. अब सभी की नजरें मुख्यमंत्री कार्यालय से होने वाली आधिकारिक घोषणा पर टिकी हैं.

























