यूपी में मंत्रिमंडल विस्तार के 5 दिन बीते, अब तक विभागों का बंटवारा नहीं, इन नेताओं के पोर्टफोलियो में होगी कटौती!
UP Politics: मंत्रिमंडल विस्तार के 5 दिन बाद भी नए मंत्रियों को विभाग नहीं मिले हैं. इसे लेकर विपक्ष सरकार पर निशाना साध रहा है, जबकि बीजेपी का कहना है कि जल्द ही विभागों का बंटवारा कर दिया जाएगा.

उत्तर प्रदेश में 10 मई को दोपहर 3:30 बजे हुए मंत्रिमंडल विस्तार के पांच दिन बीत जाने के बाद भी नए मंत्रियों को अब तक विभाग नहीं दिए गए हैं. इसको लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है. मंत्रिमंडल विस्तार में 6 नए मंत्रियों को शामिल किया गया था, जबकि 2 मंत्रियों का प्रमोशन किया गया था. इस बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिल्ली में गृह मंत्री अमित शाह और बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात भी की है, जिसके बाद विभागों के बंटवारे को लेकर अटकलें और तेज हो गई हैं.
बीजेपी नेता हरीश श्रीवास्तव ने कहा कि विपक्ष को पहले अपने अंदर सामंजस्य स्थापित करने की जरूरत है. जिस विपक्ष को पूरी जनता ने खारिज कर दिया, वहां न तो नेताओं में तालमेल बचा है और न ही कार्यकर्ताओं में.
उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी पूरी मजबूती के साथ काम कर रही है. सीएम ने मंत्रिमंडल का विस्तार किया है और समयानुसार सभी माननीय मंत्रियों को विभाग भी सौंप दिए जाएंगे. जल्द ही विभागों का बंटवारा कर दिया जाएगा.
उन्होंने कहा कि सभी मंत्री जनता के हित में लगातार काम कर रहे हैं. प्रदेश सरकार जनता की समृद्धि और खुशहाली के लिए प्रतिबद्ध है. जनता जनार्दन का आशीर्वाद भारतीय जनता पार्टी के साथ है और पार्टी का नेतृत्व प्रदेश के विकास और लोगों की खुशहाली के लिए लगातार कार्य कर रहा है.
सपा ने साधा निशाना
वहीं सपा प्रवक्ता मनोज काका ने कहा, 'यूपी के मंत्रिमंडल का विस्तार हुए 5 दिन हो गए और आज उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री जी तलब किए गए हैं या दिल्ली में बुलाए गए. उत्तर प्रदेश की जनता यह जान ले कि दिल्ली तो दिल्ली वाले चला ही रहे हैं, यूपी भी दिल्ली वाले ही चला रहे हैं. मुख्यमंत्री जी की बिल्कुल नहीं चल रही है. 5 दिन हो गए, अगर मुख्यमंत्री की चलती तो अब तक विभागों का बंटवारा हो गया होता, क्योंकि मुख्यमंत्री का अपना विशेषाधिकार होता है.'
राजनीतिक विश्लेषक योगेश मिश्रा ने कहा कि मंत्रिमंडल विस्तार में दो कैबिनेट मंत्री और दो स्वतंत्र प्रभार मंत्री बनाए गए हैं, लेकिन विभागों के बंटवारे को लेकर सरकार के सामने चुनौती बनी हुई है.
उन्होंने कहा कि फिलहाल जिन विभागों में फेरबदल की संभावना जताई जा रही है, उनमें कुछ विभाग मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और मंत्री ए.के. शर्मा के पास हैं. यदि ब्रजेश पाठक और ए.के. शर्मा एक-एक विभाग छोड़ भी दें, तब भी सभी नए मंत्रियों को विभाग देना आसान नहीं होगा. ऐसे में साफ संकेत हैं कि कुछ विभाग मुख्यमंत्री के पास से भी जाने पड़ सकते हैं.
किन नेताओं के विभागों में होगी कटौती?
योगेश मिश्रा ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पास खाद्य एवं रसद विभाग को छोड़कर ज्यादातर महत्वपूर्ण विभाग हैं और वह सभी विभागों में व्यक्तिगत रुचि लेकर काम करते हैं. वहीं पीडब्ल्यूडी विभाग को लेकर भी चर्चा है. हालांकि यह विभाग जितिन प्रसाद के पास रहा है, लेकिन इसमें सड़क, टेंडर और बड़े प्रोजेक्ट्स जैसे अहम काम होने के कारण सरकार की विशेष रुचि रहती है.
उन्होंने कहा कि अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर कौन-कौन से विभाग छोड़े जाएंगे. क्या मुख्यमंत्री अपने पास से विभाग देंगे या फिर ब्रजेश पाठक अथवा ए.के. शर्मा के विभागों में कटौती होगी. खास तौर पर ब्राह्मण नाराजगी की चर्चाओं के बीच ब्रजेश पाठक के विभाग कम करना राजनीतिक रूप से आसान नहीं माना जा रहा. वहीं ए.के. शर्मा को दिल्ली नेतृत्व के करीबी नेताओं में गिना जाता है, इसलिए उनके कद में भी कटौती आसान नहीं दिखती.
योगेश मिश्रा ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दिल्ली में हो रही बैठकों में इस मुद्दे पर गंभीर मंथन चल रहा है और जल्द ही कोई समाधान निकाला जा सकता है. उनका मानना है कि विभागों का बंटवारा एक-दो दिन के भीतर तय हो जाएगा, लेकिन फिलहाल इसे लेकर राजनीतिक गलियारों में बहस तेज है.

























