मायावती, अखिलेश और योगी… 2007 से 2026 के बीच चुनावों से पहले कितना सफल रहा कैबिनेट विस्तार?
UP Politics: उत्तर प्रदेश में वर्ष 2007 से 2026 तक कुल 12 अहम कैबिनेट विस्तार हुए. इनमें से कुछ कैबिनेट विस्तार विधानसभा चुनाव या लोकसभा चुनावों के आसपास हुए.

- 2027 चुनाव पूर्व हालिया कैबिनेट विस्तार हुआ.
उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी सरकार में कैबिनेट विस्तार हुआ है. साल 2022 में दूसरी बार चुनाव जीतकर आने के बाद बीते दिनों राज्य सरकार में दूसरा कैबिनेट विस्तार किया गया है. इससे पहले साल 2024 के आम चुनावों से ठीक पहले विस्तार हुआ था. कैबिनेट विस्तारों का सीधा मतलब अगले चुनाव से पहले सियासी और जातीय समीकरण फिट करना माना जाता है.
हालांकि असलियत में यह जमीन पर कितना सटीक बैठता है इसका आंकलन चुनाव के परिणामों के जरिए ही किया जा सकता है. आज हम साल 2007 से साल 2026 के दौरान बहुजन समाज पार्टी, समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी की अलग-अलग समयावधि में रही सरकारों में विस्तार की बात करेंगे जो चुनावों से ठीक पहले हुए.
साल 2007 से साल 2026 तक कुल 12 बड़े फेरबदल हुए. जिसमें से मायावती सरकार में 5, अखिलेश यादव के कार्यकाल में 3 और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दो कार्यकाल यानी 10 साल में 4 विस्तार हुए.
2007 - मायावती सरकार
साल 2007 में सरकार गठन के बाद मायावती सरकार में साल 2007, साल 2008, साल 2009 और साल 2011 में कई चरणों में कैबिनेट विस्तार और फेरबदल हुए. इस दौरान बाबू सिंह कुशवाहा, नकुल दुबे, लालजी वर्मा, रामवीर उपाध्याय और नसीमुद्दीन सिद्दीकी जैसे नेताओं को अहम जिम्मेदारियां मिलीं. भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद बाबू सिंह कुशवाहा समेत कई मंत्रियों को हटाया गया. साल 2011 में चुनाव से पहले सामाजिक समीकरणों को साधने के लिए नए चेहरों को शामिल किया गया और कई विभागों का बंटवारा हुआ.
पहला विस्तार मई 2007 में सरकार गठन के कुछ दिनों बाद हुआ, जब सतीश चंद्र मिश्रा को कैबिनेट में शामिल किया गया. राम अचल राजभर को प्रमोट किया गया और आनंद सेन यादव को मंत्री बनाया गया.
इसके बाद अक्टूबर 2007 में दूसरा बड़ा विस्तार हुआ. इसमें नंद गोपाल गुप्ता ‘नंदी’, के.के. गौतम, चंद्रदेव राम यादव और अशोक कुमार को कैबिनेट मंत्री बनाया गया. भगवती सागर और जयवीर सिंह को राज्य मंत्री बनाया गया. वहीं रंगनाथ मिश्रा, अनंत मिश्रा, बादशाह सिंह और अब्दुल मन्नान को प्रमोशन दिया गया.
फिर साल 2008 की जनवरी में हुए विस्तार में ओमवती, फागू चौहान, नरेंद्र सिंह गौर, विनोद सिंह और संग्राम सिंह वर्मा समेत कई नेताओं को मंत्री बनाया गया. कुछ राज्य मंत्रियों को प्रमोट कर कैबिनेट रैंक दी गई.
इसके बाद साल 2009 के नंवबर में के विस्तार में इस दौरान बाबू सिंह कुशवाहा का कद और बढ़ाया गया और उन्हें अहम जिम्मेदारियां दी गईं. नकुल दुबे, लालजी वर्मा, रामवीर उपाध्याय और नसीमुद्दीन सिद्दीकी जैसे वरिष्ठ नेताओं की भूमिका भी मजबूत हुई.
इसके बाद साल 2011 में मायावती सरकार में कई मंत्रियों से विभाग वापस लिए गए थे और कई को मंत्रिमंडल से बाहर भी किया गया था.
सबसे बड़ा मामला बाबू सिंह कुशवाहा का था. उनसे परिवार कल्याण, खनन, सहकारिता, संस्थागत वित्त और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे अहम विभाग वापस लिए गए. NRHM के कथित घोटाले और सीएमओ हत्याकांड के बाद उन्हें पहले इस्तीफा देना पड़ा और बाद में पार्टी से भी निकाल दिया गया.
स्वास्थ्य मंत्री अनंत कुमार मिश्रा से भी स्वास्थ्य विभाग वापस लिया गया और उन्हें इस्तीफा देना पड़ा.
अक्टूबर 2011 में रंगनाथ मिश्रा से माध्यमिक शिक्षा विभाग वापस लिया गया और भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते उन्हें मंत्रिमंडल से हटा दिया गया. इसी दौरान बादशाह सिंह से श्रम विभाग वापस लेकर उन्हें भी काबीना से बाहर कर दिया गया.
दिसंबर 2011 में फतेह बहादुर सिंह, सदल प्रसाद, अनीस अहमद उर्फ फूल बाबू और शाहजिल इस्लाम अंसारी को भी मंत्रिमंडल से हटाया गया. इनमें कई नेताओं पर लोकायुक्त जांच और भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे.
इन विस्तारों में इकलौता विस्तार साल 2011 का था जिसके बाद राज्य में कोई बड़ा चुनाव हुआ था. 2012 के विधानसभा चुनावों में बहुजन समाज पार्टी चुनाव हार गई. 403 सदस्यों वाली विधानसभा में बसपा को सिर्फ 80 सीटें मिलीं और समाजवादी पार्टी 224 सीटों के साथ सरकार आई और अखिलेश यादव मुख्यमंत्री बने.
2012- अखिलेश यादव सरकार
15 मार्च 2012 को अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. शुरुआती मंत्रिमंडल में आजम खान, शिवपाल सिंह यादव, अहमद हसन, रघुराज प्रताप सिंह 'राजा भैया', बलराम यादव और अवधेश प्रसाद जैसे वरिष्ठ नेताओं को शामिल किया गया.
फरवरी 2013 में अखिलेश सरकार का पहला बड़ा कैबिनेट विस्तार हुआ. इसमें मनोज पांडेय, विनोद कुमार सिंह ‘पंडित सिंह’, गायत्री प्रसाद प्रजापति, राजेंद्र चौधरी, राममूर्ति वर्मा, पवन पांडेय, विजय मिश्रा और आलोक शाक्य समेत कई नेताओं को मंत्री बनाया गया. इसी दौरान कुछ राज्य मंत्रियों को प्रमोट किया गया.
मार्च 2013 में कुंडा के तत्कालीन डीएसपी जिया-उल-हक हत्याकांड के बाद राजा भैया ने मंत्री पद से इस्तीफा दिया. बाद में जांच के बाद अक्टूबर 2013 में उनकी मंत्रिमंडल में वापसी हुई और उन्हें फिर कैबिनेट मंत्री बनाया गया.
जुलाई 2013 में दूसरा बड़ा विस्तार और फेरबदल हुआ. नारद राय, कैलाश चौरसिया, राममूर्ति वर्मा और शंखलाल मांझी जैसे नेताओं को मंत्रिमंडल में शामिल या प्रमोट किया गया. कई मंत्रियों के विभाग भी बदले गए. 2014 के आम चुनावों से पहले यह अहम विस्तार था. 2014 के आम चुनाव में सपा को सिर्फ 5 सीटें मिलीं थीं.
साल 2014 में संपन्न हुए लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के खराब प्रदर्शन के बाद सरकार में बड़ा फेरबदल किया गया. कुछ मंत्रियों से विभाग वापस लिए गए और कई के विभाग बदल दिए गए. आजम खान से कुछ समय के लिए महत्वपूर्ण विभाग वापस लिए गए थे.
साल 2015 में अखिलेश यादव ने राजनीतिक संतुलन साधने के लिए कई विभागों का बंटवारा किया.इसी दौरान शिवपाल सिंह यादव और अखिलेश खेमे के बीच तनाव खुलकर सामने आने लगा. इसी दौरान कुछ युवा नेताओं को संगठन और सरकार में अहम जिम्मेदारी दी गई.
सितंबर 2016 में समाजवादी परिवार का विवाद खुलकर सामने आया. अखिलेश यादव ने शिवपाल सिंह यादव से लोक निर्माण विभाग यानी PWD समेत कई अहम विभाग वापस ले लिए. इसके जवाब में शिवपाल ने संगठन स्तर पर अखिलेश समर्थकों पर कार्रवाई की. बाद में सपा संस्थापक दिवंगत मुलायम सिंह यादव के हस्तक्षेप से समझौता हुआ और कुछ विभाग वापस किए गए.
अक्टूबर 2016 में अखिलेश यादव ने बड़ा कैबिनेट फेरबदल किया. गायत्री प्रसाद प्रजापति को वापस मंत्रिमंडल में शामिल किया गया. कई मंत्रियों के विभाग बदले गए और कुछ को हटाया गया.
साल 2016 के अंत तक अखिलेश बनाम शिवपाल संघर्ष चरम पर पहुंच गया. मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कुछ मंत्रियों को बर्खास्त किया, जबकि संगठन में भी बड़े बदलाव हुए. इसके बाद जब चुनाव हुए तो समाजवादी पार्टी बुरी तरह चुनाव हार गई और विधायकों की संख्या 50 से भी घट गई और भारतीय जनता पार्टी ने 300 से ज्यादा सीटों के साथ प्रचंड बहुमत हासिल किया.
2017 - योगी आदित्यनाथ सरकार
19 मार्च 2017 को योगी आदित्यनाथ ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. शुरुआती मंत्रिमंडल में केशव प्रसाद मौर्य और दिनेश शर्मा को उपमुख्यमंत्री बनाया गया. रीता बहुगुणा जोशी, सिद्धार्थनाथ सिंह, श्रीकांत शर्मा, सुरेश खन्ना, स्वामी प्रसाद मौर्य, ब्रजेश पाठक, आशुतोष टंडन, धर्मपाल सिंह, लक्ष्मी नारायण चौधरी और चेतन चौहान जैसे नेताओं को कैबिनेट में जगह मिली.
अगस्त 2019 में पहली योगी सरकार का पहला बड़ा कैबिनेट विस्तार हुआ. करीब 23 मंत्रियों को शपथ दिलाई गई. राम नरेश अग्निहोत्री और कमल रानी वरुण को कैबिनेट मंत्री बनाया गया. नीलकंठ तिवारी, महेंद्र सिंह, उपेंद्र तिवारी, अनिल राजभर, भूपेंद्र चौधरी, कपिल देव अग्रवाल और स्वतंत्र देव सिंह जैसे नेताओं की एंट्री या प्रमोशन हुआ.
साल 2020 में चेतन चौहान और कमल रानी वरुण के निधन के बाद मंत्रिमंडल में जगह बनी. जिसके बाद विभागों का बंटवारा किया गया.
जुलाई 2021 में विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा कैबिनेट विस्तार और फेरबदल हुआ. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के बीजेपी में आए जितिन प्रसाद को कैबिनेट मंत्री बनाया गया. पलटूराम, धर्मवीर प्रजापति, संगीता बलवंत, छत्रपाल सिंह गंगवार और संजीव कुमार जैसे नेताओं को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया.
साल 2021 के अंत और साल 2022 चुनाव से पहले कई बड़े नेताओं ने सरकार का साथ छोड़ दिया. स्वामी प्रसाद मौर्य ने मंत्री पद से इस्तीफा दिया. उनके साथ दारा सिंह चौहान और धर्म सिंह सैनी ने भी सरकार छोड़ी. इसके अलावा कुछ अन्य विधायकों और मंत्रियों ने भी बीजेपी का साथ छोड़कर समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया. जिसके बाद विभागों का बंटवारा फिर हुआ.
वर्ष 2022 में विधानसभा चुनाव से पहले जुलाई 2021 में ही अहम विस्तार हुआ था. 2022 के चुनाव के परिणामों में बीजेपी ने सरकार तो बनाई लेकिन उसकी सीटें घट गईं. 2017 में 312 सीटें जीतकर आई बीजेपी 2022 में 255 सीटें जीत सकी. वहीं सपा का आंकड़ा 111 तक पहुंच गया.
2022- योगी आदित्यनाथ की सरकार दूसरी बार
25 मार्च 2022 को योगी आदित्यनाथ ने लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. इस बार के मंत्रिमंडल में बड़ा बदलाव किया गया. केशव प्रसाद मौर्य को फिर उपमुख्यमंत्री बनाया गया, जबकि डॉ. दिनेश शर्मा की जगह ब्रजेश पाठक को दूसरा उपमुख्यमंत्री बनाया गया.
शुरुआती मंत्रिमंडल में सुरेश खन्ना, सूर्य प्रताप शाही, स्वतंत्र देव सिंह, बेबी रानी मौर्य, धर्मपाल सिंह, नंद गोपाल गुप्ता ‘नंदी’, भूपेंद्र सिंह चौधरी, अनिल राजभर, आशीष पटेल, संजय निषाद, जितिन प्रसाद और दयाशंकर सिंह जैसे नेताओं को शामिल किया गया.
इस गठन में पिछली सरकार के कई बड़े चेहरे बाहर हो गए. डॉ. दिनेश शर्मा, सिद्धार्थनाथ सिंह, श्रीकांत शर्मा, आशुतोष टंडन, जय प्रताप सिंह, नीलकंठ तिवारी और सतीश महाना को मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली.
साल 2022 के बाद सरकार में कई बार विभागों का बंटवारा हुआ. केशव प्रसाद मौर्य, ब्रजेश पाठक, स्वतंत्र देव सिंह और अन्य वरिष्ठ मंत्रियों के विभागों में बदलाव किए गए.
2024 में लोकसभा चुनाव के पहले मार्च 2024 में योगी आदित्यनाथ की दूसरी सरकार का पहला कैबिनेट विस्तार हुआ. 5 मार्च 2024 को चार नए कैबिनेट मंत्रियों को शपथ दिलाई गई.
इस विस्तार में सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर, रालोद नेता अनिल कुमार, बीजेपी नेता दारा सिंह चौहान और साहिबाबाद विधायक सुनील शर्मा को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया.
ओम प्रकाश राजभर की NDA में वापसी के बाद उन्हें सरकार में जगह दी गई. दारा सिंह चौहान समाजवादी पार्टी छोड़कर दोबारा बीजेपी में लौटे थे, जिसके बाद उन्हें मंत्री बनाया गया. रालोद के NDA में आने के बाद अनिल कुमार को प्रतिनिधित्व मिला.
इस विस्तार के बाद योगी सरकार में मंत्रियों की संख्या बढ़कर 56 हो गई. यह 2022 में दूसरी बार सरकार बनने के बाद पहला आधिकारिक कैबिनेट विस्तार था. 2024 के बाद दूसरा कैबिनेट विस्तार मई 2027 में हुआ. इस दौरान 6 नए मंत्री कैबिनेट में शामिल किए गए. इसमें सपा के बागी मनोज पांडेय को भी जगह मिली.
2024 के आम चुनावों में बीजेपी, सपा से पिछड़ गई और उसे सिर्फ 33 सीटों पर जीत हुई. वहीं 2019 के चुनाव में बीजेपी को 62 सीटें मिलीं थीं.
अब 2027 का कैबिनेट विस्तार
उधर बीते दिनों हुए कैबिनेट विस्तार में कुल आठ नेताओं ने मंत्री पद की शपथ ली थी. इसमें मनोज पांडेय और भूपेंद्र चौधरी ने कैबिनेट मंत्री के तौर पर शपथ ली थी. वहीं पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी ने भी कैबिनेट मंत्री के तौर पर शपथ ली थी. जाट समाज से आने वाले भूपेंद्र चौधरी पश्चिमी यूपी में बीजेपी का बड़ा चेहरा माने जाते रहे हैं.
अजीत सिंह पाल और सोमेंद्र तोमर को राज्य मंत्री से प्रमोट कर स्वतंत्र प्रभार का दर्जा दिया गया था.
राज्य मंत्री के तौर पर कैलाश राजपूत, हंसराज विश्वकर्मा, सुरेंद्र दिलेर और कृष्णा पासवान ने शपथ ली थी. वाराणसी के पूर्व जिलाध्यक्ष हंसराज विश्वकर्मा को भी मंत्री बनाया गया था.
अलीगढ़ की खैर सीट से विधायक सुरेंद्र दिलेर बाल्मीकि समाज से आते हैं. फतेहपुर की खागा सीट से विधायक कृष्णा पासवान को भी राज्य मंत्री बनाया गया था.


























