उत्तर प्रदेश विधानसभा के मॉनसून सत्र में स्पीकर सतीश महाना, विधायकों  को संबोधित करते हुए भावुक हो गए. सत्र के दूसरे दिन 4 अगस्त को हुए हंगामे को लेकर स्पीकर ने कहा कि मैं आत्मावलोकन करूंगा कि मैं इस पद के काबिल भी हूं या नहीं. मुझे इस बात के लिए विचार करना पड़ेगा कि मैं इस कुर्सी के योग्य हूं या नहीं हूं. अथवा बीते साढ़े चार सालों में मैंने जो किया है वो उचित है या अनुचित है. 

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स्पीकर ने कहा कि मेरी एक लंबी राजनीतिक पारी रही है जो कि अब अंतिम चरण में है. मैं फिर कह रहा हूं कि अंतिम चरण में है. मेरा प्रयास रहा है कि इस विधायिका ने मुझे जो दिया है , अध्यक्ष के रूप में मैं उसका कुछ ऋण वापस कर सकूं. आप सभी से अपील है कि पार्टी से ऊपर उठकर हम क्या बेहतर कर सकते हैं.

स्पीकर ने कहा कि जब अखिलेश यादव मुख्यमंत्री थे, उस वक्त इसी विधानसभा में दो विधायकों ने अपनी शर्ट उतार दिए थे. तब मैंने कहा था कि ये केवल दो विधायकों ने कपड़े नहीं उतारे बल्कि सभी 403 विधायकों के कपड़े उतरे हैं. 

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महाना ने कहा कि जब इसी सदन में नेता प्रतिपक्ष रहे स्वामी प्रसाद मौर्य ने तत्कालीन नेता सदन अखिलेश यादव के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की थी, तब मैंने इसका विरोध किया था. यह बात रिकॉर्ड में है.

स्पीकर ने कहा कि विधायक जो शपथ लेते हैं उसमें भी यह निहित है कि हम सदन के नेता का सम्मान करेंगे. वाद विवाद, सहमति और असहमति लोकतंत्र का अंग है लेकिन भाषा की मर्यादा बनी रहनी चाहिए. कल जो सदन में हुआ उससे मैं दुःखी और निराश हूं. मुझे पहली बार यह महसूस हुआ कि या तो हमारे प्रयास में कोई कमी रह गई या बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर की बात सही है कि कमी संविधान में नहीं बल्कि व्यक्तियों में होगी.

जसराना से समाजवादी पार्टी के विधायक सचिन यादव का नाम लिए बिना स्पीकर ने कहा कि कल एक ऐसे सदस्य के आचरण ने मुझे दुःखी किया जिसे मैं सदन का रोल मॉडल कहता था. मेरे मना करने के बाद भी उन्होंने सदन के बाहर जिस भाषा का प्रयोग किया यह बहुत निराशाजनक है.