होली के पहले यूपी के कुछ घर अंधेरे में चले गए हैं. वजह है लंबे समय से बिजली का बिल न भरने के कार बैलेंस नेगेटिव में जाना. जी हां आंकड़ों के अनुसार, 76,785 स्मार्ट प्रीपेड मीटर उपभोक्ताओं के बिजली कनेक्शन काट दिए गए. हालांकि राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने दावा किया है कि कई उपभोक्ताओं का बैलेंस पॉजिटिव होने के बावजूद आपूर्ति बंद कर दी गई.

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क्या है पूरा मामला?

होली के ऐन पहले हुई इस कार्रवाई से हजारों उपभोक्ता प्रभावित हुए हैं. परिषद के मुताबिक सबसे ज्यादा दिक्कतें नोएडा और गाजियाबाद में सामने आई हैं. कई उपभोक्ताओं ने शिकायत की कि मीटर रीचार्ज करने के बावजूद उन्हें बैलेंस अपडेट नहीं मिला और खाते में राशि माइनस दिखाई गई.

परिषद का कहना है कि तकनीकी खामियों के कारण वास्तविक पॉजिटिव बैलेंस वाले उपभोक्ताओं के भी कनेक्शन काट दिए गए. उपभोक्ताओं को अचानक बिजली कटौती का सामना करना पड़ा, जिससे त्योहार की तैयारियों पर सीधा असर पड़ा.

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उपभोक्ता परिषद की आपत्ति

राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने पूरे मामले की जांच की मांग की है. परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि त्योहार से ठीक पहले इस तरह की सख्ती नहीं की जानी चाहिए थी. उनका कहना है कि पावर कॉरपोरेशन को पहले अपने सिस्टम की खामियां दूर करनी चाहिए थीं.

उन्होंने इसे उपभोक्ताओं के साथ अन्याय बताया और याद दिलाया कि जन्माष्टमी के दौरान भी प्रीपेड मीटर को लेकर दिक्कतें आई थीं. उस समय योजना को अस्थायी रूप से रोकना पड़ा था. परिषद का कहना है कि बिना सहमति के मीटर को प्रीपेड मोड में बदलना विद्युत अधिनियम के प्रावधानों के खिलाफ है.

नियामक आयोग में उठेगा मुद्दा

बिजली की नई दरें तय करने के लिए नियामक आयोग 9 मार्च से सुनवाई करेगा. इस सुनवाई में स्मार्ट मीटर की लागत उपभोक्ताओं से वसूलने के प्रस्ताव का मुद्दा भी उठेगा. परिषद ने इसका विरोध करने की घोषणा की है और तथ्यात्मक प्रतिवाद प्रस्तुत करने की बात कही है.

परिषद के अनुसार केंद्र सरकार ने स्मार्ट प्रीपेड मीटर योजना के लिए 18,885 करोड़ रुपये अनुमोदित किए थे, जबकि पावर कॉरपोरेशन ने 27,342 करोड़ रुपये में टेंडर जारी किए. लाइव हिंदुस्तान के अनुसार, अतिरिक्त राशि का बोझ उपभोक्ताओं पर डालने का विरोध किया जाएगा. साथ ही उपभोक्ताओं पर 50 हजार करोड़ रुपये बकाया होने का हवाला देते हुए बिजली दरों में कमी का प्रस्ताव भी रखा जाएगा.