गोरखपुर में यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ गोरखपुर विश्वविद्यालय के छात्रों का प्रदर्शन थमने का नाम नहीं ले रहा है. विश्वविद्यालय के छात्र मुख्य द्वार पर एकत्र होकर सवर्ण जनप्रतिनिधियों को उनकी चुप्पी की वजह से चूड़ियां भेजने के लिए एकत्र हुए. इसके बाद छात्रों ने नारेबाजी शुरू कर दी. प्रदर्शन के दौरान छात्र वहां धरने पर बैठ गए. मौके पर पहुंचे पुलिसकर्मियों ने बलपूर्वक उन्हें वहां से हटाया.

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जानकारी के मुताबिक, गुरुवार 29 जनवरी को विश्वविद्यालय के छात्र मुख्य द्वार पर जुटे और रंग-बिरंगी चूड़ियां लेकर प्रदर्शन करने लगे. छात्र नेताओं ने बताया कि चुप्पी साधकर बैठे जनप्रतिनिधियों को वे यह चूड़ियां भेंट करेंगे. जिससे कि वह यूजीसी के नए नियमों को वापस लेने के लिए उनका साथ दें.

'सवर्ण जनप्रतिनिधियों को भेंट करेंगे चूड़ियां'

इस दौरान विश्वविद्यालय के छात्र नेता और एनएसयूआई के पूर्वी उत्तर प्रदेश के सचिव मनीष ओझा ने कहा कि वे लोग यूजीसी एक्ट के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं. सवर्ण जनप्रतिनिधियों की तोड़ने और आंखें खोलने के लिए वे लोग रंग बिरंगी चूड़ियां उन्हें भेंट करेंगे. 

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छात्र नेता प्रांजल पाठक ने कहा कि यूजीसी के नए कानून को वापस लिया जाए अभी एससी एसटी कानून की वजह से इतना विवाद है. यह कानून सवर्ण समाज और छात्रों के खिलाफ है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस कानून को वापस लेना चाहिए. 

'यूजीसी का नया कानून सवर्ण छात्रों के खिलाफ'

छात्र नेता नारायण पाठक ने कहा कि यूजीसी का नया कानून सवर्ण छात्रों के खिलाफ है. इससे सवर्ण छात्र फर्जी मुकदमों में फंसाए जाएंगे. उनका भविष्य बर्बाद होगा. वे जेल जाएंगे. सवर्ण समाज का कोई भी नेता इस पर कोई टिप्पणी नहीं कर रहा है. न ही इस कानून का विरोध कर रहा है. ऐसे नेताओं को उन लोगों ने चूड़ी भेंट किया है.

नारायण पाठक ने कहा, "उनसे भी कहना चाहते हैं कि वह चूड़ी पहनकर बैठ जाएं और ढोंग न करें. आप ब्राह्मण क्षत्रिय शिरोमणि है या ढोंग करना छोड़ दीजिए. आपका काला चेहरा समाज को दिख गया है. इसका करारा जवाब आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनाव में देंगे, इसके लिए वह निश्चिंत रहें."

सुप्रीम कोर्ट ने UGC के नए नियमों पर लगाई रोक

गौरतलब है कि UGC के नए नियमों पर 29 जनवरी 2026 (बुधवार) को सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है. साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने 19 मार्च 2026 तक केंद्र सरकार और UGC को नोटिस जारी कर के जवाब मांगा है. साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि अभी 2012 वाले नियम ही लागू रहेंगे.