तमिलनाडु के पूर्व मंत्री उदयनिधि स्टालिन (Udhayanidhi Stalin) के बयान पर एक बार फिर सियासी और धार्मिक घमासान मच गया है. अपने एक संबोधन के दौरान स्टालिन ने कहा कि "लोगों को बांटने वाली परंपरा को निश्चित रूप से खत्म कर देना चाहिए."

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इस बयान को सीधे तौर पर सनातन धर्म पर टिप्पणी के रूप में देखा जा रहा है. इस पर अयोध्या के संतों में भारी रोष है और उन्होंने इसे 'सनातन विरोधी मानसिकता' करार दिया है.

'क्या इस्लाम या ईसाईयत पर ऐसा बोल सकते हैं?'

हनुमानगढ़ी के महंत राजू दास (Mahant Raju Das) ने स्टालिन के बयान की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि सनातन धर्म को लोगों को बांटने वाली परंपरा बताना पूरी तरह गलत है.

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महंत राजू दास ने कहा, "जिस सनातन धर्म ने पूरी दुनिया को 'वसुधैव कुटुंबकम' (विश्व एक परिवार है) और 'सर्वे भवन्तु सुखिनः' (सभी सुखी रहें) का महान संदेश दिया, आज उसी को मिटाने की बात की जा रही है." उन्होंने तल्ख लहजे में सवाल उठाया, "क्या किसी विधानसभा में खड़े होकर इस्लाम या ईसाइयत को समाप्त करने जैसी बात कही जा सकती है? सनातन धर्म को लेकर लोग इसलिए लगातार आपत्तिजनक बयान देते हैं क्योंकि वे हिंदू समाज को कमजोर समझते हैं."

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'सनातन को मिटाने वाले खुद मिट जाएंगे'

वहीं, साकेत भवन के महंत संत सीताराम दास ने भी इस बयान को घोर निंदनीय बताया. उन्होंने याद दिलाया कि उदयनिधि स्टालिन पहले भी सनातन धर्म की तुलना डेंगू, मलेरिया, कैंसर और एड्स जैसी बीमारियों से कर चुके हैं और अब विधानसभा में खड़े होकर इसे मिटाने की बात कर रहे हैं.

संत सीताराम दास ने कहा, "सनातन धर्म हमेशा लोगों को जोड़ने, विश्व बंधुत्व और मानव कल्याण की बात करता है. सनातन धर्म हमेशा से था, आज है और अनंत काल तक रहेगा. जो लोग सनातन को मिटाने की सोच रखते हैं, वे स्वयं समय के साथ मिट जाएंगे."

2023 में भी हुआ था भारी विवाद

गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब तमिलनाडु के पूर्व सीएम एमके स्टालिन के बेटे उदयनिधि ने ऐसा बयान दिया हो. इससे पहले साल 2023 में भी उनके 'सनातन उन्मूलन' वाले बयान पर देशभर में बड़ा राजनीतिक और धार्मिक विवाद खड़ा हुआ था, जिसकी गूंज सुप्रीम कोर्ट तक पहुंची थी.

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