उत्तराखंड के रामनगर में देश के प्रसिद्ध कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में उस समय वन विभाग की चिंता बढ़ गई, जब झिरना रेंज की दो पालतू हथनियां अचानक जंगल में लापता हो गईं. तुंगा और कपिला नाम की ये दोनों हथनियां रोज की तरह जंगल में चरने के लिए छोड़ी गई थीं, लेकिन इस बार वे जंगली हाथियों के झुंड के साथ काफी दूर निकल गईं. करीब आठ से नौ घंटे तक चले घटनाक्रम के बाद दोनों हथनियां सुरक्षित वापस लौट आईं, जिसके बाद कॉर्बेट प्रशासन ने राहत की सांस ली.

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जानकारी के अनुसार, कॉर्बेट में पालतू हाथियों को सुबह और शाम जंगल में घास व प्राकृतिक भोजन के लिए छोड़ा जाता है. हाथी विशालकाय और अत्यधिक भोजन करने वाले जीव होते हैं, इसलिए उन्हें खुले जंगल में चरने की आवश्यकता पड़ती है. इसी दौरान झिरना रेंज की तुंगा और कपिला हथनियां जंगली हाथियों के समूह के संपर्क में आ गईं और उनके साथ जंगल की ओर चली गईं.

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इससे पहले भी हो चुकी घटना 

वन अधिकारियों के अनुसार, यह कोई पहली घटना नहीं है। पहले भी कई बार पालतू हाथी जंगली झुंड के साथ चले गए हैं. विशेषज्ञ बताते हैं कि हाथी अत्यंत सामाजिक और भावनात्मक प्राणी होते हैं. विशेष रूप से मैटिंग सीजन के दौरान वे जंगली समूहों की ओर आकर्षित हो जाते हैं. हालांकि ऐसे मामले बहुत कम देखने को मिलते हैं, लेकिन जब भी ऐसा होता है तो वन विभाग की चिंता बढ़ जाती है.

कार्बेट के लिए महत्वपूर्ण हैं हथनियां 

कॉर्बेट प्रशासन के लिए ये हथनियां बेहद महत्वपूर्ण हैं. जंगल में गश्त, वन्यजीवों की निगरानी और मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं में पालतू हाथियों की भूमिका अहम मानी जाती है. कई बार बाघ या जंगली हाथियों की निगरानी में भी इनका उपयोग किया जाता है. इसके अलावा ढिकाला  पर्यटन जोन में पर्यटकों को जंगल सफारी कराने में भी ये हाथी प्रमुख आकर्षण बने हुए हैं.

वन कर्मियों का कहना है कि तुंगा और कपिला के सुरक्षित लौट आने से बड़ा संकट टल गया. इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि हाथी केवल शक्तिशाली ही नहीं, बल्कि अत्यंत संवेदनशील और सामाजिक वन्यजीव भी हैं.

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