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Exclusive: किराया, गैस और खर्च का दबाव...नोएडा के मजदूरों की दर्दभरी कहानी भी सुन लीजिए

Noida Labour Story: मजदूरों की परेशानी को समझते हुए अब योगी सरकार ने भी वेतन बढ़ाने को मंज़ूरी दे दी है, लेकिन सवाल उठता है कि इतने कम वेतन में ये मज़दूर कैसे गुजारा करते हैं? अपना घर कैसे चलाते हैं?

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  • ओवरटाइम के बाद भी 11-16 हजार में गुजारा असंभव.

समय के साथ महंगाई बढ़ रही है और पश्चिम एशिया में जारी जंग ने आम जनता को और परेशान किया है. इन सबमें मजदूरों के लिए सीमित वेतन के कारण अपना खर्चा निकाल पाना बहुत कठिन हो जाता है. कंपनियाों में दिन-रात काम करने के बाद भी 10 से 15 हजार की ही कमाई हो पाती है, ऊपर से शहर में किराया, बिजली और पानी के बिल के बाद कुछ बचा पाना मुश्किल हो जाता है.  यही कारण है कि अपने वेतन वृद्धि को लेकर नोएडा में तीन दिनों से श्रमिकों का हिंसक प्रदर्शन जारी है.

मजदूर लगातार अपनी सैलरी बढ़ाने की मांग पर अड़े हैं. मजदूरों की परेशानी को समझते हुए अब योगी सरकार ने भी वेतन बढ़ाने को मंज़ूरी दे दी है, लेकिन सवाल उठता है कि इतने कम वेतन में ये मज़दूर कैसे गुजारा करते हैं? अपना घर कैसे चलाते हैं? यही जानने के लिए एबीपी न्यूज़ की टीम मजदूरों के घर पहुंची उनके परिवार से मिलक यह जानने की कोशिश की कि वो कैस गुजारा करते हैं.

दिनभर मेहनत, फिर भी अधूरी जरूरतें – राजेश कुमार की कहानी

एबीपी न्यूज़ की टीम सबसे पहले राजेश कुमार जो सातमढ़ी बिहार के रहने वाले हैं, वो यहां फेस-2 की एक निजी कंपनी में काम करते हैं और नोएडा के नया गांव में किराए पर रहते है. उनके घर में गृहस्ती के नाम पर बस एक चारपाई और एक गैस चूल्हा और कुछ बर्तन हैं.  राजेश जिस 5/7 के कमरे में रहते हैं उसका किराया 2500 रुपए प्रति माह है और करीब 500-700 बिजली का बिल देते हैं. तीन सौ रुपए कंपनी जाने के लिए भाड़ा देते हैं. पिछले एक महीने से 480 रुपए किलोग्राम गैस भरवा रहे हैं.

महंगाई दिनों दिन बढ़ रही है, लेकिन मजदूरी जस की तस है उसमे कोई बढ़ोत्तरी नहीं हो रही. राजेश भी चाहते हैं मजदूरी बढ़ जाए ताकि घर चल सके. इन मजदूरों की बेबसी और मजबूरी सुन कर आपकी भी आखें नम हो जाएगी. बड़ी मुश्किल से ये 4-5 हज़ार रुपए घर भेज पाते है जिसका दर्द इन्हें हमेशा रहते है.  इनका कहना है कि 11300 रुपए इनका वेतन है और ओवरटाइम करके करीब 13500 रुपए सैलरी बनती है, लेकिन उसमें गुजारा नहीं हो पा रहा है. 

राजू ने बताया कैसे ओवरटाइम के बाद भी हैं खाली हाथ

वही हमीरपुर के रहने वाले राजू ने एबीपी न्यूज़ से बातचीत के दौरान बताया कि इतनी सैलरी से गुजारा नहीं हो पा रहा है और सैलरी बढ़ाने को लेकर जो प्रोटेस्ट चल रहा है वो सही है. राजू पिछले पाँच सालों से ये नोएडा में मजदूरी कर रहे हैं, लेकिन बचत के नाम पर कुछ नहीं बचता बड़ी मुश्किल से घर पैसा भेज पाते हैं.  इनका कहना है ये ठेकेदार के अंडर काम करते हैं और जो मजदूरी इन्हें मिलती है उसमे ठेकेदार अपना कमीशन काट कर इन्हें मजदूरी देता है. यही वजह है कि बिना छुट्टी और ओवरटाइम के बाद बड़ी मुश्किल से 15-16 हज़ार मिल पाते हैं, जिसमें आधे से ज्यादा पैसा घर खर्च और मकान के किराए पर ही खत्म हो जाता है,  बड़ी मुश्किल से कुछ पैसा घर भेज पाते हैं. 

अनीता का दर्द- 8x8 के कमरे में जिंदगी, 15 हज़ार में नहीं चल रहा गुजारा

इसके बाद एबीपी न्यूज़ की टीम कोलकाता की रहने वाली अनीता के पास पहुंची जो पिछले 6 सालों से फेज-2 स्थित एक निजी कंपनी में काम करती हैं. अनीता तीन हज़ार प्रति माह के किराए पर एक कमरा लेकर रहती हैं, जो मात्र आठ बाय आठ का है. अनीता के पास गृहस्ती के नाम पर कुछ भी नहीं है, केवल एक 5kg का सिलेंडर और चूल्हा है और थोड़े से बर्तन हैं. घर में इनकी एक बेटी है और इन्हें 11300 रुपए वेतन मिलता है, ओवरटाइम करके बड़ी मुश्किल से 15000 रुपए मिलते हैं,  लेकिन उससे गुजरा नहीं हो पा रहा है. 

ज़मीन प सोकर रात गुजरती हैं और पूरा दिन सिर्फ़ कमाने में निकल जाता है. काम से अनीता जब थक हार कर घर पहुंचती हैं तो खाना बनाना और फिर बच्चे को देखना यही ज़िन्दगी है. साथ ही परिवार की ज़िम्मेदारी इन्हें दिनों-दिन और कमज़ोर बना रही है, जिसका दर्द इन्हें हमेशा रहता है, लेकिन इनकी मजबूरी है कि ये अपना दुख और दर्द किससे कहे और कौन सुनेगा. 

गोरखपुर की अनीता ने बताया- 9000 की मजदूरी में 5 लोगों का गुजारा

इसके बाद एबीपी न्यूज़ की टीम गोरखपुर उत्तर प्रदेश की रहने वाली अनिता वर्मा से मिली और उनका दर्द सुनकर तो आखें नम हो जाए. उन्होंने एबीपी न्यूज़ को बताया कि वो 5 सालों से काम कर रही हैं.  उनके परिवार में कुल पाँच लोग हैं, एक बेटा दो बेटी.  अनिता को मजदूरी के नाम पर महज़ 9000 हज़ार मिलते हैं और ओवर टाइम करके 10-11 हज़ार बन जाता है जिसमें से  तीन हज़ार मकान का किराया जाता है, बिजली का बिल अलग से जाता है. अब गैस महंगी हो गई तो परेशानी बढ़ गई क्योंकि महंगाई लगातार बढ़ने से पहले ही खर्चा निकाल पाना मुश्किल हो रहा है, लेकिन मजदूरी नहीं बढ़ रही है. 

उन्होंने जब सुना सरकार वेतन बढ़ा रही है तो वो खुश हो गईं कि अब कुछ तो मिलेगा. बेटे की तबीयत खराब है दिखाने के लिए पैसे नहीं है,  डॉक्टर ने बताया माता निकली हैं, सिर्फ पूजा पाठ करो बस.  गोरखपुर की रहने वाली अनिता ने कहा की सरकार गरीब मजदूरों का भी ध्यान रखे ताकि उनका भी गुज़र बसर हो सके. 

 

मैं बलराम पांडेय ABP नेटवर्क में वरिष्ठ संवाददाता हूं. मीडिया उद्योग में 19 वर्षों से अधिक अनुभव के साथ, मैं रिपोर्टिंग और विश्लेषण में अपने अनुभव का लाभ उठाकर दर्शकों को आकर्षित और जागरूक करने वाली उच्च-प्रभाव वाली कहानियाँ पेश करता हूं. वर्तमान में, मैं दिल्ली सरकार और राजनीतिक घटनाओं, प्रवर्तन निदेशालय (ED), CBI को कवर करने, के साथ बड़े इंटरव्यू और समसामयिक मामलों पर व्यावहारिक विश्लेषण प्रदान करने के लिए ज़िम्मेदारी निभा रहा हूं 
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