उत्तर प्रदेश के लखनऊ में मंगलवार को पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने दलितों, पिछड़ों और वंचित वर्गों के साथ हो रही घटनाओं को लेकर योगी सरकार पर तीखा हमला बोला. प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौर्य ने आरोप लगाया कि योगी सरकार जाति देखकर कार्रवाई करती है. उन्होंने कहा कि कमजोर और शोषित वर्गों के साथ होने वाले अत्याचार और हत्याओं के मामलों में सरकार की कार्रवाई पर सवाल खड़े हो रहे हैं.

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स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि जब किसी दलित, पिछड़े या वंचित परिवार के सदस्य की हत्या होती है या उसके साथ अत्याचार होता है, तो केवल कार्रवाई का दावा पर्याप्त नहीं है. पीड़ित परिवार को समय पर न्याय, सुरक्षा और निष्पक्ष जांच मिलना भी जरूरी है.

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कार्रवाई को लेकर भेदभाव का आरोप 

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार को सभी नागरिकों के साथ समान व्यवहार करना चाहिए, लेकिन कई मामलों में कार्रवाई को लेकर भेदभाव दिखाई देता है. मौर्य ने कहा कि संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार देता है और इन अधिकारों की रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है.

निष्पक्ष जांच की मांग उठाई 

मौर्य ने दलित और पिछड़े समाज से जुड़े मामलों में निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की. उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था के मामले में सरकार की जवाबदेही तय होनी चाहिए और किसी भी पीड़ित परिवार को जाति के आधार पर न्याय से वंचित नहीं किया जाना चाहिए. स्वामी प्रसाद मौर्य के इन आरोपों से प्रदेश की सियासत में कानून-व्यवस्था और सामाजिक न्याय को लेकर राजनीतिक बहस और तेज होने के आसार हैं.

स्वामी प्रसाद मौर्य अक्सर योगी सरकार और बीजेपी के खिलाफ मुखर रहते हैं, वे इससे पहले भी कई मौकों पर बीजेपी सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर चुके हैं. उन्होंने सीधा आरोप लगाया कि दलितों-वंचितों पर अत्याचार बढे हैं. कई बार उनके खिलाफ इसको लेकर आलोचना भी उनकी हुई है.

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