अलीगढ़, एबीपी गंगा: खुले में घूमते मवेशी किसानों के लिए बड़ी समस्या बन गए हैं। पशु सड़कों पर छुट्टा घूम रहे हैं और इनकी संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। आलम ये है कि अब अलीगढ़ शहर के लोग और आसपास के गांवों में रहने वाले किसान पशुओं की बढ़ती संख्या की वजह से परेशान हो गए हैं। किसानों के लिए फसलों को बचाना मुश्किल हो गया है। कई बार विरोध-प्रदर्शन तक की नौबत आ चुकी है, लेकिन समाधान की तरफ कोई कदम नहीं बढ़ाए गए हैं।

बड़ी है मुसीबत

दरअसल, ये समस्या तब शुरू हुई जब पिछले कुछ सालों में गोकशी की घटनाएं बढ़ीं। गोकशी को लेकर कई स्थानों पर हंगामा भी हुआ। विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने वादा किया था कि सत्ता में आए तो गोकशी पर अंकुश लगेगा। जनता ने भरोसा जताया और यूपी की कमान बीजेपी को सौंप दी। योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री बने। योगी ने सत्ता संभालते ही गोकशी के खिलाफ कार्रवाई की। असर यह हुआ कि गोकशी पर प्रतिबंध लग गया, लेकिन किसानों की मुसीबतें बढ़ गईं। छुट्टा पशु खेतों में नुकसान करने लगे। पिछले कुछ समय में तो ये समस्या गंभीर हो गई है। किसानों को फसल बचाने के लिए रातभर जागना पड़ रहा है।

लगातार बढ़ रही है पशुओं की संख्या

एक अनुमान के मुताबिक अलीगढ़ में छुट्टा पशुओं की संख्या 50 हजार से अधिक है, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में ये संख्या 18 हजार ही है। किसानों की मानें तो छुट्टा पशुओं की वजह फसलों में 20 फीसद से ज्यादा नुकसान हो रहा है। साथ ही उन्हें अतिरिक्त मेहनत भी करनी पड़ रही है। शिकायत के बाद भी प्रशासन की तरफ से किसी तरह की मदद नहीं मिल रही है। हालात यहां तक पहुंच गए हैं कि अवारा पशु लोगों पर हमला भी कर रहे हैं। आंकड़ों पर गौर करें तो जिले में एक साल के भीतर पशुओं के हमले से तीन लोगों की मौत हो चुकी है। कई लोग घायल भी हो चुके हैं।

सरकार ने भी उठाए कदम

छुट्टा पशुओं के संरक्षण को लेकर बजट की भी व्यवस्था की गई है। एक करोड़ रुपए नगर निगम की गोशाला को दिए गए हैं तो एक करोड़ की रकम डीएम के खाते में भेजी गई है।

मुख्य बिंदु 

ग्राम पंचायत स्तर पर 18 गोशाला सक्रिय। 2500 से अधिक है पशुओं की संख्या।

नगर पालिका व नगर पंचायतों में 10 गोशाला। इनमें 600 पशु रखे गए।

नगर निगम में गोशाला बनी। इसमें 215 पशुओं को रखा गया गया।

लगभग एक दर्जन पंजीकृत व इतनी ही अपंजीकृत गोशाला मौजूद, तीन हजार है पशुओं की संख्या।

आवारा पशुओं के कारण आम लोगों की बढ़ती मुसीबतों को देखते हुए कई तरह के कदम भी उठाए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि इस समस्या पर काम जारी है और संरक्षण का आधे से अधिक कार्य हो का है, जल्द ही बचा हुआ कार्य भी कर लिया जाएगा।