मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने धार जिले के भोजशाला को हिन्दू देवी सरस्वती का मंदिर बताते हुए हिन्दू पक्ष को पूजा का अनुमति दे दी है. जिस पर सँभल से समाजवादी पार्टी के सांसद जियाउर रहमान बर्क ने सवाल उठाए हैं. उन्होंने अयोध्या की बाबरी मस्जिद का जिक्र करते हुए कहा कि कोर्ट के इस आदेश पर देशभर में कानूनी बहस हो रही है.
सपा सांसद ने किया बाबरी मस्जिद का जिक्र
सपा सांसद ने भोजशाला विवाद में हाईकोर्ट के फैसले की आलोचना की और कहा- 'भोजशाला मामले में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के आदेश ने कई संवैधानिक और क़ानूनी सवालात खड़े कर दिए हैं.
उन्होंने कहा कि भारत का संविधान तमाम नागरिकों को अपने मजहब पर अमल करने और इबादत की आज़ादी का हक देता है. ऐसे में बरसों से जारी धार्मिक रस्मों और नमाज पर रोक जैसे आदेशों की आला अदालत में न्यायिक समीक्षा बेहद अहम है.
सपा सासद ने लिखा कि मस्जिद के बदले दूसरी जमीन देने संबंधी टिप्पणी ने बाबरी मस्जिद फ़ैसले की याद ताज़ा कर दी है, जिसकी वजह से इस आदेश पर मुल्क भर में क़ानूनी बहस जारी है. उम्मीद है कि माननीय सुप्रीम कोर्ट संविधान की रूह, धार्मिक आजादी, बराबरी और इंसाफ के उसूलों को सामने रखते हुए मुनासिब फैसला देगा.
उन्होंने लिखा कि हम लोकतांत्रिक निजाम और अदालतों का एहतराम करते हैं लेकिन, हर नागरिक और हर तबके को यह हक हासिल है कि वह कानूनी दायरे में रहकर इंसाफ के लिए अपनी आवाज बुलंद करे.'
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औवैसी ने भी फैसले पर जताया ऐतराज
भोजशाला मामले पर AIMIM नेता असदुद्दीन ओवैसी ने भी कोर्ट के फैसले पर तीखी टिप्पणी की है. उन्होंने इस आदेश को संवैधनिक मूल्यों के खिलाफ बताया और कहा कि ये फैसला एकदम बाबरी मस्जिद जैसा ही निकला है. मैंने पहले ही चेताया था कि बाबरी विवाद पर आया फैसला त्रुटिपूर्ण था जो पूरी तरह आस्था के आधार पर दिया गया था. ये फैसला दूसरे मुद्दों को भी प्रभावित करेगा.
