लखनऊ, एबीपी गंगा। सपा नेता आजम खान इन दिनों सुर्खियों में हैं। सियासी मौसम में कभी रोते हैं, कभी हंसते हैं तो कभी वस्त्रों को लेकर....रहने ही दीजिए...क्या बोला जाए। सियासत में रिश्तों के रूप बदलते हैं और आज खान साहब और मायावती नए सांचे में फिट बैठे हैं। यकीन मानिए, आजम यूपी की सियासत के जुम्मन चचा (अंकल) बन गए हैं। कहीं से कोई बात शुरू होती है तो खत्म आजम खान पर ही होती है। जरा सोचिए अगर यूपी की सियासत में आजम न होते तो कितनी नीरस हो जाती यहां की राजनीति। रामपुर में जयाप्रदा के खिलाफ आजम के बेतुके बोल हम सबने सुने हैं। पीएम मोदी को जालिम, भारत माता को डायन कहने वाले बयान भी सुर्खियों में रहे हैं।

आज यूपी की सियासी हवा बदल गई है। आजम अब सपा के नहीं गठबंधन के नेता कहे जाते हैं। गठबंधन मतलब अखिलिश और मायावती का गठजोड़। मायावती भी रिश्तों को निभाने में पीछे नहीं दिख रही हैं। रामपुर में महागठबंधन की रैली में बसपा मुखिया मायावती आजम खान के लिए चुनाव प्रचार कर रही हैं। रामपुर में मायावती ने भाषण के दौरान आजम खान तारीफ करते हुए कहा कि उनकी जीत सुनिश्चित है।

दल मिले तो जुबान बदली...खासकर आजम खान की। आजम खान के श्री मुख से आज मायावती के लिए जो पुष्पों की वर्षा हो रही है वो सियासत के अलग लेवल की कहानी है। लेकिन आज हमाको सियासत के उस दौर की दास्तान बताने जा रहे हैं जब आजम ने मायावती को भी नहीं बख्या था और कर्कश ध्वनि से शब्दों की सीमा लांघते हुए सियासी पहाड़े पढ़े थे और जुमले भी गढ़े थे।

समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान मायावती पर निशाना साधते हुए उन्हें ‘गुंडी’ तक कह चुके हैं। यूपी के मंझनपुर में एक सियासी रैली को संबोधित करते हुए आजम ने बीएसपी पर मुसलमानों को बर्बाद करने का आरोप भी लगाया था। स्वामी प्रसाद मौर्या के बीएसपी छोड़ने के बाद आजम ने रामपुर में कहा था कि अब तो ये लगता है कि या तो मायावती पार्टी छोड़ेंगी या फिर पार्टी उन्हें छोड़ देगी। ऐसा नहीं कि जुबानी तीर सिर्फ आजम की तरफ से ही चले हों, बीएसपी सुप्रीमो मायावती भी आजम पर निशाना साधते हुए कह चुकी हैं कि आजम खान ने अपने जमीर को मारकर पहले मुलायम सिंह यादव की चाटुकारी की और अब बबुआ की कर रहे हैं।

अब जरा आजम खान का हाल में दिया हुआ बयान भी देख लीजिए जो रिश्तों की हकीकत समझाने के लिए काफी है। हाल ही में आजम ने डीएम से जूते साफ करवाने की बात करते हुए कहा कि ‘सब डटे रहो, कलेक्टर-पलेक्टर से मत डरियो, ये हैं तनखैया.. हम इनसे नहीं डरते हैं। देखे हैं मायावती के कई फोटो कैसे बड़े-बड़े अफसर रुमाल निकालकर जूते साफ करते रहे हैं। यहां यह जान लीजिए कि फरवरी 2011 में एक डीएसपी लेवल के एक पुलिस अधिकारी ने मायावती की जूती को साफ किया था, जिसे लेकर विवाद भी खूब हुआ था।

अब ये समझिए कि आजम खान जिस तरह से आज मायावती का गुणगान करते हुए नजर आ रहे हैं, उन्हीं आजम ने जूती साफ करवाने वाली घटना का जमकर विरोध किया था। सपा का मुसलमान चेहरा माने जाने वाले आजम ने तब मुख्यमंत्री रहीं मायावती पर निशाना साधते हुए कहा था, ‘यह उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती की सामंती मानसिकता को दर्शाता है। वो शाही राजतन्त्र को फिर से जीना चाहती हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि सुरक्षा अधिकारी की कुछ गंभीर मजबूरियां थीं जिसने उसे शर्मनाक कृत्य करने के लिए मजबूर किया। मैं सुझाव दूंगा कि मायावती अपने मार्ग पर धूल की देखभाल करने और अपने सैंडल की सफाई जैसे कामों को करने के लिए एक अलग दल की नियुक्ति करेंगी।‘ वैसे अब ये कहना गलत नहीं होगा कि मायावती ने आजम की बात सुन ली है और शायद अब उस दल की नियुक्ति कर ली है, जो उनके मार्ग पर धूल की देखभाल करेगा और उनके सैंडल की सफाई करेगा। उसका नाम समाजवादी पार्टी ही है, जिसके आजम संस्थापक सदस्य रहे हैं।

आज सियासी समीकरण बदले हैं तो आजम की प्रकृति भी बदल गई है, ऐसा नहीं है। आजम खान के विवादित बयान कई बार सुर्खियां बने हैं। फर्क सिर्फ ये है कि अब मायावती और यादव परिवार एक दूसरे के करीब आ गए हैं। दोस्ती का रंग गहरा हो गया है...तो आजम के लिए भी मायावती का भी गुणगान करना मजहब बन गया है। तभी तो जो घटना सामंती मानसिकता और शाही राजतन्त्र का परिचायक थी, वो अब छाती चौड़ी करने वाली और गर्व से भर देने वाली घटना हो गई है।

आजम खान डीएम से जूता साफ करवाएं न करवाएं ये उनका मामला है, बस तस्वीरें खिंचवाने से जरूर बच जाएं। फिलहाल यहां नजर तो यही आ रहा है कि उनकी पार्टी  मायावती के सामने दंडवत है। खुद मुलायम सिंह यादव भी यह कह चुके हैं कि अपने ही लोग पार्टी को बर्बाद करने में लगे हुए हैं। उनका इशारा किस तरफ था इसके कयास भी लोग अपने-अपने तरीके से लगा सकते है।

आजम खान की जुबान कई बार फिसली है। आइए आपको बताते हैं उनके कुछ ऐसे ही बयान दादरी हत्याकांड पर विवादित बयान देते हुए कहा आजम ने कहा था कि गोभक्त आज के बाद किसी भी होटल के मेन्यू में बीफ का दाम न लिखने दें। अगर ऐसा होता है तो सभी फाइव स्टार होटल को बाबरी मस्जिद जैसे तोड़ दिया जाए।

2013 में कारगिल युद्ध पर तीखा बयान देते हुए आजम ने कहा था कि कारगिल पर फतह दिलाने वाले सेना के जवान हिंदू नहीं मुस्लिम थे। आजम के इस बयान को लेकर काफी विवाद हुआ था।

आजम खान ने पीएम मोदी के एक बयान को लेकर विवादित बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि कुत्ते के बच्चे के बड़े भाई हमें तुम्हारा गम नहीं चाहिए। दरअसल मोदी ने एक इंटरव्यू में एक विदेशी मैग्जीन के एक सवाल के जवाब में कहा था, कि अगर आपकी कार के नीचे कुत्ते का बच्चा भी आता है तो दुख होता है। आजम ने मोदी के कुत्ते वाले बयान को मुस्लिमों से जोड़ते हुए ये विवादित बयान दिया था।

2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान आजम ने भड़काऊ बयाने देते हुए बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह पर निशाना साधा था। उन्होंने कहा था कि 302 का अपराधी गुंडा नंबर वन शाह यूपी में दशहत फैलाने आया है। वो यहीं नही रुके जब इस बयान पर खूब हंगामा हुआ तो उन्होंने कहा कि क्या ऐसे अपराधी को भारत रत्न दिलवा दूं। इसके लिए चुनाव आयोग ने उन्हें नोटिस भी थमाया था।

बदांयू के एक कार्यक्रम में उन्होंने महिलाओं के बारे में कई आपत्तिजनक टिप्पणी की। उन्होंने कहा है कि गरीब घरों की महिलाएं यार के साथ नहीं जा सकतीं, लिहाजा ज्यादा बच्चे पैदा करती हैं।

एक बार जब आजम खान से यह पूछा गया कि वे योगी आदित्यनाथ के गढ़ में हैं और क्या प्यार-मोहब्बत से वह तल्ख रिश्तों को खत्म करेंगे। इस प्रशन का आजम ने विवादित बयान दिया और कहा कि पहले योगी आदित्यनाथ शादी करें और अपना मर्द होना साबित करें। तब वह मोहब्ब्त भी करने लगेंगे।

आजम खान ने बुलंदशहर रेप केस पर कहा था ये कोई राजनीती पार्टी का कार्य लगता है। सत्ता की लोभी पार्टियां किसी भी हद तक जा सकती है। इसी बयान को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने आजम को फटकार लगाते जवाब मांगा था।

यहां यह भी बता दें कि सपा के वरिष्‍ठ नेता और पूर्व मंत्री आजम खान के खिलाफ बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर का अपमान करने का मामला दर्ज किया गया था। आजम खान के खिलाफ यह मामला आंबेडकर महासभा की ओर से हजरतगंज कोतवाली में दर्ज कराया गया था। आजम खान ने बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर के खिलाफ विवादित बयान साल 2016 में कैबिनेट मंत्री रहते हुए दिया था। एफआईआर में आजम खान पर आरोप लगाया गया है कि उन्‍होंने कैबिनेट मंत्री रहते हुए बाबा साहब का अपमान किया और दो वर्गों के बीच द्वेष फैलाने की कोशिश की। आजम खान पर बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर को भूमाफिया कहने का आरोप है।