देहरादून के रानीपोखरी इलाके में सोमवार की रात एक ऐसी घटना हुई जिसने पूरे क्षेत्र को हिलाकर रख दिया. जौलीग्रांट एयरपोर्ट स्थित स्टेट गेस्ट हाउस में गार्ड ड्यूटी पर तैनात हेड कॉन्स्टेबल सुनील कुमार  की उनकी ही सर्विस कार्बाइन से निकली गोलियों ने जान ले ली. सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि एक साथ 11 राउंड फायर हुए और इसका कोई ठोस जवाब अभी तक किसी के पास नहीं है.

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सोमवार रात करीब सवा नौ बजे ड्यूटी के दौरान सुनील को खबर मिली कि उनकी पत्नी की तबीयत ठीक नहीं है. बिना देर किए वह अपनी सर्विस कार्बाइन साथ लेकर रानीपोखरी स्थित अपने घर नागाघेर की ओर निकल पड़े.

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परिवार के सामने सुनील की हत्या

घर पहुंचे, गेट खटखटाया, आवाज दी. अंदर से पत्नी, बेटा तुषार और बेटी सब मौजूद थे. सुनील आंगन में खड़े होकर जूते उतार रहे थे, तभी अचानक धड़धड़ाहट की आवाज आई एक के बाद एक गोलियां चल गई

घर के अंदर मौजूद परिजन दौड़कर बाहर आए तो सुनील खून से लथपथ जमीन पर गिरे पड़े थे. उनकी छाती में तीन गोलियां लगी थीं. परिवार उन्हें फौरन हिमालयन अस्पताल ले गया लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी. डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.

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सबसे बड़ा सवाल जूते उतारते वक्त 11 गोलियां कैसे चली ?

यह मामला इसलिए और पेचीदा हो जाता है क्योंकि सर्विस कार्बाइन से एक साथ 11 राउंड का फायर होना सामान्य नहीं माना जाता. थानाध्यक्ष राजेंद्र खोलिया के मुताबिक तीन गोलियां छाती में लगीं जो जानलेवा साबित हुईं. लेकिन सवाल यह है कि महज ठोकर लगने या गिरने से क्या कोई हथियार इतने राउंड फायर कर सकता है? क्या हथियार में तकनीकी खराबी थी? या फिर किसी और ने ट्रिगर दबाया? पुलिस फिलहाल इन्हीं सवालों के जवाब तलाश रही है. 

पारिवारिक विवाद का पहलू भी जांच के दायरे में

जांच के दौरान एक और अहम बात सामने आई है. पड़ोसियों और स्थानीय लोगों के बयानों में यह बात उभरकर आई कि सुनील का पिछले कुछ समय से घर में अनबन चल रही थी. घटना से ठीक पहले भी घर में किसी तरह का तनाव था पुलिस इस पहलू को भी गंभीरता से ले रही है.

रात करीब दस बजे अस्पताल के जरिए थाना रानीपोखरी को घटना की सूचना मिली. एसपी देहात जया बलोनी के निर्देश पर फील्ड यूनिट और फोरेंसिक टीम ने घटनास्थल को घेरकर साक्ष्य जुटाने शुरू किए. शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया है.

पुलिस मामले को अभी संदिग्ध मानकर चल रही है. न किसी को गिरफ्तार किया गया है, न कोई एफआईआर दर्ज हुई है. जब तक फोरेंसिक रिपोर्ट और पोस्टमॉर्टम के नतीजे नहीं आते, असली सच्चाई परदे के पीछे ही रहेगी.