उत्तर प्रदेश स्थित शामली विधानसभा एक शहरी और ग्रामीण आबादी का मिश्रण है. यह सीट शामली जिले और कैराना लोकसभा सीट का हिस्सा है. इस सीट की संख्या 10 है. इस समय राष्ट्रीय लोकदल के प्रसन्न कुमार विधायक हैं, जो कि साल 2022 में समाजवादी और राष्ट्रीय लोकदल के गठबंधन में इस सीट से चुनाव जीते थे. भारतीय जनता पार्टी ने तेजेन्द्र सिंह को टिकट दिया था, बहुजन समाज पार्टी से बृजेन्द्र चुनाव लड़े थे.वहीं भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने मोहम्मद अयूब जंग को टिकट दिया था. 

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शामली एक जाट बाहुल्य सीट मानी जाती है. गन्ना किसानों का गढ़ भी शामली कहलाता है. शामली में गुड़ की मिठास है तो राजनीति की बिसात भी. सपा और भाजपा दोनों का तगड़ा वोट बैंक इस सीट पर माना जाता है. शामली के सहारे आरएलडी भी अपनी विरासत बचाने की कवायद करती रहती है.

साल 2026 के एसआईआर के बाद शामली विधानसभा सीट पर 2 लाख 84 हजार 524 मतदाता हैं. वहीं साल 2024 के लोकसभा चुनाव के वक्त 3 लाख 11 हजार 974 मतदाता थे. यानी लगभग 27 हजार 450 मतदाता घटे हैं.

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साल 2022 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोकदल ने एक साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ा था. सपा ने गठबंधन के तहत शामली सीट आरएलडी के कोटे में दी थी. बीजेपी ने पश्चिमी यूपी में अकेले चुनाव लड़ा था.

साल 2022 के विधानसभा चुनाव में शामली में किस पार्टी को कितने वोट मिले-

1. आरएलडी-सपा गठबंधन- 1 लाख 3 हजार 0702. बीजेपी- 95 हजार 9633. बसपा- 8 हजार 1834. नोटा- 7995. कांग्रेस- 780

साल 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा और आरएलडी ने साथ मिलकर बीजेपी को शामली विधानसभा में हरा दिया था. आरएलडी के प्रसन्न चौधरी ने बीजेपी के तेजेन्द्र सिंह को 7 हजार 107 वोटों से हराया था. बसपा को 8 हजार 183 वोट मिले थे. शामली विधानसभा में कांग्रेस की बदहाली का अंदाजा आप इस आंकड़ें से लगा सकते हैं कि कांग्रेस प्रत्याशी से ज्यादा वोट नोटा को मिले. नोटा को 799 वोट तो कांग्रेस के मुस्लिम प्रत्याशी को 780 वोट ही मिल पाए. यानी कांग्रेस की हालत बेहद दयनीय रही.

साल 2022 के विधानसभा चुनाव में शामली सीट पर सपा-आरएलडी गठबंधन को 48.86 फीसदी, बीजेपी को 45.49 फीसदी और बसपा को 3.88 फीसदी मत प्राप्त हुए. सपा और बीजेपी के बीच 3.37 फीसदी मतों का अंतर रहा.

शामली सीट पर अब बीजेपी और आरएलडी के सामने सीट बंटवारे की चुनौती है. आरएलडी अब बीजेपी के साथ गठबंधन में है. शामली विधानसभा सीट पर आरएलडी का सिटिंग विधायक है तो बीजेपी के पूर्व विधायक की भी दावेदारी बनी हुई है. ऐसे में यह सीट क्या बीजेपी अपने कोटे में रखेगी या फिर आरएलडी अपने हिस्से में लेने में कामयाब होगी, यह बात भी देखने और समझने वाली होगी.

अब एक नजर डालते हैं कि साल 2024 के लोकसभा चुनाव में शामली विधानसभा सीट पर किस पार्टी को कितने वोट मिले-

1. बीजेपी- 91 हजार 7272. सपा- 80 हजार 4973. बसपा- 6 हजार 335

2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी शामली विधानसभा सीट जीतने में कामयाब हुई. बीजेपी ने 11 हजार 230 वोटों से सपा को पीछे कर दिया. शामली कैराना लोकसभा सीट का हिस्सा है. सपा और कांग्रेस गठबंधन से इकरा हसन और बीजेपी-आरएलडी गठबंधन से प्रदीप कुमार चुनाव लड़ रहे थे. सपा को इस सीट पर कांग्रेस गठबंधन का कोई भी फायदा नहीं हुआ. वहीं बीजेपी को आरएलडी से गठबंधन करने के बावजूद भी बीजेपी को साल 2022 के मुकाबले  4 हजार 236 वोट कम मिले. यानी बीजेपी को भी आरएलडी गठबंधन से कोई फायदा नहीं हुआ. बसपा के वोट भी साल 2022 के मुकाबले साल 2024 में कम हुए.

शामली विधानसभा में साल 2024 के नतीजे बीजेपी के लिए इसलिए उत्साहवर्धक हैं क्योंकि बीजेपी साल 2022 में शामली विधानसभा सीट हार गई थी.

अब एक नजर डालते हैं शामली विधानसभा के जातीय समीकरण पर-

1. मुस्लिम- 80 हजार2. जाट- 68 हजार3. वैश्य- 38 हजार4. कश्यप- 25 हजार5. एससी- 25 हजार6. ब्राह्मण- 23 हजार7. गुर्जर- 21 हजार8. सैनी- 7 हजार

शामली में जाट और मुस्लिम मतदाता सबसे ज्यादा हैं. इसके बाद गुर्जर, कश्यप, ब्राह्मण और एससी मतदाता लगभग बराबर संख्या में हैं. अगर इन चारों की संख्या मिला दें तो यह लगभग 1 लाख के पार बैठता है. वैश्य और एससी समाज इस सीट पर साइलेंट वोटर के तौर पर जाना जाता है.